खनन विभाग का बड़ा रिकॉर्ड, मार्च में लक्ष्य से ज्यादा 780 करोड़ राजस्व हासिल

खनन विभाग का बड़ा रिकॉर्ड, मार्च में लक्ष्य से ज्यादा 780 करोड़ राजस्व हासिल

उत्तर प्रदेश में खनन राजस्व के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। भूतत्त्व एवं खनिकर्म विभाग के सुदृढ़ प्रयासों, सख्त निगरानी और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग के चलते मार्च माह में निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व प्राप्त किया गया है। विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि मार्च 2026 में 600 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 780 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व अर्जित किया गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

 मजबूत रणनीति का परिणाम

यह उपलब्धि किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे विभाग की सुनियोजित रणनीति, गहन समीक्षा प्रक्रिया और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभाग द्वारा राजस्व प्राप्ति के सभी पहलुओं की नियमित समीक्षा की गई और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की गई।

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि राजस्व संग्रहण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इसी के तहत जनपदीय और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ नियमित बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की रणनीति भी तय की गई।

 7150 करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वित्त विभाग द्वारा 7150 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति को लेकर विभाग पूरी तरह सक्रिय है। हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि लक्ष्य की शत-प्रतिशत प्राप्ति सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में यह भी सुनिश्चित किया गया कि उपखनिजों की उपलब्धता आमजन के लिए सरल, पारदर्शी और सुगम बनाई जाए, ताकि किसी प्रकार की कृत्रिम कमी या अव्यवस्था उत्पन्न न हो।

अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस

खनन विभाग ने अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई है। माला श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इन गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध गतिविधियों पर स्रोत स्तर (Source Point) पर ही रोक लगाई जाए। इसके लिए नियमित छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

तकनीक से सशक्त हुआ निगरानी तंत्र

उत्तर प्रदेश का खनन विभाग अब तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली से पूरी तरह सशक्त हो चुका है। IoT आधारित RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान) युक्त चेकगेट्स के माध्यम से खनिजों के परिवहन पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, Vehicle Tracking System के अंतर्गत 40,000 से अधिक वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से खनिज परिवहन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता तुरंत पकड़ में आ जाती है।

सैटेलाइट तकनीक का भी उपयोग

खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए Photogeology एवं Remote Sensing (PGRS) प्रयोगशाला का भी उपयोग किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से नए खनन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है और पहले से संचालित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। इस तकनीक से न केवल अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस पर जोर

खनन विभाग ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ई-गवर्नेंस प्रणाली को भी मजबूत किया है। सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने से भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हुई हैं और कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनी है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत चिन्हित कर कार्रवाई की जा सके।

 अधिकारियों को सख्त निर्देश

विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूर्ण उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से उनकी कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया निरंतर चलती रहे और किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए।

प्रदेश के विकास में अहम योगदान

खनन राजस्व में हुई इस वृद्धि का सीधा लाभ प्रदेश के विकास कार्यों को मिलेगा। सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार की सख्ती और पारदर्शिता बनी रही, तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में खनन राजस्व के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

समन्वित प्रयासों से मिली सफलता

खनन विभाग की इस सफलता के पीछे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी एक महत्वपूर्ण कारण है। प्रशासनिक अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और फील्ड स्टाफ के संयुक्त प्रयासों से यह लक्ष्य हासिल किया गया है। माला श्रीवास्तव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इसी गति और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहें, ताकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग, सख्त निगरानी और पारदर्शी कार्यप्रणाली के माध्यम से न केवल अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, बल्कि राजस्व वृद्धि के नए आयाम भी स्थापित किए जा सकते हैं।

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