अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का अब पंजाब पर भी असर पड़ा है। गैस सकंट के कारण खाने की चीजों के रेटों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। जालंधर में रोटी, मखनी दाल समेत कई जीचें 2 से 20 रुपए तक महंगी हो गई हैं। खाने के चाइनीज आइटम के दाम भी 10 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। लुधियाना में रेहड़ी-फड़ी वाले अपनी रेहड़ी बंद करने के लिए मजबूर हो गए हैं। कुछ ने तो रोटी का साइज ही घटना दिया है। वहीं अमृतसर में छोले भटूरे के रेट 10 रुपए तक बढ़ा दिए गए हैं। फरीदकोट के कोटकपूरा में चाय 2 और कॉफी 5 रुपए तक महंगी हो गई है। बर्गर पर 10 रुपए ज्यादा देने पड़ रहे हैं। कपूरथला में कैटरिंग का काम करने वाले भी ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। जिसका ले भी रहे हैं, उससे आधे सिरेंडर देने की बात पर डील कर रहे हैं। होटल और फूड स्टॉल संचालकों का कहना है कि खर्च बढ़ने की वजह से कीमतें बढ़ाना हमारी मजबूरी बन गई है। हालांकि ढाबा संचालकों ने अपने मेन्यू रेट की लिस्ट को अपडेट नहीं किया, लेकिन वह ग्राहक को या तो पहले कह देते हैं या फिर बढ़े हुए पैसे बिल में जोड़ कर थमा देते हैं। अब जिलेवार जानिए कहां क्या हालात.. लुधियाना में रोटी का साइज घटाया लुधियाना के जगराओं के माता रानी मंदिर के पास स्थित आंटी का ढाबा पर रोटी पहले 4 रूपए की थी, अब 5 रुपए की कर दी है। वहीं इशर चौक पर स्थित जीते का ढाबा पर रोटी के रेट नहीं बढ़े, लेकिन रोटी का साइज घटाकर पहले की तुलना में हल्का कर दिया गया है। वहीं भांगड़ बाजार स्थित कोहिनूर रेस्टोरेंट में पहले तीन रूपए की रोटी थी, जिसे अब 5 रूपए का कर दिया है। इसके साथ ही नमक मिर्ची वाला पराठा पहले 7 रूपए का था, अब 10 रूपए का कर दिया हैं। संचाकलों का कहना है कि सिलेंडर न मिलने के कारण मजबूरी में रेट बढ़ाने पड़े हैं। अगर सिलेंडर मिल जाए, तो ऐसा ना करना पड़ता। उधर, खन्ना में फास्ट फूड के दाम नहीं बढ़े हैं। लेकिन रेहडियां लगनी कम हो गई हैं। मलेरकोटला रोड पर गौरव और उसके तीन साथी अपना फास्ट फूड का काम बंद करके वापस गांव चले गए हैं। गौरव ने कहा कि उन्हें दो हजार रुपए में सिलेंडर बड़ी मुश्किल से मिलता था। इसलिए काम बंद कर दिया है। जीटीबी मार्केट में भी 10 से 15 लोगों ने रेहडी लगानी बंद कर दी हैं। खन्ना के कुछ स्वीट्स शॉप पर समोसे बनाने बंद कर दिए हैं। क्योंकि खर्च ज्यादा आ रहा था। ग्राहक सुखबीर सिंह ने बताया कि उनके घर के पास मलेरकोटला रोड पर पहले काफी रेहडियां फास्ट फूड की लगती थीं। अब आधी रह गई हैं। इसकी वजह सिलेंडर न मिलना है। बठिंडा में रोटी-दल मखनी महंगी बठिंडा शहर में ढाबा मालिक मनप्रीत सिंह ने बताया- हम पिछले कई दिनों से इन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। यदि हम सिलेंडर नहीं लाते हैं, तो हमारा कारोबार बंद हो जाएगा। मजबूरी के चलते सिलेंडर महंगे दामों पर खरीदने पड़ रहे हैं। इस लिए हमने अपने मेन्यू की कुछ कीमतें भी बढ़ा दी हैं। दल मखनी पर 10 रुपए और 5 रुपए वाली रोटी 7 रुपए में कर दी है। पारसराम नगर में शर्मा फास्ट फूड का स्टॉल लगाने वाले ने कहा कि 25 रुपए वाला बर्गर 30 रुपए में कर दिया है। चाउमीन 120 रुपए वाली 140 रुपए की कर दी है। पूरी छोले की फुल प्लेट पहले 70 रुपए की थी, जो अब 90 रुपए की कर दी है। जालंधर में चाय-बर्गर-रोल महंगे जालंधर में एलपीजी गैस की कमी का असर अब छोटे खाने-पीने के कारोबारियों पर साफ दिखने लगा है। लाडोवाली रोड पर रेहड़ी लगाने वाले