बिहार में नए CM के चेहरे पर जारी सस्पेंस के बीच अब संघ और बीजेपी में लगभग सहमति बनती हुई दिखाई दे रही है। BJP सूत्रों की मानें तो डिप्टी CM सम्राट चौधरी को बिहार का नया CM बनाया जा सकता है। अभी तक संघ सम्राट चौधरी के नाम पर राजी नहीं हो रहा था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद सम्राट चौधरी के नाम को लेकर पैरवी की और उन्हें अपनी पसंद बताया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर फिलहाल BJP और संघ के कोई भी पदाधिकारी इस पर स्पष्ट बोलने से बच रहे हैं। संघ बिहार में EBC कैटेगरी के नेता को नया CM बनाना चाहता था। भास्कर ने पिछले एक सप्ताह में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री से लेकर पार्टी के प्रदेश स्तर के कई नेताओं के अलावा कई सीनियर IAS से बात की। हमने उनसे समझने की कोशिश की कि आखिर CM के चेहरे के लिए किस नाम पर चर्चा चल रही है। ऑन रिकॉर्ड कोई भी इस मामले पर कुछ भी बोलने से सीधे परहेज कर रहे हैं, जबकि ऑफ द रिकॉर्ड सभी सम्राट चौधरी के नाम का इशारा कर रहे हैं। इसके साथ ही ये भी दावा कर रहे हैं कि NDA के विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार ही बिहार के नए CM की घोषणा करेंगे। अप्रैल के तीसरे सप्ताह की किसी तारिख को इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। बंगाल के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी संकेत रविवार को BJP की तरफ से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की गई। 40 नेताओं की इस लिस्ट में बिहार से केवल डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम है। बंगाल से सटे जिले किशनगंज से पॉलिटिक्स करने वाले मंत्री दिलीप जायसवाल का भी नाम लिस्ट में नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को भी लिस्ट में जगह नहीं दी गई है। इसमें BJP शासित राज्यों के 6 से ज्यादा मुख्यमंत्रियों का नाम शामिल है। बिहार से मंगल पांडेय और नितिन नवीन भी इसमें हैं। मंगल पांडेय पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी तो नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में देखा जाए तो बिहार से केवल सम्राट चौधरी को ही तवज्जो दी गई है सम्राट अमित शाह के पसंद क्यों, 3 पॉइंट में समझिए
1- मोदी एरा में पावर मिला, पार्टी के हर टास्क को पूरा किया सम्राट चौधरी को अमित शाह के पसंद का नेता क्यों माना जा रहा है? इस सवाल पर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव स्तर के एक नेता ने भास्कर को बताया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह को जब पार्टी की कमान मिली थी तब बिहार BJP को नीतीश कुमार का पिछलग्गु कहा जाता था। पूरी पार्टी पर सुशील मोदी का एकछत्र राज था। इसे खत्म करने के लिए पार्टी ने कभी नित्यानंद राय तो कभी संजय जायसवाल जैसे नेता को कमान दी, लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं रहे। 2- BJP में गैर यादव OBC लीडर के रूप में तैयार किया अमित शाह ने सम्राट चौधरी को BJP के भीतर एक OBC लीडर के तौर पर तैयार किया। सम्राट चौधरी BJP के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए एक ऐसे लीडर के रूप में स्थापित हुए जिसने न केवल संगठन में वर्षों से जड़ जमाए नेताओं का सफाया किया, बल्कि लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पर एक साथ अग्रेशन से हमलावर रहे। शाह के मैसेज पर उन्होंने नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाने के लिए मुरेठा बांधने का अभियान चलाया। जब नीतीश महागठबंधन का साथ छोड़कर NDA के साथ आए तो बतौर डिप्टी और सरकार में नंबर-2 की हैसियत से इन्होंने नीतीश कुमार के निर्देशन में काम भी किया। 3. 