मेरठ की सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण को लेकर व्यापारियों में दहशत लगातार बनी हुई है। आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में 24 घंटे के अंदर 44 संपत्तियों को सीलिंग के आदेश दिए गए हैं, इसके बाद दहशत में आए व्यापारियों ने अपनी दुकान खाली करनी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि सीलिंग कार्रवाई से पहले वो अपना सामान यहां से निकाल रहे हैं ताकि उनको और ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। स्कूल ,अस्पताल और बैंक भी शामिल
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन 44 संपत्तियों को सील करने के आदेश दिए गए हैं उनमें बैंक, स्कूल और अस्पताल भी संचालित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनको भी वहां से शिफ्ट कर सीलिंग के आदेश दिए हैं। इसके साथ-साथ जो दुकान इन 44 संपत्तियों में चल रही थी वह भी इसका हिस्सा है जिस समय व्यापारियों ने दुकान खाली करने शुरू कर दी हैं। सेट बैक के तहत तोड़ने वाले भी शामिल जिन व्यापारियों ने भू उपयोग बदलने के लिए शमन शुल्क जमा करा कर सेटबैक के तहत स्वयं अपनी दुकान तोड़नी भी शुरू की थी, ताकि वह उन्हें पीछे हटाकर दोबारा से बना सके। वह भी इस आदेश में शामिल है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपने प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए करोड़ों रुपया भी जमा कर दिया है और आवास विकास के आदेश अनुसार वह अपनी दुकान पीछे भी हटा रहे थे। इसके बाद भी उनका नाम इसमें शामिल है इसको लेकर व्यापारी जहां आर्थिक रूप से टूट गया है तो वहीं अब और भी ज्यादा चिंतित है। पूर्व कमिश्नर ने भी दिया हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेरठ के पूर्व कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद से भी इस बात का जवाब मांगा गया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ जाकर ध्वस्तीकरण रोकने का आदेश कैसे जारी कर दिया। इस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जिस कॉम्नलेक्स को तोड़ने का आदेश दिया गया था उसकी तोड़ने की कार्रवाई जब तक पूरी हो चुकी थी और जनप्रतिनिधियों की सहमति से यह आदेश दिया था। हालांकि इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए अपनी सफाई दी जनप्रतिनिधियों ने बनाई दूरी
सेंट्रल मार्केट के इस प्रकरण में सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधि और ज्यादातर विपक्ष के भी जनप्रतिनिधियों ने कुछ भी बोलने से बचना ही उचित समझा है। क्योंकि जिस प्रकार पूर्व कमिश्नर को भी सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया है सभी लोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना से बचना चाहते हैं और कोई भी इस प्रकार की टिप्पणी नहीं करना चाहते जो सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ हो।


