बेगूसराय जिले में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। एक तरफ जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि गोदामों से डिलीवरी पर रोक लगाकर शत-प्रतिशत होम डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। एचपी (HP) गैस के उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद गैस एजेंसियां अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रही हैं। जिला प्रशासन ने सभी गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अपने गोदामों से गैस का वितरण नहीं करें, उपभोक्ताओं के घरों तक सिलेंडर पहुंचाएं, लेकिन एचपी कंपनी के वितरण नेटवर्क में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। सुबह 6 बजे से लाइन महमदपुर स्थित पूजा एचपी गैस एजेंसी के गोदाम पर रोजाना सुबह 6:00 बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। लोग काम-धंधा छोड़कर तपती धूप में घंटों अपनी बारी का इंतजार करते हैं, फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पूजा गैस एजेंसी पर हो चुकी है FIR आश्चर्य की बात यह है कि महज 5 दिन पहले ही प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन और अनियमितताओं को लेकर पूजा एचपी गैस एजेंसी पर एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। इसके बावजूद एजेंसी के कामकाज के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है। उपभोक्ता अभी भी एजेंसी के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मनमानी कर रही है एजेंसी लोगों का आरोप है कि उन्हें एक-एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है। जब वे गोदाम पर पहुंचते हैं, तो उन्हें स्टॉक खत्म होने या गाड़ी नहीं आने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। एजेंसी काफी मनमानी कर रहा है। लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। आखिर इस तरह की मनमानी कब रुकेगी। उपभोक्ताओं का दर्द- एक हफ्ते से खा रहे हैं ठोकर गोदाम पर लाइन में लगे उपभोक्ता सुबोध पासवान ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि आज एक सप्ताह हो गया है, हम लोग रोज चक्कर काट रहे हैं। कभी कहा जाता है कि गैस नहीं है, तो कभी कहा जाता है कि कल आना। घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। एक अन्य महिला उपभोक्ता ने बताया कि प्रशासन कह रहा है कि गैस घर पर आएगी। हफ्तों बीत जाने के बाद भी कोई हॉकर मोहल्ले में नहीं दिखता। मजबूरन हमें ऑटो का किराया लगाकर गोदाम तक आना पड़ता है, यहां भी अव्यवस्था का आलम है। गैस एजेंसियों की इस मनमानी ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जब गोदाम से वितरण पर रोक है, तो भीड़ वहां कैसे जुट रही है। चरमरा गई है बजट और व्यवस्था उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की इस कृत्रिम किल्लत के पीछे कालाबाजारी है। हम उपभोक्ता दोहरी मार झेल रहे हैं। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से घरेलू बजट और व्यवस्था दोनों चरमरा गई है। देखना यह है कि प्रशासन एफआईआर से आगे इन एजेंसियों पर क्या कार्रवाई होता है, जिससे हम आम जनता को राहत मिल सके। बेगूसराय जिले में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। एक तरफ जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि गोदामों से डिलीवरी पर रोक लगाकर शत-प्रतिशत होम डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। एचपी (HP) गैस के उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद गैस एजेंसियां अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रही हैं। जिला प्रशासन ने सभी गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अपने गोदामों से गैस का वितरण नहीं करें, उपभोक्ताओं के घरों तक सिलेंडर पहुंचाएं, लेकिन एचपी कंपनी के वितरण नेटवर्क में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। सुबह 6 बजे से लाइन महमदपुर स्थित पूजा एचपी गैस एजेंसी के गोदाम पर रोजाना सुबह 6:00 बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। लोग काम-धंधा छोड़कर तपती धूप में घंटों अपनी बारी का इंतजार करते हैं, फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पूजा गैस एजेंसी पर हो चुकी है FIR आश्चर्य की बात यह है कि महज 5 दिन पहले ही प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन और अनियमितताओं को लेकर पूजा एचपी गैस एजेंसी पर एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। इसके बावजूद एजेंसी के कामकाज के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है। उपभोक्ता अभी भी एजेंसी के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मनमानी कर रही है एजेंसी लोगों का आरोप है कि उन्हें एक-एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है। जब वे गोदाम पर पहुंचते हैं, तो उन्हें स्टॉक खत्म होने या गाड़ी नहीं आने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। एजेंसी काफी मनमानी कर रहा है। लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। आखिर इस तरह की मनमानी कब रुकेगी। उपभोक्ताओं का दर्द- एक हफ्ते से खा रहे हैं ठोकर गोदाम पर लाइन में लगे उपभोक्ता सुबोध पासवान ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि आज एक सप्ताह हो गया है, हम लोग रोज चक्कर काट रहे हैं। कभी कहा जाता है कि गैस नहीं है, तो कभी कहा जाता है कि कल आना। घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। एक अन्य महिला उपभोक्ता ने बताया कि प्रशासन कह रहा है कि गैस घर पर आएगी। हफ्तों बीत जाने के बाद भी कोई हॉकर मोहल्ले में नहीं दिखता। मजबूरन हमें ऑटो का किराया लगाकर गोदाम तक आना पड़ता है, यहां भी अव्यवस्था का आलम है। गैस एजेंसियों की इस मनमानी ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जब गोदाम से वितरण पर रोक है, तो भीड़ वहां कैसे जुट रही है। चरमरा गई है बजट और व्यवस्था उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की इस कृत्रिम किल्लत के पीछे कालाबाजारी है। हम उपभोक्ता दोहरी मार झेल रहे हैं। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से घरेलू बजट और व्यवस्था दोनों चरमरा गई है। देखना यह है कि प्रशासन एफआईआर से आगे इन एजेंसियों पर क्या कार्रवाई होता है, जिससे हम आम जनता को राहत मिल सके।


