ग्वालियर के कमलराज अस्पताल में रोग नहीं, भगवान वाले वार्ड:पीडियाट्रिक वार्ड का नाम होगा लड्डू गोपाल; मेटरनिटी वार्ड कहलाएगा यशोदा मैया वार्ड

ग्वालियर के कमलराज अस्पताल में रोग नहीं, भगवान वाले वार्ड:पीडियाट्रिक वार्ड का नाम होगा लड्डू गोपाल; मेटरनिटी वार्ड कहलाएगा यशोदा मैया वार्ड

ग्वालियर के कमलराज अस्पताल (KRH), जो गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) से जुड़ा है, अब नई पहचान के साथ सामने आएगा। अस्पताल में वार्डों के नाम बदलने का फैसला किया गया है। अब तक वार्डों की पहचान अंग्रेजी या बीमारियों के नाम से होती थी, लेकिन अब इन्हें भगवान और अस्पताल के लिए समर्पित लोगों के नाम से जाना जाएगा। पीडियाट्रिक वार्ड, जहां बच्चों का इलाज होता है, अब लड्डू गोपाल या बाल कृष्ण वार्ड कहलाएगा। मेटरनिटी वार्ड, जहां मां और नवजात रहते हैं, उसे यशोदा वार्ड नाम दिया जाएगा। अस्पताल परिसर के पार्क का नाम शांति उद्यान रखा जाएगा, जबकि उसमें बने पुल को राम सेतु कहा जाएगा। अस्पताल के पूर्व डॉक्टरों के नाम पर भी वार्डों का नाम जीआरएमसी के प्रतिष्ठित डॉक्टरों के नाम पर वार्डों का नाम रखा गया है। डॉ. लीला फाटक और डॉ. के.वी. वाघ के नाम पर वार्डों का नामकरण किया गया है। डॉ. लीला फाटक गायनिक विभाग की एचओडी थीं। उन्होंने जीवनभर मरीजों की सेवा की और मृत्यु के बाद अपना शरीर एनाटॉमी विभाग को छात्रों के अध्ययन के लिए दान कर दिया था। अब बच्चों के वार्ड लड्डू गोपाल और कृष्ण वार्ड कहलाएंगे पीडियाट्रिक वार्ड के नाम भी बदले गए हैं। पहले अंग्रेजी नामों के कारण लोगों को संबंधित वार्ड तक पहुंचने में परेशानी होती थी। अब इन वार्डों को लड्डू गोपाल, कृष्ण नाम दिए गए हैं, जिससे उनकी पहचान आसान हो गई है। पार्क और परिसर को भी नई पहचान अस्पताल परिसर के पार्कों को भी नई पहचान दी गई है। अब इन्हें शांति उद्यान और राम सेतु जैसे नामों से जाना जाएगा। इससे परिसर में सकारात्मक और सुकून भरा माहौल बनेगा, जो मरीजों और उनके परिजनों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होगा। पुराने पार्कों को नया रूप देकर संवारा गया है, ताकि मरीजों के परिजन यहां समय बिता सकें। अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 डिलीवरी होती हैं केआरएच में हर दिन 40 से 50 डिलीवरी होती हैं और बड़ी संख्या में मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। वार्डों के जटिल नामों के कारण उन्हें सही जगह तक पहुंचने में परेशानी होती थी। कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती थी, जिससे इलाज में देरी का खतरा रहता था। यहां अंचल के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से भी मरीज उपचार के लिए आते हैं। उद्देश्य: ग्रामीण मरीजों को सुविधा हो
जीआरएमसी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज और उनके परिजन वार्डों के नाम को लेकर अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वार्डों को नई पहचान दी गई है, ताकि उन्हें आसानी हो सके। अस्पताल में लंबे समय तक सेवा देने वाले डॉक्टरों को सम्मान देने के लिए कुछ वार्डों का नाम उनके नाम पर भी रखा जा रहा है, ताकि उनके योगदान को याद रखा जा सके।

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