Weather Alert: जयपुर. प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। मौसम विभाग ने ताज़ा नाउकास्ट चेतावनी जारी करते हुए जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में देर रात बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। मौसम विभाग का यह अलर्ट 5 अप्रेल को शाम साढे सात बजे जारी किया गया है।
मौसम केंद्र जयपुर की ओर से जारी येलो अलर्ट के तहत लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से खुले स्थानों पर मौजूद लोगों को सुरक्षित जगह पर जाने और पेड़ों के नीचे शरण न लेने की हिदायत दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण हो रहा है। फिलहाल यह स्थिति अस्थायी है और अगले कुछ घंटों में मौसम सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।

6 से 8 अप्रेल तक राजस्थान के कई हिस्सों में तेज आंधी,बारिश का अलर्ट
राजस्थान में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार 6 अप्रैल से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। विशेष रूप से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में दोपहर बाद एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मौसम में अचानक बदलाव आएगा। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक 7 अप्रैल को इस सिस्टम का प्रभाव और अधिक बढ़ेगा। इस दिन जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग के कुछ इलाकों में तेज मेघगर्जन, 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी, मध्यम से तेज बारिश और ओलावृष्टि होने की प्रबल संभावना है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
हालांकि 8 अप्रैल को मौसम में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। उत्तर और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि बाकी क्षेत्रों में मौसम सामान्यतः शुष्क रहेगा। वहीं 9 अप्रैल से अगले 3-4 दिनों तक अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। खुले में रखी फसल, अनाज और कृषि उत्पादों को सुरक्षित स्थान पर रखने या ढककर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान से बचा जा सके।


