Girl Pregnant Without Intercourse: आमतौर पर प्रेग्नेंसी के लिए शारीरिक संबंध बनाना जरूरी माना जाता है, लेकिन आज के समय में मेडिकल साइंस में हो रहे बदलावों की वजह से आईवीएफ और सेरोगेसी जैसे तरीकों से भी मां बनना संभव है। हाल ही में मेडिकल साइंस के इतिहास में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर Dr. Ankita Shahasane ने प्रेग्नेंसी से जुड़ी एक ऐसी केस स्टडी शेयर की है, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह कहानी एक 15 साल की लड़की की है, जो बिना किसी फिजिकल इंटरकोर्स या किसी आर्टिफिशियल तकनीक के मां बन गई। आज के इस लेख में आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह कैसे मुमकिन हुआ।
हॉस्पिटल में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
National Library of Medicine में छपे जर्नल के अनुसार यह मामला तब शुरू हुआ जब एक 15 साल की लड़की पेट में दर्द होने की वजह से हॉस्पिटल पहुंची। डॉक्टरों को लगा कि शायद कोई गंभीर इन्फेक्शन है, लेकिन जांच के बाद पता चला कि लड़की असल में लेबर पेन यानी प्रसव पीड़ा में थी। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब डॉक्टरों ने चेकअप के दौरान पाया कि उस लड़की के शरीर में जन्म से ही वैजाइनल ओपनिंग यानी वैजाइना थी ही नहीं। इसका मतलब यह था कि उस लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना मुमकिन ही नहीं था। इसके बावजूद, डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिलवाया।
पेट के जख्म और स्पर्म का सफर
बेबी डिलीवरी के बाद डॉक्टरों के दिमाग में बार-बार यही सवाल आ रहा था कि अगर शरीर में कोई बाहरी रास्ता ही नहीं था, तो स्पर्म अंदर कैसे पहुंचे। इस गुत्थी को लड़की की 9 महीने पुरानी एक मेडिकल रिपोर्ट ने सुलझाया। दरअसल प्रेग्नेंट होने से ठीक 9 महीने पहले उस लड़की का अपने बॉयफ्रेंड और एक पुराने प्रेमी के साथ झगड़ा हुआ था, जिसमें उसे पेट पर चाकू लग गया था। चाकू की चोट की वजह से उसके पेट में छोटे-छोटे छेद हो गए थे। उसी दौरान वह लड़की ओरल सेक्स में शामिल थी। वैसे तो पेट का एसिड स्पर्म को तुरंत मार देता है, लेकिन खाली पेट होने या एसिड कम होने की वजह से स्पर्म पेट के उन छेदों के रास्ते बाहर निकल गए और लड़की के शरीर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच गए।
इत्तेफाक और मेडिकल साइंस का करिश्मा!
डॉक्टरों के मुताबिक इस प्रेग्नेंसी के पीछे बहुत सारे इत्तेफाक एक साथ काम कर रहे थे। पहली बात यह थी कि स्पर्म लार की मदद से जीवित रह गए और दूसरी बात यह कि चाकू लगने की वजह से स्पर्म को पेट से बाहर निकलकर गर्भाशय तक पहुंचने का सीधा रास्ता मिल गया। इसमें सबसे बड़ा इत्तेफाक यह था कि ठीक उसी समय लड़की के शरीर में अंडा भी बना हुआ था यानी उसका ओव्यूलेशन पीरियड चल रहा था। इस तरह स्पर्म ने पेट के छेदों से निकलकर ओवरी और ट्यूब्स तक का रास्ता तय किया और अंडे को फर्टिलाइज कर दिया जिससे वह लड़की प्रेग्नेंट हो गई।
मेडिकल जगत के लिए एक अनोखा मामला
इस तरह की प्रेग्नेंसी को ट्रॉमा-इंड्यूस्ड प्रेग्नेंसी कहा जाता है, जो दुनिया में करोड़ों में से किसी एक के साथ ही हो सकती है। यह मामला साबित करता है कि मेडिकल साइंस में कभी-कभी ऐसी चीजें भी सच हो जाती हैं, जिन पर यकीन करना लगभग नामुमकिन लगता है।