20 साल में पहली बार नीतीश कुमार से लेकर गृह विभाग का जिम्मा दिया 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान तारापुर में सम्राट चौधरी के पक्ष में प्रचार करते हुए अमित शाह ने कहा था, ’आप सम्राट चौधरी को जीताइए, हम इन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे।’ ये बात विजय सिन्हा के लिए भी उन्होंने कही थी। सरकार बनने के बाद 2005 के बाद पहली बार गृह विभाग BJP को मिला। नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी गृह मंत्री बने। ये सरकार और बिहार में उनके बढ़ते कद के ही संकेत थे। सम्राट क्यों? नीतीश के बाद क्या लव-कुश समीकरण साधेगी भाजपा सम्राट चौधरी कोइरी समाज से आते हैं। नीतीश कुमार कुर्मी हैं। इन दोनों को बिहार की सियासत में लव-कुश कहा जाता है। राज्य में इन दोनों कोइरी और कुर्मी समाज की आबादी करीब 7% है। इसमें कोइरी 4.21% और कुर्मी 2.87% हैं। इन्हीं के दम पर नीतीश कुमार अपनी राजनीति करते रहे हैं। ऐसे में अगर सम्राट को BJP आगे बढ़ाती है तो नीतीश का ये वोट बैंक उनके पास जा सकता है। BJP बिहार में लगातार गैर यादव OBC को साधने का प्रयास कर रही है। इस समीकरण में सम्राट चौधरी बिल्कुल फिट बैठते हैं। कोइरी बिहार में यादव के मुकाबले एक मजबूत पिछड़ी जाति मानी जाती है। संघ OBC के बदले EBC चेहरे को आगे बढ़ाना चाहता है भास्कर की पड़ताल में एक बात ये भी सामने आ रही है कि संघ का एक बड़ा धड़ा सम्राट चौधरी के नाम पर राजी नहीं हो रहा है। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला- 1990 के बाद से बिहार में OBC वर्ग के नेता ही मुख्यमंत्री बनते आ रहे हैं। पार्टी पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना रही है। इसके मद्देनजर संघ एक नए वर्ग के नेता को आगे बढ़ाना चाहता है, ताकि नया वोट बैंक तैयार करने में मदद मिल सके। इसके लिए संघ EBC चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता है। दूसरा- सम्राट चौधरी की राजनीति की शुरुआत राजद से हुई है। इसके बाद जदयू से होते हुए BJP में आए हैं। ऐसे में अगर इन्हें सीएम बनाया जाता है तो मूल भाजपाई इससे नाराज हो सकते हैं। सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी एक बड़ा धड़ा नाराज हुआ था । तब इन्हें आयातित भाजपाई कहा गया था। संजीव चौरसिया की राष्ट्रीय अध्यक्ष और टॉप लीडरशिप से सीक्रेट मीटिंग भास्कर के पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि EBC कैटेगरी से आने वाले संजीव चौरसिया की BJP लीडरशिप के साथ सीक्रेट मीटिंग हुई है। ये मीटिंग दो जगह हुई है, पहला पटना में और दूसरा दिल्ली में । BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जब रामनवमी पूजा के दौरान पटना आए थे तब वे दीघा विधायक संजीव चौरसिया से मिलने उनके घर गए थे। दोनों के बीच बंद कमरे में लगभग 30-40 मिनट की मीटिंग भी हुई थी। इसके साथ ही संजीव चौरसिया को रामनवमी से पहले दिल्ली का बुलावा भी आया था। यहां वे अलग-अलग जगहों पर BJP के टॉप लीडर्स से मिले थे। हालांकि कहां, कब और कितने देर और किस विषय पर मीटिंग हुई ये बताने से सभी इनकार कर रहे हैं। ऐसे में संजीव चौरसिया को CM के तौर पर संघ की पसंद बताया जा रहा है। चौरसिया के पक्ष में क्या? RSS बैकग्राउंड, लो प्रोफाइल नेता की छवि पार्टी के भीतर संजीव चौरसिया का बैकग्राउंड काफी मजबूत माना जाता है। इनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया को बिहार BJP का फाउंडिंग मेंबर माना जाता है। वह राज्यपाल रह चुके हैं। संजीव चौरसिया ने पॉलिटिकल जर्नी की शुरुआत ABVP से की थी। इसके बाद संघ के रास्ते BJP में आए। 