भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति, हरिद्वार योगपीठ के मुख्य केंद्रीय प्रभारी राकेश कुमार औरंगाबाद पहुंचे। वे रविवार को पंचदेव धाम, चपरा में आयोजित कार्यकर्ता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास और संस्कृति को सही रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से अनभिज्ञ होती जा रही है। राष्ट्र को समृद्ध बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वाभिमान को जागृत करना आवश्यक है। भारत कभी गरीब या अज्ञानी नहीं रहा प्राचीन भारत में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से उच्च स्तर का ज्ञान-विज्ञान प्रदान किया जाता था। नालंदा विश्वविद्यालय इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां हजारों विद्यार्थी शिक्षा हासिल करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत कभी गरीब या अज्ञानी नहीं रहा, बल्कि विश्व को ज्ञान देने वाला देश रहा है। राकेश कुमार ने कहा कि इतिहास में आक्रमणों और विदेशी शासन के कारण भारत को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद हमारी संस्कृति और ज्ञान परंपरा जीवित रही। उन्होंने बच्चों और युवाओं तक सही इतिहास और भारतीय मूल्यों को पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उनमें स्वाभिमान की भावना विकसित हो सके। कार्यक्रम का उद्घाटन राकेश कुमार के साथ धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह, राज्य प्रभारी सुनील स्वाभिमानी, बृजमोहन शर्मा, जिला प्रभारी विनोद आर्य, जिला परिषद उपाध्यक्ष किरण सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का संचालन विनोद आर्य ने किया। योग गुरु बाबा रामदेव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों को किया संबोधित योग गुरु बाबा रामदेव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पंचदेव धाम, चपरा को एक विकसित योगपीठ के रूप में स्थापित किया जाएगा, जहां योग के साथ-साथ अध्यात्म, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी का समन्वय देखने को मिलेगा। उन्होंने बिहार को आंदोलन और परिवर्तन की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि यह भूमि देश की एकता और जागरण का केंद्र रही है। उन्होंने पंचदेव धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक नई दिशा देने वाली पहल है। बाबा रामदेव ने भरोसा दिलाया कि हरिद्वार की तर्ज पर जल्द ही चपरा में भी पतंजलि योगपीठ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कार्यक्रम में बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे, वहीं अन्य राज्यों से भी सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिससे आयोजन का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। योग शिविर में हजारों लोगों ने लिया भाग कार्यक्रम से पूर्व प्रातःकाल में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस योग सत्र में प्रशिक्षित योग शिक्षकों द्वारा प्राणायाम, योगासन, ध्यान एवं योग शास्त्र की विस्तृत जानकारी दी गई। विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिरों को बनाया निशाना कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय प्रभारी ने कहा कि इतिहास में जब भी भारत पर आक्रमण हुआ, विदेशी ताकतों ने मंदिरों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गांव-गांव के मंदिर केवल पूजा के केंद्र नहीं थे, बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का आधार भी थे। लोग मंदिरों में अपना अनाज, सोना-चांदी सुरक्षित रखते थे और आवश्यकता अनुसार उसका उपयोग करते थे। मंदिरों में ही गुरुकुल संचालित होते थे, सिंचाई की व्यवस्था होती थी और न्यायिक काम भी संपन्न किए जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों, मुगलों और अन्य आक्रांताओं ने इन व्यवस्थाओं को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद भारत की सांस्कृतिक जड़ें मजबूत बनी रहीं। आज आवश्यकता केवल स्वाभिमान जागृत करने की है। साथ ही उन्होंने औरंगाबाद जिले के नामकरण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से देवभूमि रहा है, इसलिए इसके नाम में बदलाव पर विचार होना चाहिए। इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। भारतीय शिक्षा बोर्ड की नीति को अपनाने और शैक्षणिक पाठ्यक्रम में वेद, उपनिषद व दर्शन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही प्रत्येक गांव में 11 सदस्यीय समिति बनाकर योग शिक्षा शुरू करने का आह्वान