झांसी। सरकारी संस्थान में भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) मऊरानीपुर में तैनात महिला अनुदेशक रेनू वर्मा को एंटी करप्शन टीम ने छात्रों से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोप है कि वह परीक्षा सत्यापन और प्रवेश पत्र जारी करने के नाम पर छात्रों से पैसे मांग रही थीं। पीड़ित छात्रों ने हिम्मत दिखाते हुए इसकी शिकायत की, जिसके बाद टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। घटना के बाद संस्थान में हड़कंप मच गया और अन्य छात्र भी खुलकर सामने आने लगे हैं।
5 हजार से शुरू हुई मांग, 3 हजार पर तय हुआ सौदा
पीड़ित छात्र वेदान्त अहिरवार और बोबीराजा ने बताया कि सीबीटी परीक्षा से पहले वेरिफिकेशन के नाम पर उनसे प्रति छात्र 5 हजार रुपये की मांग की गई थी। जब उन्होंने असमर्थता जताई तो बार-बार अनुरोध के बाद सौदा 3 हजार रुपये प्रति छात्र पर तय हुआ। छात्रों को यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से गुप्त शिकायत कर दी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप तैयार किया और आरोपी को पकड़ने की रणनीति बनाई।
केमिकल लगे नोटों से खुली पोल, हाथ हुए गुलाबी
एंटी करप्शन टीम ने योजना के तहत छात्रों को केमिकल लगे नोट दिए। शुक्रवार सुबह करीब 11:22 बजे जैसे ही छात्रों ने आईटीआई परिसर के वर्कशॉप में आरोपी को 6,000 रुपये दिए, टीम ने तुरंत छापा मार दिया। मौके पर ही अनुदेशक को पकड़ लिया गया। जब उनके हाथ धुलवाए गए तो वे रसायन के कारण गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई। पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई थी, जिससे आरोपी को भनक तक नहीं लग सकी।
मुकदमा दर्ज, जांच में जुटी टीम
इस कार्रवाई का नेतृत्व निरीक्षक अरविन्द कुमार सिंह ने किया, जिनके साथ श्याम सिंह, इरशाद खां और राहुल कुशवाहा सहित 12 सदस्यीय टीम मौजूद रही। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मऊरानीपुर कोतवाली लाया गया, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की वसूली पहले से चल रही थी और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।


