धरहरा प्रखंड के वसौनी गांव निवासी सीआरपीएफ जवान रंजन कुमार को शौर्य दिवस के अवसर पर वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान दिल्ली के वसंत विहार स्थित शौर्य समारोह में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रदान किया। यह तीसरी बार है जब रंजन कुमार को वीरता पदक से नवाजा गया है। इससे पहले, उन्हें सीआरपीएफ के 82वें स्थापना दिवस पर गुरुग्राम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा भी वीरता पुरस्कार मिल चुका है। 2010 में सीआरपीएम में शामिल हुए थे रंजन कुमार वर्ष 2010 में सीआरपीएफ में शामिल हुए थे। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान नक्सलवाद और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2016 में उनका स्थानांतरण 161वीं बटालियन में हुआ, जहां वे श्रीनगर में स्पेशल ऑपरेशन टीम (एसओटी) का हिस्सा बने। वर्ष 2016 से 2019 के बीच उनकी टीम ने 20 सफल अभियानों को अंजाम दिया, जिनमें 80 से अधिक आतंकवादी मारे गए और 25 को जीवित गिरफ्तार किया गया। 12 फरवरी 2018 को उनकी टीम ने सीआरपीएफ की 23वीं बटालियन मुख्यालय पर हुए फिदायीन हमले को भी विफल किया था। इस मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी मारे गए थे। उनकी असाधारण वीरता के लिए उन्हें वर्ष 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। रंजन कुमार के पिता रीतो यादव ने अपने पुत्र की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है। उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ हर वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस मनाता है। यह दिवस 1965 में कच्छ के रण स्थित सरदार पोस्ट पर पाकिस्तानी हमले को विफल करने वाले सीआरपीएफ के वीर जवानों की याद में मनाया जाता है। धरहरा प्रखंड के वसौनी गांव निवासी सीआरपीएफ जवान रंजन कुमार को शौर्य दिवस के अवसर पर वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान दिल्ली के वसंत विहार स्थित शौर्य समारोह में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रदान किया। यह तीसरी बार है जब रंजन कुमार को वीरता पदक से नवाजा गया है। इससे पहले, उन्हें सीआरपीएफ के 82वें स्थापना दिवस पर गुरुग्राम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा भी वीरता पुरस्कार मिल चुका है। 2010 में सीआरपीएम में शामिल हुए थे रंजन कुमार वर्ष 2010 में सीआरपीएफ में शामिल हुए थे। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान नक्सलवाद और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2016 में उनका स्थानांतरण 161वीं बटालियन में हुआ, जहां वे श्रीनगर में स्पेशल ऑपरेशन टीम (एसओटी) का हिस्सा बने। वर्ष 2016 से 2019 के बीच उनकी टीम ने 20 सफल अभियानों को अंजाम दिया, जिनमें 80 से अधिक आतंकवादी मारे गए और 25 को जीवित गिरफ्तार किया गया। 12 फरवरी 2018 को उनकी टीम ने सीआरपीएफ की 23वीं बटालियन मुख्यालय पर हुए फिदायीन हमले को भी विफल किया था। इस मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी मारे गए थे। उनकी असाधारण वीरता के लिए उन्हें वर्ष 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। रंजन कुमार के पिता रीतो यादव ने अपने पुत्र की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है। उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ हर वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस मनाता है। यह दिवस 1965 में कच्छ के रण स्थित सरदार पोस्ट पर पाकिस्तानी हमले को विफल करने वाले सीआरपीएफ के वीर जवानों की याद में मनाया जाता है।


