Change Digital Banking System: बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक एक नया उपाय अपनाने पर विचार कर रहा है। इस उपाय के तहत यूपीआई से भेजी जाने वाली रकम पर कूलिंग पीरियड लग सकता है। दरअसल इस नियम के अनुसार यदि आप यूपीआई या आईएमपीएस के जरिए किसी व्यक्ति को 10,000 रुपये से ज्यादा की रकम भेजते हैं तो उस रकम को पहुंचने के लिए एक घंटे इंतजार करना पड़ सकता है।
इस नई योजना के तहत 10,000 रुपये से अधिक के डिजिटल ट्रांजेक्शन पर 1 घंटे तक का कूलिंग पीरियड लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर आरबीआई ने 8 मई तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद अंतिम गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।
क्यों उठाया जा रहा है यह कदम?
इस कदम को उठाने के पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ता डिजिटल फ्रॉड है। आंकड़ों के मुताबिक 2021 में 551 करोड़ रुपये के फ्रॉड केस सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन कुल फ्रॉड का 98 फीसदी वैल्यू कवर करते हैं। वहीं ऑनलाइन डरा-धमकाकर होने वाली ठगी भी इससे रोकी जा सकेगी।
किल स्वीच पर भी हो रहा विचार
- 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन को 1 घंटे के लिए होल्ड पर रखा जाएगा। इस दौरान ग्राहक इसे रद्द कर सकेगा।
- वरिष्ठ नागरिक यानी 70 उम्र के लोगों के लिए 50,000 रुपये से अधिक के ट्रांसफर पर ट्रस्टेड पर्सन की अनुमति अनिवार्य होगी।
- व्यक्तिगत और छोटे बिजनेस खातों में 25 लाख रुपये से अधिक जमा होने पर बैंक पुष्टि के बाद ही पैसा क्रेडिट करेगा।
- रिजर्व बैंक किल स्विच पर भी विचार कर रहा है। इस बटन से ग्राहक एक ही बार में अपने सभी डिजिटल पेमेंट चैनल (यूपीआई, कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग) बंद कर सकेगा।


