जिला अस्पताल में दो साल के इंतजार के बाद पार्किंग का ठेका होने जा रहा है, इसके लिए प्रबंधन ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। जल्द ही टेंडर ओपन कर दिए जाएंगे। टेंडर होने से पार्किंग व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव आएगा, क्योंकि अभी यहां एक हजार से अधिक वाहनों की प्रतिदिन आवाजाही होती है। ऐसी स्थिति में वाहन चालकों को जहां मन में आया, वहीं वाहन खड़े कर देते हैं। दो साल से अस्पताल के सुरक्षाकर्मी अपने काम के साथ ही पार्किंग व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
परिसर के चारों तरफ वाहनों का जमावड़ा
ठेका नहीं होने से परिसर के चारों तरफ वाहनों का जमावड़ा बना रहता है। मेन गेट से लेकर ब्लड बैंक तक का रास्ता कई बार जाम हो जाता है। स्थिति उस समय भयावह हो जाती है, जब लोग बेतरतीब तरीके से अपने वाहन लगाकर चले जाते हैं। सुरक्षाकर्मियों के मना करने पर वाहन चालक विवाद पर आमादा हो जाते हैं। दो दिन पहले एक सुरक्षाकर्मी का बाइक चालक से काफी विवाद हो गया था।
सुधार के प्रयास का नहीं हुआ असर
जिला अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने कई बार ट्रैफिक पुलिस को उतरना पड़ा है। पुलिस द्वारा बाइक सवारों को इधर-उधर पार्किंग नहीं करने की समझाइश दे चुकी है। वहीं अस्पताल की दीवारों पर नो पार्किंग के फ्लेक्स लगाए थे। इसके बाद भी अस्पताल परिसर के बाहर और अंदर बेतरतीब वाहनों के खड़े रहने से लोगों और वाहन चालकों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
एम्बुलेंसों को निकलने में हो रही दिक्कत
अस्पताल परिसर में वर्तमान में व्यवस्थित पार्किंग नहीं होने से लोग बेतरतीब ढंग वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे एम्बुलेंसों को भी निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार विवाद की स्थिति हो जाती है।
इनका कहना है
जिला अस्पताल में वाहन पार्किंग का ठेका प्रोसेस में है। जल्द ही पार्किंग की नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
डॉ. शरद चौरसिया, सिविल सर्जन, छतरपुर


