Pediatric Epilepsy Surgery: अगर कोई बच्चा बिना कारण लगातार हंसता रहे, यहां तक कि गंभीर परिस्थितियों में भी उसकी हंसी न रुके, तो इसे सामान्य शरारत मानना खतरनाक हो सकता है। यह ‘लाफिंग एपिलेप्सी’ यानी हंसने वाली मिर्गी का संकेत हो सकता है।
एम्स जोधपुर ने इस दुर्लभ और जटिल बीमारी से पीड़ित 4 बच्चों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें दौरे से मुक्त कर दिया है। इस उपलब्धि के साथ एम्स जोधपुर राजस्थान का पहला और देश का दूसरा एम्स बन गया है, जहां इस प्रकार की अत्यधिक विशेषज्ञता वाली सर्जरी संभव हुई है।
बेवजह हंसते रहते थे बच्चे
भरतपुर, कोटा और जोधपुर से आए 2 से 14 वर्ष आयु वर्ग के इन 4 मरीजों में दो छोटे बच्चे और दो किशोरियां शामिल थी। लंबे समय से ये बच्चे दिनभर बेवजह हंसते थे और कई मामलों में उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि प्रतिदिन 10 से 20 तक दौरे आते थे। यह बीमारी ‘हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा’ नामक दिमाग की गांठ के कारण होती है, जिसकी पहचान और इलाज दोनों ही चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं।
ईईजी व एमआरआइ से पहचान
ऐसे बच्चों में लाफिंग मिर्गी का पता ईईजी और एमआरआइ जांच से चलता है। यह गांठ दिमाग की पीयूष ग्रंथि के पास बनती है जिससे बच्चों में हार्मेानल बदलाव भी आते हैं। पास में आंखाें की तंत्रिकाएं भी होती है। इससे आंखों की रोशनी पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
एक इंच चीरा लगाकर गांठ निकाली
एम्स जोधपुर की टीम ने न्यूनतम इनवेसिव स्टीरियोटैक्टिक रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन तकनीक का उपयोग करते हुए महज एक इंच के छोटे चीरे से दिमाग के गहरे हिस्से में स्थित गांठ को सटीकता से नष्ट किया। इस प्रक्रिया में ओपन ब्रेन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, जिससे जोखिम काफी कम रहा। 48 घंटे के भीतर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब ये सभी पूरी तरह से दौरे मुक्त है। इन मरीजों का न्यूरोलॉजिकल मूल्यांकन डॉ. सम्हिता पांडा और डॉ. लोकेश सैनी ने किया। एमआरआई लोकेलाइजेशन डॉ. सरबेश तिवारी ने किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. स्वाति छाबड़ा और डॉ. मनबीर कौर शामिल रही, वहीं सर्जरी का नेतृत्व डॉ. मोहित अग्रवाल ने किया।
100 से अधिक ऑपरेशन
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जी.डी. पुरी ने बताया कि एम्स जोधपुर में वर्ष 2019 से व्यापक मिर्गी सर्जरी कार्यक्रम संचालित हो रहा है। अब तक 100 से अधिक सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं।


