नालंदा जिले के बेन प्रखंड स्थित कृपागंज गांव के एक साधारण किसान परिवार के लाल ने सफलता की नई इबारत लिख दी है। किसान संतोष सिंह के पुत्र अभिषेक कुमार ने कस्टम ऑफिसर के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होकर जिले का नाम देशभर में रोशन किया है। इससे पहले अभिषेक का चयन भारत सरकार के श्रम विभाग में इंवेस्टिगेटर पद पर हुआ था, जहां देशभर में मौजूद मात्र चार रिक्तियों में से एक पद पर कब्जा जमाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। अभिषेक की सफलता की यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपनी मैट्रिक की पढ़ाई औरंगाबाद से पूरी करने के बाद गयाजी से इंटरमीडिएट और स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनके जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वाणिज्य (कॉमर्स) में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के साथ-साथ अर्थशास्त्र में भी अपनी दूसरी मास्टर डिग्री की पढ़ाई जारी रखी है। उनकी शैक्षणिक प्रतिभा का प्रमाण यह भी है कि उन्होंने कॉमर्स विषय में अपीयरिंग के दौरान ही ‘नेट’ (NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में अर्थशास्त्र की पढ़ाई के साथ ही ‘जेआरएफ’ (JRF) होल्डर भी हैं। छात्र जीवन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे हैं, जिसे देखते हुए उन्हें 10वीं कक्षा में रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रतियोगिता में भी सम्मानित किया जा चुका है। सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया वर्तमान में कस्टम ऑफिसर के रूप में चयनित होने से पहले अभिषेक ने विभिन्न सरकारी विभागों में कार्य करते हुए व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। वे आयकर विभाग, गृह मंत्रालय, केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अभिषेक अपनी इन तमाम सफलताओं का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने दिवंगत नाना बिंदेश्वरी सिंह के आशीर्वाद को देते हैं। बेटे के कस्टम ऑफिसर बनने की खबर मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। माता ललिता देवी समेत पूरे परिवार के लिए यह गौरव का क्षण है। ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो एक किसान का बेटा भी सफलता के उच्चतम शिखर को छू सकता है। नालंदा जिले के बेन प्रखंड स्थित कृपागंज गांव के एक साधारण किसान परिवार के लाल ने सफलता की नई इबारत लिख दी है। किसान संतोष सिंह के पुत्र अभिषेक कुमार ने कस्टम ऑफिसर के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होकर जिले का नाम देशभर में रोशन किया है। इससे पहले अभिषेक का चयन भारत सरकार के श्रम विभाग में इंवेस्टिगेटर पद पर हुआ था, जहां देशभर में मौजूद मात्र चार रिक्तियों में से एक पद पर कब्जा जमाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। अभिषेक की सफलता की यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपनी मैट्रिक की पढ़ाई औरंगाबाद से पूरी करने के बाद गयाजी से इंटरमीडिएट और स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनके जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वाणिज्य (कॉमर्स) में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के साथ-साथ अर्थशास्त्र में भी अपनी दूसरी मास्टर डिग्री की पढ़ाई जारी रखी है। उनकी शैक्षणिक प्रतिभा का प्रमाण यह भी है कि उन्होंने कॉमर्स विषय में अपीयरिंग के दौरान ही ‘नेट’ (NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में अर्थशास्त्र की पढ़ाई के साथ ही ‘जेआरएफ’ (JRF) होल्डर भी हैं। छात्र जीवन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे हैं, जिसे देखते हुए उन्हें 10वीं कक्षा में रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रतियोगिता में भी सम्मानित किया जा चुका है। सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया वर्तमान में कस्टम ऑफिसर के रूप में चयनित होने से पहले अभिषेक ने विभिन्न सरकारी विभागों में कार्य करते हुए व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। वे आयकर विभाग, गृह मंत्रालय, केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अभिषेक अपनी इन तमाम सफलताओं का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने दिवंगत नाना बिंदेश्वरी सिंह के आशीर्वाद को देते हैं। बेटे के कस्टम ऑफिसर बनने की खबर मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। माता ललिता देवी समेत पूरे परिवार के लिए यह गौरव का क्षण है। ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो एक किसान का बेटा भी सफलता के उच्चतम शिखर को छू सकता है।


