तीन माह से पत्थर की खदानें बंद, गैंगसा पर लटके ताले, श्रमिकाें का पलायन

तीन माह से पत्थर की खदानें बंद, गैंगसा पर लटके ताले, श्रमिकाें का पलायन

गैंगसा उद्यमियों ने राजाखेड़ा विधायक को सुनाया अपना दुखड़ा

-विधायक बोले: उद्यमियों का साथ मिला तो पत्थर उद्योग व रोजगार को बचाने की नही छोडूंगा कोई कसर

dholpur, सरमथुरा क्षेत्र में पत्थर उद्योग को बंद हुए तीन माह से अधिक गुजर गए हैं। वनविभाग के कारण पत्थर खदानें बंद होने से गैंगसा उद्योग पर तालाबंदी की नौबत आ गई है। पत्थर व्यवसाय से जुडे़ श्रमिक वर्ग ने पलायन करना शुरू कर दिया है। रविवार को गैंगसा उद्यमियों ने सरमथुरा दौरे पर पहुंचे राजाखेड़ा विधायक रोहित बौहरा को दुखड़ा सुनाते हुए पत्थर उद्योग को बचाने की गुहार लगाई।

राजाखेड़ा विधायक रोहित बौहरा व बसेड़ी विधायक संजय जाटव ने गैंगसा उद्यमियों की समस्या सुनकर आपस में चर्चा की। गैंगसा उद्यमियों ने विधायक को बताया कि वनविभाग ने अवैध खनन की आड़ में वैध खनन पर शिकंजा कस दिया गया है। माइंसों के रास्ते वनभूमि में से होकर गुजरने के कारण वनविभाग ने अडंगा लगाया हुआ है। जिसके कारण वैध खनन भी बंद पड़ा है।

राजाखेड़ा विधायक ने कहा कि जिले में पत्थर उद्योग रोजगार की मुख्य धुरी है। जिले में पत्थर व्यवसाय से जुडकर हजारों परिवार जीवन यापन करते हैं। विधायक ने कहा कि सभी लोगों का साथ मिला तो पत्थर उद्योग को बचाने में कोई कसर नहीं छोडूंगा। उन्होंने लीज होल्डरों को लीज सरेंडर तक कराने की नसीहत दी। विधायक ने गैंगसा एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल को वन सचिव से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया।

गैंगसा उद्यमियों ने बताया कि पत्थर खदानें बंद होने से व्यवसाय से जुडे लोगों पर ही प्रभाव नहीं पड़ा है, बल्कि मार्केट में चाय की थड़ी, रेहड़ी वालों के अलावा दुकानदारों पर भी असर दिखाई देने लगा है। उद्यमियों ने दुखड़ा सुनाते हुए पत्थर व्यवसाय को बचाने के लिए सत्ताधारी पार्टी के प्रतिनिधियों ने कोई पहल नहीं की है। पत्थर उद्योग के बंद होने का सबसे बड़ा प्रभाव मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। कई घरों में चूल्हे तक नहीं सुलग रहे हैं, हालांकि पत्थर व्यवसायियों ने कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा, वनमंत्री संजय शर्मा व प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजस्थान से मुलाकात कर गुहार लगा चुके हैं। फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

-बसेड़ी विधायक ने की पहल, नही मिली कामयाबी

गैंगसा उद्यमियों ने बताया कि क्षेत्र का पत्थर उद्योग तीन माह से बंद होने के कारण बसेड़ी विधायक संजय कुमार जाटव ने दो माह पूर्व जयपुर में राजस्थान सरकार के मंत्रियों से मुलाकात कर समस्या का समाधान करने की मांग की थी। विधायक ने व्यापारिक संगठनों से चर्चा कर विचार विमर्श किया गया। खनन मजदूरों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया गया। फिर भी कामयाबी हासिल नही हुई। बसेड़ी विधायक ने सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि धौलपुर का सैण्डस्टोन सबसे घटिया क्वालिटी का होने के बावजूद कोटा स्टोन के बराबर रॉयल्टी वसूल की जा रही है। उन्होंने सरकार की गलत नीतियों को बताते हुए कहा कि पड़ौसी जिला करौली व धौलपुर के सैण्डस्टोन स्टोन में कोई फर्क नहीं है। फिर भी रॉयल्टी की रेट में ₹40 प्रति टन का डिफरेंस है। जिसका असर पत्थर व्यवसाय पर पड़ रहा है।

-पड़ोसी प्रदेश में एंट्री टैक्स के नाम पर वसूली, सरकार खामोश

उत्तरप्रदेश सरकार धौलपुर सैण्डस्टोन पर 150 रुपए घनमीटर एंट्री टैक्स लगाया हुआ है, जो कि धौलपुर सैण्डस्टोन पर लागू नहीं होता है, जबकि सरकारें पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन इन्ट्री टैक्स की वसूली कर रही है। सबसे गंभीर बात तो यह है कि धौलपुर में खनिज विभाग रॉयल्टी वसूलने के बावजूद उत्तरप्रदेश सरकार इन्ट्री टैक्स के नाम से रॉयल्टी वसूलती है, जबकि दोनों प्रदेशों में भाजपा की सरकार है। उद्यमियों ने मुख्यमंत्री स्तर पर पहल करने एवं समान रॉयल्टी दर एवं ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने की गुहार लगाई है।

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