कुछ ही दिनों पहले ईरान ने अमेरिका के F-15E लड़ाकू विमान को युद्ध के दौरान मार गिराया था। इसमें सवार दो जवानों को अमेरिका सेना ने ईरान में खतरनाक ऑपेरशन चलाकर बचा लिया। लड़ाकू विमान में सवार दोनों अमेरिकी सैनिक ईरान के पहाड़ी इलाके में बुरी तरह से घायल होकर फंस गए थे।
ईरान ने जारी किया बड़ा बयान
अब ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में ताजा बयान जारी किया है। मंत्रालय का कहना है कि एक गिरे हुए एयरमैन को बचाने के लिए अमेरिका का ऑपरेशन ईरान से यूरेनियम चुराने का बहाना हो सकता है।
ऑपरेशन को लेकर उठाए सवाल
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि इस ऑपरेशन को लेकर कई सवाल और अनिश्चितताएं हैं। बाकाई ने कहा- जिस इलाके में अमेरिकी पायलट के मौजूद होने का दावा किया गया था, वह कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत था। वह उस इलाके से काफी दूर है, जहां उन्होंने मध्य ईरान में अपनी सेना को उतारने की कोशिश की थी या उतारना चाहते थे।
ईरान ने कहा- धोखा देने वाला अमेरिकी ऑपेरशन था
ईरान ने कहा कि इस संभावना को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि यह यूरेनियम चुराने के लिए किया गया एक धोखा देने वाला ऑपरेशन था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने एक F-15E विमान के दूसरे क्रू मेंबर को बचा लिया है। यह विमान शुक्रवार को ईरान के ऊपर गिर गया था। ट्रंप ने इस बचाव अभियान को एक साहसी खोज और बचाव अभियान बताया था।
ट्रंप ने ऑपरेशन के बारे में क्या बताया?
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे बचाव अभियान के बारे में खुद सोशल मीडिया पर लिखा। और जो उन्होंने बताया वो सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह ऑपरेशन कितना मुश्किल और खतरनाक रहा होगा।
दो अलग ऑपरेशन, एक मकसद
ट्रंप ने बताया कि यह बचाव अभियान एक नहीं बल्कि दो हिस्सों में हुआ। पहली छापेमारी में एक पायलट को बचाया गया। और यह काम दिन के उजाले में हुआ जो अपने आप में बहुत असामान्य बात है। आमतौर पर इस तरह के ऑपरेशन रात के अंधेरे में किए जाते हैं।
दूसरी छापेमारी पहली के बाद हुई जिसमें दूसरे क्रू मेंबर को निकाला गया। ट्रंप ने लिखा कि इस पूरे अभियान के दौरान अमेरिकी जवान सात घंटे तक ईरान के आसमान में रहे।
ट्रंप ने क्यों बताया यह इतना दुर्लभ था
ट्रंप ने साफ कहा कि इस तरह की छापेमारी बहुत कम की जाती है। वजह यह है कि इसमें जवानों की जान का खतरा तो होता ही है, साथ में सैन्य साजो-सामान भी दांव पर लगता है।
दुश्मन के इलाके में घुसकर, दिन की रोशनी में, सात घंटे तक टिके रहना और अपने आदमियों को सुरक्षित निकालना, यह हर सेना के बस की बात नहीं।


