सवाईमाधोपुर। जिले में चना और सरसों की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तो शुरू हो चुकी है, लेकिन किसानों की असली तस्वीर मंडियों में दिखाई दे रही है। आलनपुर स्थित कृषि उपज मंडी में इन दिनों किसानों की भीड़ उमड़ रही है, जहां सरसों के भाव सात हजार रुपए प्रति क्विटल से ऊपर हैं। इसके मुकाबले सरकारी खरीद केंद्रों पर सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपए और चना का 5875 रुपए तय है।
किसानों को मंडी में न केवल ऊंचे भाव मिल रहे हैं, बल्कि भुगतान भी तुरंत हो जाता है, जबकि सरकारी खरीद केंद्रों पर प्रक्रिया धीमी है और भुगतान में देरी होती है। यही कारण है कि किसान अपनी उपज एमएसपी पर देने के बजाय मंडी में बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड (राजफैड) ने 25 मार्च से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चना व सरसों की खरीद के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगातर खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी थी। ऐसे में बीते करीब 14 दिन में कम ही किसान खरीद केन्द्रों पर पहुंचे है।

नकदी के कारण बाहर बेच रहे उपज
जिला मुख्यालय पर आलनपुर रोड स्थित कृषि उपज मण्डी में इन दिनों सरसों व चना की बंपर आवक हो रही है। किसानों के मंडी की ओर झुकाव के पीछे सामाजिक कारण भी हैं। इन दिनों ग्रामीण इलाकों में शादियों का मौसम है और आगामी आखातीज का बड़ा सावा है। ऐसे में किसान अपनी उपज सीधे मंडी में बेच रहे हैं ताकि उन्हें तुरंत नकद राशि मिल सके और वे पारिवारिक खर्चों को पूरा कर सकें।
जिले में बनाए है नौ खरीद केन्द्र
राजफैड ने 25 मार्च से इलेक्ट्रॉनिक कांटों के जरिए खरीद प्रक्रिया शुरू की थी और जिले में नौ केंद्र बनाए गए हैं। चकचैनपुरा, चौथ का बरवाड़ा, खण्डार, बामनवास, बौली, भाड़ौती, गंगापुर सिटी, बहरावण्डा कलां और बालेर। इन केंद्रों पर चना और सरसों की खरीद जारी है, लेकिन अब तक केवल 400 किसानों ने पंजीयन कराया है और करीब 400 विवटल उपज ही खरीदी जा सकी है। यह आंकड़ा साफ करता है कि किसानों का भरोसा सरकारी खरीद पर उतना नहीं है जितना मंडी पर है।