व्यक्ति ने बर्गर, रोल, चाउमीन पर अब 10 रुपए बढ़ा दिए हैं। पहले एक हाफ प्लेट चाउमीन 40 रुपए में देते थे, वहीं अब मजबूरी में 50 रुपए में दे रहे हैं। इसी तरह पहले 30 रुपए में तीन रोल देते थे, अब 40 रुपए में तीन रोल दे रह हैं। उन्होंने कहा कि पहले जब कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलता था, तो घरेलू लगा लेते थे। लेकिन यह भी ब्लैक में 2 हजार रुपए तक का मिल रहा है। जिससे दमा बढ़ाना हमारी मजबूरी हो गई है। लाडोवाली रोड के एक ढाबा संचालक ने कहा कि उन्होंने अब तंदूरी रोटी जो पहले 10 रुपए की थी, उसे 12 रुपए की कर दी। इसके अलावा दल मखनी हाफ प्लेट जो पहले 60 रुपए की थी, उसे 70 रुपए का कर दिया है। वहीं एक टी स्टॉल वाले ने कहा कि पहले जो चाय 10 रुपए की थी, उसे 15 रुपए का कर दिया है। अमृतसर में छोले-भटूरे पर 10 रुपए बढ़े अमृतसर के पुतलीघर इलाके में छोले-भटूरे की रेहड़ी लगाने वाले कन्हैया को गैस सिलेंडर की कमी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पहले एक प्लेट छोले-भटूरे 30 रुपए में मिलती थी, लेकिन अब बढ़ती लागत के कारण उन्हें कीमत बढ़ाकर 40 रुपए करनी पड़ी है। कीमत बढ़ने से ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है। एयरपोर्ट रोड पर रेहड़ी लगाने वाले गुरजेश ने कहा कि पिछले एक महीने से उनका काम बंद पड़ा है। उन्होंने बताया कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे हैं, जबकि अवैध रूप से सिलेंडर काफी महंगे दामों पर मिल रहे हैं। इस वजह से उनका काम दोबारा शुरू करना मुश्किल हो गया है और परिवार का खर्च चलाना भी चुनौती बन गया है। फाजिल्का में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी फाजिल्का के आहा रेस्टोरेंट के संचालक कमल सेठी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में गैस की किल्लत के साथ-साथ तेल और अन्य सामान के दाम भी बढ़ गए हैं। इसी वजह से उन्हें अपने रेस्टोरेंट के मेनू में हर डिश के दाम बढ़ाने पड़े हैं। उन्होंने बताया कि दामों में करीब 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है, जबकि औसतन यह बढ़ोतरी लगभग 8 फीसदी के आसपास है। कमल सेठी ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ उनके रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि फाजिल्का के अन्य रेस्टोरेंट जैसे होम स्टेड में भी दाम बढ़ाए गए हैं। अबोहर में भी ढाबा संचालकों ने खाने के रेट में 10 से 20 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। ढाबा संचालक मदन मोहन भाटिया व अमित कुमार ने कहा कि गैस के साथ-साथ रिफाइंड और डिस्पोजेबल सामान भी महंगे हो गए हैं, जिससे लागत बढ़ गई है। वहीं चाय विक्रेत ज्यादा प्रभावित हैं। रेलवे रोड पर काम करने वाले चाय विक्रेता कमल शर्मा व हरभगवान लूना ने बताया सिलेंडर न मिलने के कारण उन्हें डीजल भट्टी का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे खर्च बढ़ गया है। इसी के चलते 10 में मिलने वाली चाय अब 15 रुपए में बेची जा रही है। मोगा में टिक्की ₹15 और रोटी ₹5 तक महंगी मोगा के प्रताप रोड पर फास्ट फूड विक्रेता कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के दाम में 10 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। रोस्टेड चाप जो पहले 130 रुपए का था, उसे 140 रुपए का कर दिया है। टिक्की जो पहले 35 रुपए की प्लेट थी, उसे अब 50 रुपए का कर दिया है। मनचूरियन जो पहले 110 रुपए की फुल प्लेट थी, उसे अब 120 रुपए कर दिया है। चाय पर भी 5 रुपए बढ़ा दिए हैं। 