Diabetic Neuropathy: किसी भी व्यक्ति का शुगर लेवल ज्यादा होना की डायबिटीज नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को धीरे-धीरे खोखला कर देती है। इन्ही में से एक है डायबिटिक न्यूरोपैथी। जब शरीर में लंबे समय तक शुगर का स्तर अनियंत्रित रहता है, तो इसका सीधा असर हमारी नसों पर पड़ता है। यह स्थिति दर्दनाक होती है और इसके कारण ही पैरों में संक्रमण और अल्सर पनप सकते है। आइए डॉक्टर नेहा (फिजियोथेरेपिस्ट) से जानते है कि डायबिटिक न्यूरोपैथी क्या होता है?
क्या होती है Diabetic Neuropathy?
यह नसों से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो केवल उन लोगों को होती है जिन्हें डायबिटीज है। लगातार हाई शुगर लेवल नसों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचाता है और उन छोटी रक्त वाहिकाओं को भी डैमेज कर देता है जो नसों तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। इससे नसों की संदेश भेजने की क्षमता कम हो जाती है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण क्या होते है?(Diabetic Neuropathy Cause)
- शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ना।
- शराब और तंबाकू का सेवन करना।
- कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना।
- रक्त वाहिकाओं का डैमेज होना
डायबिटिक न्यूरोपैथी के लक्षण क्या होते है?(Diabetic Neuropathy Symptoms)
- सुन्नपन (Numbness)।
- झनझनाहट (Tingling)।
- पैरों में अचानक बिजली के झटके जैसा दर्द होना।
- चादर का वजन भी बर्दाश्त न होना।
डायबिटिक न्यूरोपैथी से बचने के उपाय क्या होते है?(Diabetic Neuropathy Prevention)
- शुगर लेवल को ज्यादा न होने दें।
- रोज रात को सोने से पहले पैरों को साफ करें।
- अपने खाने में हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर करें।
डायबिटिक न्यूरोपैथी कितनी खतरनाक हो सकती है?(Diabetic Neuropathy Danger)
- पैरों में घाव होना जो जल्दी ठीक नहीं होते।
- पैर काटने (Amputation) तक की नौबत आ सकती है।
- यूरिनरी इन्फेक्शन हो सकता है।
कब मिलें डॉक्टर से?
- पैरों में लगातार सुन्नपन या जलन महसूस हो रही हो।
- पैर में कोई ऐसा घाव हो जो हफ्तों से ठीक न हो रहा हो।
- चलते समय संतुलन बनाने में परेशानी।
- रात के समय पैरों में बहुत तेज दर्द या ऐंठन हो।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


