बक्सर में 51 बटुकों का उपनयन संस्कार:विश्वामित्र सेना ने मुफ्त सामूहिक यज्ञोपवीत का आयोजन किया

बक्सर जिले के सिकटौना ग्राम स्थित श्रीधराचार्य वेद कर्मी गुरुकुलम में 9 अप्रैल को विश्वामित्र सेना ने निशुल्क सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 51 बटुकों का वैदिक विधि-विधान से उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने किया। रंगनाथ द्विवेदी के मार्गदर्शन और बनारसी दुबे के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह संस्कार विधिवत संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावक और बच्चे उपस्थित रहे। सनातन परंपरा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना मुख्य उद्देश्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन परंपरा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। इसमें नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर दिया गया, जो शास्त्रों में वर्णित “जन्मना जायते शूद्रः, संस्कारात् द्विज उच्यते” के सिद्धांत को दर्शाता है। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राजकुमार चौबे ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, ज्ञान और संस्कारों का आधार तैयार करता है। उन्होंने सनातन धर्म के संरक्षण और उत्थान के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी विश्वामित्र सेना चौबे ने बताया कि विश्वामित्र सेना भविष्य में भी इसी तरह के सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव अशोक कुमार उपाध्याय, मोहित बाबा, गोवर्धन चौबे, अर्जुन तिवारी, ओम जी यादव और गुड्डू पांडेय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. लोकनाथ द्विवेदी, पंकज पांडेय, बबन तिवारी, जय कुमार तिवारी और विद्यासागर दुबे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन की सराहना की। इस आयोजन ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश दिया। बक्सर जिले के सिकटौना ग्राम स्थित श्रीधराचार्य वेद कर्मी गुरुकुलम में 9 अप्रैल को विश्वामित्र सेना ने निशुल्क सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 51 बटुकों का वैदिक विधि-विधान से उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने किया। रंगनाथ द्विवेदी के मार्गदर्शन और बनारसी दुबे के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह संस्कार विधिवत संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावक और बच्चे उपस्थित रहे। सनातन परंपरा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना मुख्य उद्देश्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन परंपरा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। इसमें नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर दिया गया, जो शास्त्रों में वर्णित “जन्मना जायते शूद्रः, संस्कारात् द्विज उच्यते” के सिद्धांत को दर्शाता है। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राजकुमार चौबे ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, ज्ञान और संस्कारों का आधार तैयार करता है। उन्होंने सनातन धर्म के संरक्षण और उत्थान के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी विश्वामित्र सेना चौबे ने बताया कि विश्वामित्र सेना भविष्य में भी इसी तरह के सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव अशोक कुमार उपाध्याय, मोहित बाबा, गोवर्धन चौबे, अर्जुन तिवारी, ओम जी यादव और गुड्डू पांडेय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. लोकनाथ द्विवेदी, पंकज पांडेय, बबन तिवारी, जय कुमार तिवारी और विद्यासागर दुबे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन की सराहना की। इस आयोजन ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश दिया।  

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