बड़ा इमामबाड़ा में ‘याद-ए-शोहदा’: हजारों की भीड़ ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि, गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल

Bada Imambara Yaad-e-Shohda:   लखनऊ के ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा में आयोजित ‘याद-ए-शोहदा’ कार्यक्रम ने एक बार फिर शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत कर दिया। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और इंसानियत, एकता व भाईचारे का संदेश दिया। इस अवसर पर आयोजित जल्सा-ए-ताज़ियत में धर्मगुरुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


Bada Imambara Hindu Muslim Sikh Unity

शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोहदा-ए-राहे हक (सत्य और न्याय के मार्ग पर शहीद हुए लोगों) को याद करना और उनकी कुर्बानियों को श्रद्धांजलि देना था। ताज़ियत के दौरान उपस्थित लोगों ने नम आंखों से शहीदों को याद किया और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मातम, दुआ और खिताब के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और भावनाओं से ओत-प्रोत नजर आया।

आयतुल्लाह के नुमाइंदे की विशेष मौजूदगी

इस श्रद्धांजलि सभा में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अब्दुल मजीद हकीम की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनकी मौजूदगी को आयोजकों और प्रतिभागियों ने सम्मान का विषय बताया। डॉ. हकीम ने अपने संबोधन में शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए कहा कि न्याय, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए दी गई शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने लोगों से एकता और शांति बनाए रखने की अपील की।


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मौलाना कल्बे जवाद की अध्यक्षता में हुआ आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शहीदों की याद केवल एक रस्म नहीं, बल्कि यह हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे कार्यक्रम हमें एकजुट रहने और इंसानियत को सर्वोपरि मानने का संदेश देते हैं।

सभी समुदायों की भागीदारी

‘याद-ए-शोहदा’ कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें हर धर्म और समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे आपसी भाईचारे और सौहार्द का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाओं ने कार्यक्रम में शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और सामाजिक एकता का संदेश दिया।

गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक

लखनऊ की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब से होती है, और यह कार्यक्रम उसी का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया। विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर यह साबित किया कि इंसानियत और एकता किसी भी धर्म या जाति से ऊपर है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि शहीदों की कुर्बानी हमें जोड़ने का काम करती है और हमें नफरत से दूर रहने की सीख देती है।

एग्जिबिशन और सेवा कार्यों का आयोजन

इस अवसर पर एक विशेष प्रदर्शनी (एग्जिबिशन) का आयोजन भी किया गया, जिसमें ईरान युद्ध में शहीद हुए लोगों और बच्चों की तस्वीरों को प्रदर्शित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इन तस्वीरों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और युद्ध की भयावहता का अहसास कराया।


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इसके अलावा, कार्यक्रम स्थल पर मेडिकल कैंप और ब्लड डोनेशन कैंप भी लगाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान कर मानव सेवा का उदाहरण पेश किया। चिकित्सा शिविर में जरूरतमंदों का मुफ्त इलाज भी किया गया।

राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां भी शामिल हुईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, धार्मिक नेता स्वामी सारंग, AIMIM के प्रवक्ता असीम वकार सहित विभिन्न दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता कार्यक्रम में मौजूद रहे। इन सभी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज में एकता और शांति बनाए रखने का संदेश दिया।

नारों के बीच भावनाओं का उफान

कार्यक्रम के दौरान कुछ स्थानों पर इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारे भी लगाए गए, जिससे माहौल में भावनात्मक उबाल देखने को मिला। हालांकि, आयोजन का मुख्य केंद्र शहीदों को श्रद्धांजलि देना और उनकी याद को जीवित रखना ही रहा।

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