6-लेन हाईस्पीड कॉरिडोर से अब ग्वालियर आगरा 50 मिनट में तय होगी दूरी

6-लेन हाईस्पीड कॉरिडोर से अब ग्वालियर आगरा 50 मिनट में तय होगी दूरी

मुरैना. केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को ग्वालियर- एक्सप्रेस-वे परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति का जायजा लेते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह हाई-स्पीड कॉरिडोर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई दिशा देगा। इससे पूर्व उन्होंने नक्शे के माध्यम से मीडिया को बताया कि कहां से किस तरह मार्ग निकलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 5500 करोड़ की लागत से बन रहा ग्वालियर-आगरा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे वर्तमान मार्ग की तुलना में लगभग 32 किलोमीटर छोटा होगा और कुल दूरी लगभग 88 किलोमीटर रह जाएगी। साथ ही वर्तमान दो-लेन सडक़ को अपग्रेड कर छह-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जहां न्यूनतम गति 100 किमी प्रति घंटा होगी। इससे आगरा से ग्वालियर की यात्रा, जो अभी 2.5 से 3 घंटे लेती है, मात्र 45 से 50 मिनट में पूरी हो सकेगी। सिंधिया ने कहा कि लगभग 3 वर्ष में ये एक्सप्रेसवे जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना का कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को जल्द से जल्द इस महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से विकास की नई गति स्थापित की जा रही है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में इस गति का लाभ ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश को मिल रहा है।

नियंत्रित प्रवेश-निकास के रहेंगे चार पॉइंट

उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेस-वे को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जिसमें निकास व प्रवेश के मात्र चार पॉइंट रखे जाएंगे। जिसमें से एक-एक यूपी राजस्थान और दो एमपी में रहेंगे। जिससे यातायात निर्बाध और सुरक्षित बना रहेगा। यह व्यवस्था हाई-स्पीड कॉरिडोर को बिना व्यवधान के सुचारु रूप से संचालित करने में सहायक होगी।

सिक्स-लेन ब्रिज और पश्चिमी बायपास से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

सिंधिया ने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत चंबल नदी पर अत्याधुनिक तकनीक से 6-लेन पुल का निर्माण किया जाएगा, जो अपनी संरचना में विश्वस्तरीय होगा। यह विदेशों में दिखने जैसा होगा। इसके साथ ही शिवपुरी को जोडऩे के लिए लगभग 28 किलोमीटर लंबा पश्चिमी बायपास भी विकसित किया जा रहा है, जिसकी लागत लगभग 1400 करोड़ है। इससे दिल्ली, ग्वालियर, शिवपुरी और गुना के बीच आवागमन और अधिक सुलभ होगा।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिला अभूतपूर्व बल

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 5500 करोड़ के इस हाई-स्पीड कॉरिडोर और पश्चिमी बायपास को मिलाकर कुल लगभग 7000 करोड़ की परियोजनाएं क्षेत्र को मिली हैं। इसके अतिरिक्त ग्वालियर में और 600 करोड़ की लागत से आधुनिक रेलवे स्टेशन का निर्माण भी जारी है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से पूरे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र का समग्र कायाकल्प होगा और निवेश, रोजगार एवं व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे।

सिंधिया के कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने बनाई दूरियां

आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के अवलोकन कार्यक्रम में आए केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम में भाजपा के जिला पदाधिकारियों सहित अधिकांश भाजपा नेता नहीं पहुंचे। कार्यक्रम में वही चंद नेता पहुंचे तो कांग्रेस के समय से सिंधिया से जुड़े रहे। जबकि दिमनी विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के कार्यक्रम में ज्यादातर भाजपा नेता मौजूद रहे। इससे भाजपा में गुटबाजी मुखर होती दिखाई दे रही है। सिंधिया के कार्यक्रम में भाजपा नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि जिला महामंत्री सोनू परमार का कहना हैं एक बजे से दिमनी में भाजपा के स्थापना दिवस का कार्यक्रम था, इसलिए हमको सिंधिया के कार्यक्रम की जानकारी नहीं हैं।

किसान बोले: मुआबजा ऊंट के मुंह में जीरा के समान

केन्द्रीय मंत्री सिंधिया के कार्यक्रम शामिल होने आए किसानों का दर्द है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे में जो जमीन जा रही है, उसका अभी तक मुआवजा नहीं मिला हैं, जो दिया जा रहा है, वह ईंट के मुंह में जीरा के समान हैं, अर्थात काफी कम दिया जा रहा है। किसान सिंधिया से मिलकर अपना दर्द बयां करने आए थे लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। किसानों का कहना हैं कि पड़ौसी राज्य राजस्थान में 14 लाख के बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है जबकि हमारे यहां 4 लाख के बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है, जो काफी कम हैं। किसान राजेन्द्र ङ्क्षसह निवासी गड़ाजर का कहना हैं कि हमारे यहां चार लाख के बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है जबकि राजस्थान में हमारे यहां की अपेक्षा तिगुना मुआवजा दिया जा रहा है। बमरौली के किसान कमल सिंह का कहना हैं कि मेरी दो बीघा जमीन व कुंआ एक्सप्रेस वे में जा रही है, उसका अभी तक मुआवजा नहीं मिला हैं।

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