लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में स्थित सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स कंपनी में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। कंपनी के सहायक प्रबंधक पीयूष चतुर्वेदी की तहरीर पर पुलिस ने सहायक प्रबंधक (लेखा) वरुण अस्थाना और वरिष्ठ कार्यकारी अनिल कुमार के खिलाफ 4 करोड़ 73 लाख 20 हजार रुपये के गबन का केस दर्ज किया है। पीयूष ने बताया कि वरुण 2014 से और अनिल 2017 से कंपनी में कार्यरत थे। लंबे समय से भरोसे के चलते दोनों को वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। चार फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंतरिक ऑडिट में गड़बड़ी सामने आई। जांच में पता चला कि विक्रेताओं और किसानों के भुगतान के नाम पर कंपनी के खाते से निकाली गई रकम अन्य खातों में ट्रांसफर की जा रही थी। छुट्टी लेकर हुए फरार, पूछताछ से पहले ही गायब ऑडिट के बाद दोनों से जवाब मांगा जाना था, लेकिन इससे पहले ही वरुण सात फरवरी से छुट्टी पर चला गया। वहीं, अनिल ने भी 10 फरवरी से निजी कारण बताकर अवकाश ले लिया। 2019 से कर रहे थे गबन, खुद कबूली रकम कंपनी के अनुसार, अगले दिन दोनों आरोपियों ने प्रबंध निदेशक जय कुमार अग्रवाल और अनुज कुमार अग्रवाल के सामने 2019 से गबन करने की बात कबूल की। अनिल ने करीब 2.5 करोड़ और वरुण ने 2 करोड़ रुपये गबन करने की बात मानी। यह रकम 390 विक्रेताओं के खातों से परिवहन शुल्क के 0.4% हिस्से के रूप में निकाली गई थी। कुछ रकम लौटाई, फिर संपर्क टूट गया कार्रवाई से बचने के लिए दोनों ने रकम लौटाने का भरोसा दिया। अनिल ने 12 फरवरी को 9 लाख और 14 फरवरी को 30 हजार रुपये लौटाए, जबकि वरुण ने 3.5 लाख रुपये जमा किए। इसके बाद अनिल संपर्क में रहा, लेकिन वरुण फरार हो गया। किसानों के खातों में दर्ज कर दिए थे अपने नंबर जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के रिकॉर्ड में 15 किसानों के नाम के आगे आरोपियों के बैंक खाते दर्ज थे। भुगतान न मिलने पर किसान शिकायत करते तो दोनों उन्हें बहाने बनाकर टाल देते थे। इंस्पेक्टर अमर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।


