किशनगंज में सॉइल-वाटर टेस्टिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू:डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय में 49 डेज कोर्स का शुभारंभ

किशनगंज में सॉइल-वाटर टेस्टिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू:डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय में 49 डेज कोर्स का शुभारंभ

किशनगंज के डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय (DKAC) में ‘मृदा एवं जल परीक्षण लैब तकनीशियन (V.3)’ विषय पर 49 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन (BSDM) के तहत आयोजित यह कार्यक्रम शनिवार को आरंभ हुआ। यह प्रशिक्षण बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय के एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य डॉ. के. सत्यानारायण इसका मार्गदर्शन कर रहे हैं। इसमें कुल 21 प्रशिक्षु नामांकित हुए हैं। यह कार्यक्रम 4 अप्रैल से 23 मई 2026 तक चलेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन विशेषज्ञों की एक टीम कर रही उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय प्रोफेसर-सह-मुख्य वैज्ञानिक डॉ. बिरेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। उन्होंने सतत कृषि उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए मृदा एवं जल परीक्षण के महत्व पर जोर दिया। मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एस.सी. पॉल ने फसल सुधार में मृदा रसायन की भूमिका को रेखांकित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन विशेषज्ञों की एक टीम कर रही है। डॉ. स्वराज कुमार दत्ता नोडल पदाधिकारी और कोर्स निदेशक हैं, जबकि डॉ. भोला नाथ साहा कोर्स समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं। सह-समन्वयकों में डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. कृष्णा डी.के., डॉ. अंजलि सुधाकर और श्री मनीष कुमार शामिल हैं। ग्रामीण युवाओं की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के तकनीकी कौशल को विकसित करना है। इसका लक्ष्य मृदा एवं जल परीक्षण के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि यह पहल कृषि पद्धतियों में सुधार लाएगी और ग्रामीण युवाओं की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। किशनगंज के डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय (DKAC) में ‘मृदा एवं जल परीक्षण लैब तकनीशियन (V.3)’ विषय पर 49 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन (BSDM) के तहत आयोजित यह कार्यक्रम शनिवार को आरंभ हुआ। यह प्रशिक्षण बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय के एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य डॉ. के. सत्यानारायण इसका मार्गदर्शन कर रहे हैं। इसमें कुल 21 प्रशिक्षु नामांकित हुए हैं। यह कार्यक्रम 4 अप्रैल से 23 मई 2026 तक चलेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन विशेषज्ञों की एक टीम कर रही उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय प्रोफेसर-सह-मुख्य वैज्ञानिक डॉ. बिरेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। उन्होंने सतत कृषि उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए मृदा एवं जल परीक्षण के महत्व पर जोर दिया। मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एस.सी. पॉल ने फसल सुधार में मृदा रसायन की भूमिका को रेखांकित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन विशेषज्ञों की एक टीम कर रही है। डॉ. स्वराज कुमार दत्ता नोडल पदाधिकारी और कोर्स निदेशक हैं, जबकि डॉ. भोला नाथ साहा कोर्स समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं। सह-समन्वयकों में डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. कृष्णा डी.के., डॉ. अंजलि सुधाकर और श्री मनीष कुमार शामिल हैं। ग्रामीण युवाओं की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के तकनीकी कौशल को विकसित करना है। इसका लक्ष्य मृदा एवं जल परीक्षण के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि यह पहल कृषि पद्धतियों में सुधार लाएगी और ग्रामीण युवाओं की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।  

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