केरलम विधानसभा चुनाव: पिनाराई विजयन के गांव में चुनावी सन्नाटा, दीवारों पर LDF 3.0 का दावा

केरलम विधानसभा चुनाव: पिनाराई विजयन के गांव में चुनावी सन्नाटा, दीवारों पर LDF 3.0 का दावा

केरल की राजनीति में ‘कैप्टन’ के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पिनाराई विजयन का सिर्फ 25 वर्ष की आयु में सबसे युवा विधायक बनने का उनका रिकॉर्ड आज तक कायम है। राज्य के दूसरे सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री के रूप में वे 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद लगातार सत्ता में लौटने वाले पहले नेता बने थे।

मुख्यमंत्री के गांव में पसरा सन्नाटा

कन्नूर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित मुख्यमंत्री विजयन के गांव पिनाराई की केरल के राजनीतिक मानचित्र पर अलग पहचान है। आठ दशक पहले राज्य में साम्यवादी विचारधारा की नींव रखने वाला केंद्र भी रहा है। पिनाराई से सटे पारापरम गांव में दिसंबर 1939 में हुई एक गुप्त बैठक में राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी के गठन का निर्णय लिया गया था। इसके लगभग 18 वर्ष बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में पहली बार सरकार बनी। तब से लेकर आज तक केरल की राजनीति में वाम दलों की निर्णायक भूमिका बनी हुई है।

केरलम वाम गढ़ का मजबूत आधार

पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में वाम गढ़ ढहने के बाद अब केरल ही उनका सबसे मजबूत आधार बचा है।
गांव में संकरी गली में विजयन के पैतृक निवास के बाहर 3-4 पुलिसकर्मी और एक पुलिस जीप खड़ी थी। लेकिन बाहर कोई हलचल नहीं थी। गांव में भी चुनावी शोर नजर नहीं आया। इक्का-दुक्का प्रचार वाहन सड़कों पर दिखे। गांव में माकपा के झंडे, अंग्रेजी और मलयालम में विजयन के पोस्टर लगे थे, जिनमें उन्हें ‘रियल कैप्टन ऑफ केरल’ बताते हुए LDF 3.0 सरकार की तैयारी का दावा किया गया है। किराना दुकानदार नारायण के अनुसार, यहां माकपा का जोर है, जबकि कांग्रेस और भाजपा धर्मदम विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में प्रभाव रखते हैं।

तीसरी जीत की तैयारी में विजयन

राजनीतिक गलियारों में अडिग सोच के लिए पहचाने जाने वाले विजयन गांव के कार्यकर्ताओं के बीच ‘विजयेट्टन’ यानी बड़े भाई के नाम से जाने जाते हैं। अंजराकंडी नदी से घिरा यह इलाका धर्मदम विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है और विजयन यहां लगातार तीसरी जीत की तैयारी में हैं। 2011 में बने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वे 2016 से कर रहे हैं। पिछली बार उनकी जीत का अंतर 36,905 से बढ़कर 50,123 तक पहुंच गया। यह सीट माकपा का गढ़ रहा है और अब तक हुए तीनों चुनावों में उसे 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले है। हर चुनाव में वोट प्रतिशत और जीत का अंतर दोनों बढ़े हैं।

कांग्रेस व भाजपा से चुनौती

UDF के घटक कांग्रेस और NDA के घटक भाजपा से मिल रही कड़ी चुनौती के बीच विजयन का प्रचार अभियान धर्मदम में हुए विकास कार्यों पर केंद्रित है। हालांकि, विपक्ष इन दावों पर सवाल उठा रहा है, जिससे मुकाबला प्रदर्शन बनाम वादों की परीक्षा बन गया है।
कांग्रेस ने यहां युवा नेता वी. पी. अब्दुल राशिद को उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा ने प्रदेश सचिव रंजीत के. को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के लिए प्रदर्शन सुधारने के लिए तो वहीं भाजपा पिछले तीन चुनावों में वोट प्रतिशत में वृद्धि के आधार पर सेंध लगाने की तैयारी कर रही है। विजयन के लिए सातवीं बार विधानसभा पहुंचना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक चुनौती लगातार तीसरी जीत के साथ LDF को फिर सत्ता में लाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *