हजारों साल पुरानी विरासत को बचाने के लिए प्रशासन सख्त:मुजफ्फरपुर में पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण पर बड़ी पहल, हर प्रखंड में नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और डिजिटलीकरण को गति देने के उद्देश्य से गुरुवार को मुजफ़्फरपुर डीम सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में “ज्ञान भारतम् मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा करते हुए इसे जन-अभियान का स्वरूप देने पर जोर दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान विरासत को संरक्षित करने का राष्ट्रीय अभियान है। क्या है ज्ञान भारतम् मिशन बैठक में बताया गया कि ज्ञान भारतम् मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, सूचीकरण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है। कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र, कपड़े सहित विभिन्न माध्यमों पर लिखी ऐतिहासिक पांडुलिपियों को चिन्हित कर वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें वेद, पुराण, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों का अमूल्य ज्ञान निहित है। हजारों साल की विरासत को बचाने की मुहिम जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा विश्व में अद्वितीय रही है, लेकिन समय के साथ पांडुलिपियां नष्ट होने के कगार पर पहुंच रही हैं। ऐसे में इस मिशन के जरिए न सिर्फ इस धरोहर को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि इसे डिजिटल माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए सुलभ भी बनाया जाएगा। जिला स्तर पर टीम का गठन, विशेषज्ञों को जोड़ा गया डीएम ने पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और संरक्षण के लिए जिला स्तर पर विशेष टीम का गठन किया है। इसमें शिक्षा विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग, पुस्तकालयाध्यक्ष, इतिहासकार, संस्कृत शिक्षक, संग्रहालय प्रतिनिधि, एनएसएस स्वयंसेवक सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। साथ ही इस विषय में रुचि रखने वाले व्यक्ति या संस्था को भी जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया है। पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण और दस्तावेजीकरण सर्वेक्षण के बाद सभी पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से सूचीकरण किया जाएगा। प्रत्येक पांडुलिपि की फोटो, विवरण और उसकी वर्तमान स्थिति का दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आगे संरक्षण और डिजिटलीकरण में सुविधा हो। डिजिटलीकरण कार्य में तेजी, SOP के अनुसार होगी प्रक्रिया डीएम ने सभी संबंधित विभागों को तय समय सीमा के भीतर डिजिटलीकरण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार ही सभी कार्य करने को कहा गया है। हर प्रखंड में नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक प्रखंड में एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर कार्यों की निगरानी करेगा। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और डिजिटलीकरण को गति देने के उद्देश्य से गुरुवार को मुजफ़्फरपुर डीम सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में “ज्ञान भारतम् मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा करते हुए इसे जन-अभियान का स्वरूप देने पर जोर दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान विरासत को संरक्षित करने का राष्ट्रीय अभियान है। क्या है ज्ञान भारतम् मिशन बैठक में बताया गया कि ज्ञान भारतम् मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, सूचीकरण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है। कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र, कपड़े सहित विभिन्न माध्यमों पर लिखी ऐतिहासिक पांडुलिपियों को चिन्हित कर वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें वेद, पुराण, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों का अमूल्य ज्ञान निहित है। हजारों साल की विरासत को बचाने की मुहिम जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा विश्व में अद्वितीय रही है, लेकिन समय के साथ पांडुलिपियां नष्ट होने के कगार पर पहुंच रही हैं। ऐसे में इस मिशन के जरिए न सिर्फ इस धरोहर को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि इसे डिजिटल माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए सुलभ भी बनाया जाएगा। जिला स्तर पर टीम का गठन, विशेषज्ञों को जोड़ा गया डीएम ने पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और संरक्षण के लिए जिला स्तर पर विशेष टीम का गठन किया है। इसमें शिक्षा विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग, पुस्तकालयाध्यक्ष, इतिहासकार, संस्कृत शिक्षक, संग्रहालय प्रतिनिधि, एनएसएस स्वयंसेवक सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। साथ ही इस विषय में रुचि रखने वाले व्यक्ति या संस्था को भी जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया है। पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण और दस्तावेजीकरण सर्वेक्षण के बाद सभी पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से सूचीकरण किया जाएगा। प्रत्येक पांडुलिपि की फोटो, विवरण और उसकी वर्तमान स्थिति का दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आगे संरक्षण और डिजिटलीकरण में सुविधा हो। डिजिटलीकरण कार्य में तेजी, SOP के अनुसार होगी प्रक्रिया डीएम ने सभी संबंधित विभागों को तय समय सीमा के भीतर डिजिटलीकरण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार ही सभी कार्य करने को कहा गया है। हर प्रखंड में नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक प्रखंड में एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर कार्यों की निगरानी करेगा।  

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