गैस संकट से जूझ रहा बेला इंडस्ट्रियल एरिया:20 दिनों से टंकी-पाइप उत्पादन ठप, 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां बंद; लाखों का हो रहा नुकसान

गैस संकट से जूझ रहा बेला इंडस्ट्रियल एरिया:20 दिनों से टंकी-पाइप उत्पादन ठप, 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां बंद; लाखों का हो रहा नुकसान

मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में इन दिनों उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां रॉ मटेरियल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर कॉमर्शियल एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने फैक्ट्रियों के संचालन को लगभग ठप कर दिया है। इसका असर सबसे ज्यादा पानी की टंकी और पाइप बनाने वाली इकाइयों पर पड़ा है, जो गर्मी के मौसम में सबसे अधिक मांग में रहती हैं। उद्यमियों का कहना है कि पिछले 20 दिनों से टंकी और पाइप का उत्पादन पूरी तरह से बाधित है। पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है और नई सप्लाई नहीं होने से बाजार में भी संकट गहराने लगा है। खासकर सरकार की नल-जल योजना से जुड़े ठेकेदार लगातार टंकी और पाइप की मांग कर रहे हैं, लेकिन फैक्ट्रियां उत्पादन करने में असमर्थ हैं। 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां बंद बेला स्थित कई उद्योगों में ताले लटक गए हैं। प्लास्टिक, बेकरी और अन्य गैस-आधारित इकाइयों को भी उत्पादन बंद करना पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र की करीब 90% फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी हैं या उनका उत्पादन घटकर 20 से 30 प्रतिशत तक रह गया है। उत्पादन ठप होने से मजदूरों पर असर इसी समस्या को समझने के लिए जब भास्कर की टीम बेला स्थित श्री श्याम इंडस्ट्रीज पहुंचे, तो वहां की स्थिति काफी चिंताजनक दिखी। फैक्ट्री के मैनेजर शांतनु अग्रवाल ने बताया कि गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है। पहले हर महीने 70 से 100 कॉमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती थी, लेकिन अब मुश्किल से 7-8 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। इतने में मशीनें सिर्फ गर्म होती हैं, उत्पादन संभव नहीं हो पाता। पिछले 10 दिनों से यूनिट पूरी तरह बंद है। गर्मी का समय हमारा पीक सीजन होता है। इन्हीं 3-4 महीनों की कमाई से सालभर का खर्च चलता है, लेकिन इस बार हालात बेहद खराब है। उत्पादन ठप होने का सीधा असर मजदूरों पर भी पड़ा है। पहले जहां 10-15 मजदूर काम करते थे, अब सिर्फ 2-3 लोगों को ही रखा गया है, वह भी केवल देखरेख के लिए। बाकी मजदूरों को या तो वापस भेज दिया गया है या बिना काम के वेतन देना पड़ रहा है, जिससे उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पीएनजी का कनेक्शन पड़ेगा महंगा उद्यमी शांतनु ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन को भी फिलहाल अव्यवहारिक बताया। उनके अनुसार पीएनजी कनेक्शन लेने में करीब 10 लाख रुपए तक का खर्च आएगा, जिसमें 6 लाख रुपए केवल डिपॉजिट है। इसके अलावा मौजूदा मशीनें एलपीजी पर आधारित हैं, उन्हें बदलना पड़ेगा, जो और महंगा पड़ेगा। पानी की समस्या बढ़ सकती है बेला के एक अन्य उद्यमी अवनीश किशोर ने बताया कि क्रूड ऑयल की कीमतों और गैस आपूर्ति में सुधार का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर लंबे समय तक उद्योग और बाजार दोनों पर पड़ेगा। गर्मी बढ़ने के साथ पानी की टंकियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में उत्पादन ठप होने से आने वाले दिनों में आम लोगों को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में इन दिनों उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां रॉ मटेरियल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर कॉमर्शियल एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने फैक्ट्रियों के संचालन को लगभग ठप कर दिया है। इसका असर सबसे ज्यादा पानी की टंकी और पाइप बनाने वाली इकाइयों पर पड़ा है, जो गर्मी के मौसम में सबसे अधिक मांग में रहती हैं। उद्यमियों का कहना है कि पिछले 20 दिनों से टंकी और पाइप का उत्पादन पूरी तरह से बाधित है। पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है और नई सप्लाई नहीं होने से बाजार में भी संकट गहराने लगा है। खासकर सरकार की नल-जल योजना से जुड़े ठेकेदार लगातार टंकी और पाइप की मांग कर रहे हैं, लेकिन फैक्ट्रियां उत्पादन करने में असमर्थ हैं। 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां बंद बेला स्थित कई उद्योगों में ताले लटक गए हैं। प्लास्टिक, बेकरी और अन्य गैस-आधारित इकाइयों को भी उत्पादन बंद करना पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र की करीब 90% फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी हैं या उनका उत्पादन घटकर 20 से 30 प्रतिशत तक रह गया है। उत्पादन ठप होने से मजदूरों पर असर इसी समस्या को समझने के लिए जब भास्कर की टीम बेला स्थित श्री श्याम इंडस्ट्रीज पहुंचे, तो वहां की स्थिति काफी चिंताजनक दिखी। फैक्ट्री के मैनेजर शांतनु अग्रवाल ने बताया कि गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है। पहले हर महीने 70 से 100 कॉमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती थी, लेकिन अब मुश्किल से 7-8 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। इतने में मशीनें सिर्फ गर्म होती हैं, उत्पादन संभव नहीं हो पाता। पिछले 10 दिनों से यूनिट पूरी तरह बंद है। गर्मी का समय हमारा पीक सीजन होता है। इन्हीं 3-4 महीनों की कमाई से सालभर का खर्च चलता है, लेकिन इस बार हालात बेहद खराब है। उत्पादन ठप होने का सीधा असर मजदूरों पर भी पड़ा है। पहले जहां 10-15 मजदूर काम करते थे, अब सिर्फ 2-3 लोगों को ही रखा गया है, वह भी केवल देखरेख के लिए। बाकी मजदूरों को या तो वापस भेज दिया गया है या बिना काम के वेतन देना पड़ रहा है, जिससे उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पीएनजी का कनेक्शन पड़ेगा महंगा उद्यमी शांतनु ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन को भी फिलहाल अव्यवहारिक बताया। उनके अनुसार पीएनजी कनेक्शन लेने में करीब 10 लाख रुपए तक का खर्च आएगा, जिसमें 6 लाख रुपए केवल डिपॉजिट है। इसके अलावा मौजूदा मशीनें एलपीजी पर आधारित हैं, उन्हें बदलना पड़ेगा, जो और महंगा पड़ेगा। पानी की समस्या बढ़ सकती है बेला के एक अन्य उद्यमी अवनीश किशोर ने बताया कि क्रूड ऑयल की कीमतों और गैस आपूर्ति में सुधार का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर लंबे समय तक उद्योग और बाजार दोनों पर पड़ेगा। गर्मी बढ़ने के साथ पानी की टंकियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में उत्पादन ठप होने से आने वाले दिनों में आम लोगों को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।  

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