Middle East: ईरान और अमेरिका के बीच भले ही दो सप्ताह का संघर्षविराम लागू हो गया हो, लेकिन मध्य-पूर्व में तनाव अब भी बना हुआ है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। कई देशों को गैस, तेल और उर्वरक की आपूर्ति को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्थायी संघर्षविराम लागू होने के बावजूद पश्चिम होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाज अब भी डेरा डाले हुए हैं।
उधर, ईरान ने युद्धविराम के 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है, क्योंकि इजरायल ने लेबनान और बेरूत में हमले जारी रखे हैं। इसके बाद एक बार फिर अमेरिका और इजरायल के साथ तेहरान का तनाव बढ़ गया है।
वहीं, युद्धविराम समझौते को स्थायी शांति बनाए रखने के लिए 10 अप्रैल को पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता होने वाली है। इस महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनी एनर्जीअन (Energean) को नए निर्देश जारी किए हैं। उसके इस कदम से मध्य-पूर्व में ईरान से तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलने की संभावना है।
एनर्जीअन कंपनी ने भी की पुष्टि
इजरायल के ऊर्जा मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनी एनर्जीअन (Energean) को भूमध्य सागर में स्थित करिश (Karish) गैस प्लेटफॉर्म पर फिर से काम शुरू करने का निर्देश दिया है। इजरायल की तरफ से यह निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम समझौते के बाद लिया गया है। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हमले के बाद भूमध्य सागर में स्थित करिश (Karish) गैस प्लेटफॉर्म बंद था। सुरक्षा कारणों के चलते इसका उत्पादन रोक दिया गया था।
उधर, इजरायल के ऊर्जा मंत्रालय की अनुमति मिलने की पुष्टि ‘एनर्जीअन’ ने भी की है। कंपनी ने कहा कि अनुमति मिलने के बाद वह करिश साइट पर सुरक्षित तरीके से उत्पादन और संचालन फिर से शुरू कर सकेगी। कंपनी ने यह भी कहा कि वह अपने तय नियमों के अनुसार सावधानीपूर्वक उत्पादन दोबारा शुरू कर रही है और जल्द ही सामान्य कामकाज बहाल कर दिया जाएगा।
क्या होगा असर?
इजरायल द्वारा ‘एनर्जीअन’ को उत्पादन शुरू करने की अनुमति देना ऊर्जा संकट के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम है। दरअसल, करिश प्लेटफॉर्म इजरायल की घरेलू गैस मांग का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इसके दोबारा शुरू होने से इजरायल को महंगे कोयले और डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर ऊर्जा की कमी दूर होगी। वहीं, इजरायल से मिस्र को होने वाला गैस निर्यात बहाल होने से वहां के LNG संयंत्रों को भी मदद मिलेगी, जिससे अंततः वैश्विक आपूर्ति में सुधार होगा।
होर्मुज पर निर्भर नहीं है इजरायल
यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि इजरायल का अधिकांश आयात और निर्यात भूमध्य सागर के माध्यम से होता है। वह अपने माल के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर भौगोलिक रूप से निर्भर नहीं है। इजरायल का ‘इलात’ (Eilat) बंदरगाह लाल सागर के माध्यम से एशियाई बाजारों से जुड़ता है, जो होर्मुज के बजाय बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट पर अधिक निर्भर करता है।
इजरायल के पास करिश, लेविथान और तामार जैसे विशाल गैस क्षेत्र हैं। वह अपनी जरूरत की अधिकांश गैस खुद पैदा करता है और उसे मिस्र और जॉर्डन को निर्यात भी करता है। इसलिए, वह गैस के लिए खाड़ी देशों, जो होर्मुज स्ट्रेट का उपयोग करते हैं, पर निर्भर नहीं है। इजरायल अपना अधिकांश कच्चा तेल अजरबैजान, कजाकिस्तान और अफ्रीका के देशों से मंगवाता है, जो होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते नहीं आता।