2015 से लगातार तीन बार पटना के दीघा विधानसभा से जीतते आ रहे हैं। संजीव चौरसिया अक्सर अपनी ‘सादगी’ और ‘सीधे संवाद’ के लिए जाने जाते हैं। पटना की राजनीति में जहां अक्सर आक्रामक बयानबाजी होती है, वहां संजीव चौरसिया तर्कों और विकास कार्यों के आधार पर अपनी बात रखते हैं। बिहार में नए CM के चेहरे पर जारी सस्पेंस के बीच अब संघ और बीजेपी में लगभग सहमति बनती हुई दिखाई दे रही है। BJP सूत्रों की मानें तो डिप्टी CM सम्राट चौधरी को बिहार का नया CM बनाया जा सकता है। अभी तक संघ सम्राट चौधरी के नाम पर राजी नहीं हो रहा था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद सम्राट चौधरी के नाम को लेकर पैरवी की और उन्हें अपनी पसंद बताया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर फिलहाल BJP और संघ के कोई भी पदाधिकारी इस पर स्पष्ट बोलने से बच रहे हैं। संघ बिहार में EBC कैटेगरी के नेता को नया CM बनाना चाहता था। भास्कर ने पिछले एक सप्ताह में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री से लेकर पार्टी के प्रदेश स्तर के कई नेताओं के अलावा कई सीनियर IAS से बात की। हमने उनसे समझने की कोशिश की कि आखिर CM के चेहरे के लिए किस नाम पर चर्चा चल रही है। ऑन रिकॉर्ड कोई भी इस मामले पर कुछ भी बोलने से सीधे परहेज कर रहे हैं, जबकि ऑफ द रिकॉर्ड सभी सम्राट चौधरी के नाम का इशारा कर रहे हैं। इसके साथ ही ये भी दावा कर रहे हैं कि NDA के विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार ही बिहार के नए CM की घोषणा करेंगे। अप्रैल के तीसरे सप्ताह की किसी तारिख को इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। बंगाल के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी संकेत रविवार को BJP की तरफ से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की गई। 40 नेताओं की इस लिस्ट में बिहार से केवल डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम है। बंगाल से सटे जिले किशनगंज से पॉलिटिक्स करने वाले मंत्री दिलीप जायसवाल का भी नाम लिस्ट में नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को भी लिस्ट में जगह नहीं दी गई है। इसमें BJP शासित राज्यों के 6 से ज्यादा मुख्यमंत्रियों का नाम शामिल है। बिहार से मंगल पांडेय और नितिन नवीन भी इसमें हैं। मंगल पांडेय पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी तो नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में देखा जाए तो बिहार से केवल सम्राट चौधरी को ही तवज्जो दी गई है सम्राट अमित शाह के पसंद क्यों, 3 पॉइंट में समझिए
1- मोदी एरा में पावर मिला, पार्टी के हर टास्क को पूरा किया सम्राट चौधरी को अमित शाह के पसंद का नेता क्यों माना जा रहा है? इस सवाल पर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव स्तर के एक नेता ने भास्कर को बताया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह को जब पार्टी की कमान मिली थी तब बिहार BJP को नीतीश कुमार का पिछलग्गु कहा जाता था। पूरी पार्टी पर सुशील मोदी का एकछत्र राज था। इसे खत्म करने के लिए पार्टी ने कभी नित्यानंद राय तो कभी संजय जायसवाल जैसे नेता को कमान दी, लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं रहे। 2- BJP में गैर यादव OBC लीडर के रूप में तैयार किया अमित शाह ने सम्राट चौधरी को BJP के भीतर एक OBC लीडर के तौर पर तैयार किया। सम्राट चौधरी BJP के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए एक ऐसे लीडर के रूप में स्थापित हुए जिसने न केवल संगठन में वर्षों से जड़ जमाए नेताओं का सफाया किया, बल्कि लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पर एक साथ अग्रेशन से हमलावर रहे। शाह के मैसेज पर उन्होंने नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाने के लिए मुरेठा बांधने का अभियान चलाया। जब नीतीश महागठबंधन का साथ छोड़कर NDA के साथ आए तो बतौर डिप्टी और सरकार में नंबर-2 की हैसियत से इन्होंने नीतीश कुमार के निर्देशन में काम भी किया। 3. 