किया। भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति, हरिद्वार योगपीठ के मुख्य केंद्रीय प्रभारी राकेश कुमार औरंगाबाद पहुंचे। वे रविवार को पंचदेव धाम, चपरा में आयोजित कार्यकर्ता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास और संस्कृति को सही रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से अनभिज्ञ होती जा रही है। राष्ट्र को समृद्ध बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वाभिमान को जागृत करना आवश्यक है। भारत कभी गरीब या अज्ञानी नहीं रहा प्राचीन भारत में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से उच्च स्तर का ज्ञान-विज्ञान प्रदान किया जाता था। नालंदा विश्वविद्यालय इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां हजारों विद्यार्थी शिक्षा हासिल करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत कभी गरीब या अज्ञानी नहीं रहा, बल्कि विश्व को ज्ञान देने वाला देश रहा है। राकेश कुमार ने कहा कि इतिहास में आक्रमणों और विदेशी शासन के कारण भारत को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद हमारी संस्कृति और ज्ञान परंपरा जीवित रही। उन्होंने बच्चों और युवाओं तक सही इतिहास और भारतीय मूल्यों को पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उनमें स्वाभिमान की भावना विकसित हो सके। कार्यक्रम का उद्घाटन राकेश कुमार के साथ धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह, राज्य प्रभारी सुनील स्वाभिमानी, बृजमोहन शर्मा, जिला प्रभारी विनोद आर्य, जिला परिषद उपाध्यक्ष किरण सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का संचालन विनोद आर्य ने किया। योग गुरु बाबा रामदेव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों को किया संबोधित योग गुरु बाबा रामदेव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पंचदेव धाम, चपरा को एक विकसित योगपीठ के रूप में स्थापित किया जाएगा, जहां योग के साथ-साथ अध्यात्म, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी का समन्वय देखने को मिलेगा। उन्होंने बिहार को आंदोलन और परिवर्तन की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि यह भूमि देश की एकता और जागरण का केंद्र रही है। उन्होंने पंचदेव धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक नई दिशा देने वाली पहल है। बाबा रामदेव ने भरोसा दिलाया कि हरिद्वार की तर्ज पर जल्द ही चपरा में भी पतंजलि योगपीठ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कार्यक्रम में बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे, वहीं अन्य राज्यों से भी सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिससे आयोजन का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। योग शिविर में हजारों लोगों ने लिया भाग कार्यक्रम से पूर्व प्रातःकाल में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस योग सत्र में प्रशिक्षित योग शिक्षकों द्वारा प्राणायाम, योगासन, ध्यान एवं योग शास्त्र की विस्तृत जानकारी दी गई। विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिरों को बनाया निशाना कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय प्रभारी ने कहा कि इतिहास में जब भी भारत पर आक्रमण हुआ, विदेशी ताकतों ने मंदिरों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गांव-गांव के मंदिर केवल पूजा के केंद्र नहीं थे, बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का आधार भी थे। लोग मंदिरों में अपना अनाज, सोना-चांदी सुरक्षित रखते थे और आवश्यकता अनुसार उसका उपयोग करते थे। मंदिरों में ही गुरुकुल संचालित होते थे, सिंचाई की व्यवस्था होती थी और न्यायिक काम भी संपन्न किए जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों, मुगलों और अन्य आक्रांताओं ने इन व्यवस्थाओं को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद भारत की सांस्कृतिक जड़ें मजबूत बनी रहीं। आज आवश्यकता केवल स्वाभिमान जागृत करने की है। साथ ही उन्होंने औरंगाबाद जिले के नामकरण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से देवभूमि रहा है, इसलिए इसके नाम में बदलाव पर विचार होना चाहिए। इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। भारतीय शिक्षा बोर्ड की नीति को अपनाने और शैक्षणिक पाठ्यक्रम में वेद, उपनिषद व दर्शन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही प्रत्येक गांव में 11 सदस्यीय समिति बनाकर योग शिक्षा शुरू करने का आह्वान किया।