15 रुपए वाली चाय को अब 20 रुपए की कर दी है। एक ढाबा संचालक ने कहा कि तबा रोटी जो पहले 10 रुपए की थी, उसे 15 रुपए का कर दिया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और गैस की कमी के कारण उन्हें मजबूरन दाम बढ़ाने पड़े हैं। फरीदकोट में चाय-कॉफी के दाम बढ़े फरीदकोट के कोटकपूरा में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण कारोबारियों को अपने सामान के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। चाय की स्टॉल चलाने वाले बब्बू और रमेश चावला ने बताया कि अब गैस सिलेंडर बहुत मुश्किल से मिल रहा है। इसी वजह से उन्होंने चाय का दाम 10 रुपए से बढ़ाकर 12 रुपए और कॉफी 15 रुपए से बढ़ाकर 20 रुपए कर दी है। इसी तरह ग्रोवर स्वीट्स के संचालक ने बताया कि उन्होंने बर्गर का रेट 30 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिया है। वहीं रोल बेचने वालों ने भी अपने दाम बढ़ा दिए हैं। उनका कहना है कि गैस की कमी और कमर्शियल सिलेंडर के बढ़े दामों से लागत बढ़ गई है। पहले वे कभी-कभी घरेलू सिलेंडर भी इस्तेमाल कर लेते थे, लेकिन अब वह भी आसानी से नहीं मिल रहा। कई लोगों ने तो काम बंद तक कर दिया है। कपूरथला में कैटरिंग वाले आधे सिलेंडर मांग रहे कपूरथला में रमणीक होटल एंड रेस्टोरेंट के मालिक कपिल ग्रोवर ने बताया कि उन्होंने अभी तक खाने के रेट नहीं बढ़ाए हैं, क्योंकि ग्राहक महंगाई को आसानी से स्वीकार नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि उनके रेस्टोरेंट में पीएनजी गैस का कनेक्शन लगा हुआ है, जिससे कुछ राहत मिल रही है। कैटरिंग का काम करने वाले सुनील अग्रवाल ने बताया कि ग्राहक ज्यादा पैसे देने को तैयार नहीं होते, इसलिए उन्हें कई बार डीजल या लकड़ी की भट्टी का इस्तेमाल करना पड़ता है। हालांकि, लकड़ी की कीमत भी ज्यादा मांग के कारण करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। एक अन्य कैटरिंग का काम करने वाले अजय ने कहा कि उन्होंने भी अपने रेट नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन अब एक शर्त रखी है- कैटरिंग में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडरों में से आधे सिलेंडर की व्यवस्था ग्राहक को खुद करनी होगी। वहीं फास्ट फूड का काम करने वाले बॉबी, राजू और मुकेश का कहना है कि ग्राहक बढ़े हुए दाम देने को तैयार नहीं हैं, इसलिए उन्होंने भी अभी तक खाने-पीने की चीजों के रेट नहीं बढ़ाए हैं। खाना इतना महंगा क्यों हो रहा? गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ी कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 102 रुपए महंगी हो गई हैं। इसके अलावा घरेलू सिलेंडर पर भी 60 रुपए बढ़ गए हैं। ब्लैक में भी कॉमर्शियल सिलेंडर 4 हजार रुपए तक मिल रहा है। इसके अलावा घरेलू भी 2000 रुपए तक का मिल रहा है। रसोई गैस महंगी होने से होटल, रेस्तरां और स्ट्रीट-फूड स्टॉल्स का खाना बनाने का खर्च बढ़ गया। खाने-पीने के दाम भी बढ़ रहे हैं। घरेलू PNG की खपत की सीमा पार होने पर बिल दोगुनी दर से आता है। कई होटल और होम-स्टॉल्स PNG पर निर्भर हैं। कच्चा माल महंगा होना दालें, चावल, तेल और चीनी जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। कच्चा माल महंगा होने का सीधा असर रेस्तरां और स्ट्रीट-फूड की कीमतों पर पड़ रहा। पैकेजिंग मटीरियल की लागत प्लेट, पैकेट, थाली, प्लास्टिक/बॉक्स जैसी पैकेजिंग सामग्री की कीमत दोगुनी हो गई। पैकेजिंग का महंगा होना खासकर बाहर के खाने और टिफिन/होम-डिलीवरी को प्रभावित कर रहा।