20 साल में पहली बार नीतीश कुमार से लेकर गृह विभाग का जिम्मा दिया 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान तारापुर में सम्राट चौधरी के पक्ष में प्रचार करते हुए अमित शाह ने कहा था, ’आप सम्राट चौधरी को जीताइए, हम इन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे।’ ये बात विजय सिन्हा के लिए भी उन्होंने कही थी। सरकार बनने के बाद 2005 के बाद पहली बार गृह विभाग BJP को मिला। नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी गृह मंत्री बने। ये सरकार और बिहार में उनके बढ़ते कद के ही संकेत थे। सम्राट क्यों? नीतीश के बाद क्या लव-कुश समीकरण साधेगी भाजपा सम्राट चौधरी कोइरी समाज से आते हैं। नीतीश कुमार कुर्मी हैं। इन दोनों को बिहार की सियासत में लव-कुश कहा जाता है। राज्य में इन दोनों कोइरी और कुर्मी समाज की आबादी करीब 7% है। इसमें कोइरी 4.21% और कुर्मी 2.87% हैं। इन्हीं के दम पर नीतीश कुमार अपनी राजनीति करते रहे हैं। ऐसे में अगर सम्राट को BJP आगे बढ़ाती है तो नीतीश का ये वोट बैंक उनके पास जा सकता है। BJP बिहार में लगातार गैर यादव OBC को साधने का प्रयास कर रही है। इस समीकरण में सम्राट चौधरी बिल्कुल फिट बैठते हैं। कोइरी बिहार में यादव के मुकाबले एक मजबूत पिछड़ी जाति मानी जाती है। संघ OBC के बदले EBC चेहरे को आगे बढ़ाना चाहता है भास्कर की पड़ताल में एक बात ये भी सामने आ रही है कि संघ का एक बड़ा धड़ा सम्राट चौधरी के नाम पर राजी नहीं हो रहा है। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला- 1990 के बाद से बिहार में OBC वर्ग के नेता ही मुख्यमंत्री बनते आ रहे हैं। पार्टी पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना रही है। इसके मद्देनजर संघ एक नए वर्ग के नेता को आगे बढ़ाना चाहता है, ताकि नया वोट बैंक तैयार करने में मदद मिल सके। इसके लिए संघ EBC चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता है। दूसरा- सम्राट चौधरी की राजनीति की शुरुआत राजद से हुई है। इसके बाद जदयू से होते हुए BJP में आए हैं। ऐसे में अगर इन्हें सीएम बनाया जाता है तो मूल भाजपाई इससे नाराज हो सकते हैं। सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी एक बड़ा धड़ा नाराज हुआ था । तब इन्हें आयातित भाजपाई कहा गया था। संजीव चौरसिया की राष्ट्रीय अध्यक्ष और टॉप लीडरशिप से सीक्रेट मीटिंग भास्कर के पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि EBC कैटेगरी से आने वाले संजीव चौरसिया की BJP लीडरशिप के साथ सीक्रेट मीटिंग हुई है। ये मीटिंग दो जगह हुई है, पहला पटना में और दूसरा दिल्ली में । BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जब रामनवमी पूजा के दौरान पटना आए थे तब वे दीघा विधायक संजीव चौरसिया से मिलने उनके घर गए थे। दोनों के बीच बंद कमरे में लगभग 30-40 मिनट की मीटिंग भी हुई थी। इसके साथ ही संजीव चौरसिया को रामनवमी से पहले दिल्ली का बुलावा भी आया था। यहां वे अलग-अलग जगहों पर BJP के टॉप लीडर्स से मिले थे। हालांकि कहां, कब और कितने देर और किस विषय पर मीटिंग हुई ये बताने से सभी इनकार कर रहे हैं। ऐसे में संजीव चौरसिया को CM के तौर पर संघ की पसंद बताया जा रहा है। चौरसिया के पक्ष में क्या? RSS बैकग्राउंड, लो प्रोफाइल नेता की छवि पार्टी के भीतर संजीव चौरसिया का बैकग्राउंड काफी मजबूत माना जाता है। इनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया को बिहार BJP का फाउंडिंग मेंबर माना जाता है। वह राज्यपाल रह चुके हैं। संजीव चौरसिया ने पॉलिटिकल जर्नी की शुरुआत ABVP से की थी। इसके बाद संघ के रास्ते BJP में आए। 2015 से लगातार तीन बार पटना के दीघा विधानसभा से जीतते आ रहे हैं। संजीव चौरसिया अक्सर अपनी ‘सादगी’ और ‘सीधे संवाद’ के लिए जाने जाते हैं। पटना की राजनीति में जहां अक्सर आक्रामक बयानबाजी होती है, वहां संजीव चौरसिया तर्कों और विकास कार्यों के आधार पर अपनी बात रखते हैं।


