-मिर्च-मसाले से लेकर ड्राई फ्रूट्सों के दामों में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
-युद्ध नहीं थमा तो और बिगड़ सकते हैं हालात, दामों में होगा इजाफा
-मेडिकल सेक्टर पर भी असर,सुई से लेकर दवाइयां भी महंगी
धौलपुर. पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। एलपीजी गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की कमी के बीच अब खाद्ध पदार्थों से लेकर मेडिकल सेक्टर पर संकट आन खड़ा है। बीते कुछ दिनों में मिर्च मसालों से लेकर ड्राई फू्रट और विदेश से आयात होने वाली सामग्रियों के दामों में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। जिससे इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।
ईरान, अमेरिका और अफगानिस्तान से आयात होने वाले मसाले, ड्राई फ्रूट्स सहित अन्य सामान युद्ध के कारण समय पर भारत के बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे। यही कारण है कि इन सामग्रियों के दामों में 20 से 30फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। सप्लाई चेन टूटने से काजू, बादाम, पिस्ता, अंजीर, खजूर, जीरा और केसर की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर घरों से लेकर शादियों के सीजन पर पड़ रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो रही है। तो वही सामग्री का आयात नहीं होने से बाजारों में भी अब धीरे-धीरे स्टॉक खत्म होने लगा है। एक माह पहले तक 400 रुपए बिकने वाली किशमिश का भाव 100 रुपए बढक़र 500 रुपए प्रति किलो पहुंच गया है। मखाना 1300 रुपए, काजू और बादाम 1000 रुपए, अखरोट 1300 रुपए और पिस्ता 1400 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जा पहुंचे हैं। ड्राई फू्रड्स विक्रेताओं ने बताया कि सबसे ज्यादा असर पिस्ता और चिरौंजी में देखने को मिला है चिरौजी का 200रुपए बढक़र 2000 से2200 रुपए प्रति किलो जा पहुंची है तो पिस्ता भी 200 रुपए बढ़त के साथ 1400रुपए किलो पहुंच गया है। इसके अलावा जीरा, मिर्च और हींक के दामों में भी 100 से 150 रुपए तक की बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।
सप्लाई चेन टूटने से बढ़ी परेशानी
ड्राई फू्रड्स विक्रेता रामकिशोर गर्ग ने बताया कि भारत में आयात होने वाला ड्राई फू्रट की बड़ी खेप अफगानिस्तान, ईरान और दुबई से होती है इसके अलावा अमेरिका से भी कुछ ड्राई फू्रड्स भारत में आता है, मगर एक माह पहले अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के कारण हालात बिगड़ चुके हैं। अफगानिस्तान से अंजीर, बादाम, केसर, हींग, शाह जीरा, मुनक्का और किशमिश आती है। ईरान से मुख्य रूप से पिस्ता और खजूर का आयात होता है। दुबई लंबे समय से भारत के लिए एक प्रमुख ट्रेडिंग हब के रूप में काम करता रहा है, मगर युद्ध के कारण सप्लाई चेन फिलहाल टूट चुकी है। जिसका असर सामग्रियों के दामों पर पड़ रहा है।
मेडिकल सेक्टर पर भी दिख रहा असर
युद्ध का असर केवल मसाले और ड्राई फू्रड्स तक ही सीमित नहीं रहा है। इसके असर से मेडिकल सेक्टर भी प्रभावित होने लगा है। बीपी मॉनिटर डिवाइस और थर्मामीटर के दामों में भी २० प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके अलावा आम इस्तेमाल की दवाओं में शामिल पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत करीब 47 प्रतिशत तक बढ़ गई है। हालांकि अभी यह बढ़ोत्तरी सिर्फ थोक दुकानदारी तक ही सीमित है, लेकिन युद्ध और लम्बा चला तो मेडिकल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली दवाओं सहित अन्य उपकरणों के दाम रिटेल सेक्टर में भी देखने को मिलेंगे। मेडिकल सेक्टर से जुड़े विपिन सचदेवा बताते हैं कि दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनेक में 54 प्रतिशत, डाइक्लोफेनेक पोटेशियम में 33 प्रतिशत, अमॉक्सिसिलिन ट्राईहाइड्रेट में 45 प्रतिशत और सिप्रोफ्लॉक्सासिन की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत तक की तेजी आई है, लेकिन यह अभी बड़े शहरों और थोक सेक्टर तक ही सीमित है।
सिलेंडरों को लेकर अभी भी हायतौबा
युद्ध से शहर में एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ी किल्लत अभी भी जारी है। सिलेंडरों की कमी सबसे ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठानों से लेकर शादियों वाले घरों मे देखी जा रही है। एक ओर जहां अभी कमर्शियल सिलेंडरों का टोटा है तो वहीं घरेलू सिलेंडरों की भी आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पा रही। यही कारण है कि होटल से लेकर चाय नाश्ता की दुकान चलाने वाले छोटे दुकानदार 2000 रुपए तक में सिलेंडर लेने को मजबूर हैं। वहीं जिनके घर में शादी विवाह है उनकी दशा और खराब है, हाईरेट में सिलेंडर मिलने से वह अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
ड्राई फू्रट्स के दाम
ड्राई फू्रट्स अब पहले
काजू 1000 800
सूखा नारियल 400 250
किशमिश 500 400
बादाम 1000 850
अखरोट 1300 1200
पिस्ता 1400 1200
मखाना 1300 1200
छुहारा 300 280
चिरौंजी 2200 2000
(नोट: दाम रुपए प्रति किलो के हिसाब से हैं)


