छात्र शक्ति भोजपुर इकाई ने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए परीक्षा नियंत्रक समेत चार्जशीटेड अधिकारियों को तत्काल पद से हटाने की मांग उठाई है। संगठन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय अध्यक्ष भुवन पांडेय ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगी हैं, उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि परीक्षा नियंत्रक पर डिग्री वितरण में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप हैं, फिर भी वे पद पर बने हुए हैं, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है। प्रेस वार्ता में सौरभ पांडे ने 19 सूत्री मांगपत्र जारी करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रमुख मांगों में चार्जशीटेड अधिकारियों को हटाने, आउटसोर्सिंग में पारदर्शिता लाने, मूल प्रमाण-पत्र वितरण की प्रक्रिया सुधारने और फीस वृद्धि पर रोक लगाने की बात शामिल है। छात्रों ने आरोप लगाया कि पहले 500 रुपये शुल्क लेकर भी प्रमाण-पत्र समय पर नहीं दिए गए और अब शुल्क बढ़ा दिया गया है, जिससे छात्रों को आर्थिक और मानसिक परेशानी हो रही है। लाखों रुपये के घोटाला का लगाया आरोप संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि नैक ग्रेडिंग के नाम पर बार-बार मरम्मत काम कर लाखों रुपये का घोटाला किया जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा की खराब स्थिति को भी भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रशासन पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया गया। छात्रों ने विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया। कॉमन रूम, पेयजल, लाइब्रेरी और छात्रावास की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई गई। एमबीए छात्रों के प्लेसमेंट, इंडोर स्टेडियम के संचालन और सांस्कृतिक गतिविधियों के ठप होने जैसे मुद्दे भी उठाए गए। इसके अलावा कुछ शिक्षकों पर फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी करने और निजी कॉलेजों में अवैध वसूली कराने के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई। प्रेस वार्ता में छात्राओं—लवली, ब्यूटी चौबे, चित्तौड़ बाला मौर्या और राबिता—ने भी विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कार्यक्रम के सफल संचालन में बिट्टू पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। छात्र शक्ति भोजपुर इकाई ने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए परीक्षा नियंत्रक समेत चार्जशीटेड अधिकारियों को तत्काल पद से हटाने की मांग उठाई है। संगठन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय अध्यक्ष भुवन पांडेय ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगी हैं, उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि परीक्षा नियंत्रक पर डिग्री वितरण में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप हैं, फिर भी वे पद पर बने हुए हैं, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है। प्रेस वार्ता में सौरभ पांडे ने 19 सूत्री मांगपत्र जारी करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रमुख मांगों में चार्जशीटेड अधिकारियों को हटाने, आउटसोर्सिंग में पारदर्शिता लाने, मूल प्रमाण-पत्र वितरण की प्रक्रिया सुधारने और फीस वृद्धि पर रोक लगाने की बात शामिल है। छात्रों ने आरोप लगाया कि पहले 500 रुपये शुल्क लेकर भी प्रमाण-पत्र समय पर नहीं दिए गए और अब शुल्क बढ़ा दिया गया है, जिससे छात्रों को आर्थिक और मानसिक परेशानी हो रही है। लाखों रुपये के घोटाला का लगाया आरोप संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि नैक ग्रेडिंग के नाम पर बार-बार मरम्मत काम कर लाखों रुपये का घोटाला किया जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा की खराब स्थिति को भी भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रशासन पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया गया। छात्रों ने विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया। कॉमन रूम, पेयजल, लाइब्रेरी और छात्रावास की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई गई। एमबीए छात्रों के प्लेसमेंट, इंडोर स्टेडियम के संचालन और सांस्कृतिक गतिविधियों के ठप होने जैसे मुद्दे भी उठाए गए। इसके अलावा कुछ शिक्षकों पर फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी करने और निजी कॉलेजों में अवैध वसूली कराने के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई। प्रेस वार्ता में छात्राओं—लवली, ब्यूटी चौबे, चित्तौड़ बाला मौर्या और राबिता—ने भी विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कार्यक्रम के सफल संचालन में बिट्टू पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।


