भास्कर न्यूज | बांका जमीन निबंधन में बांका राज्यभर में चौथा स्थान प्राप्त किया है। वर्ष भर के दौरान बांका में जमीन रजिस्ट्री के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके परिणा स्वरूप जिला राज्य स्तर पर शीर्ष जिलों में शामिल हो गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक साल में बांका जिले में कुल 25130 जमीन रजिस्ट्रियां हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। जिले को जो लक्ष्य दिया गया था, उसके मुकाबले 107 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की गई है। इस प्रदर्शन ने न केवल राजस्व संग्रह में वृद्धि की है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को भी दर्शाया है। निबंधन विभाग के सब-रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि इस सफलता के पीछे पारदर्शी प्रक्रिया, ऑनलाइन व्यवस्था और आम लोगों को दी जा रही बेहतर सुविधाएं मुख्य कारण हैं। जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के लिए विभाग ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। इससे लोगों को कम समय में और बिना किसी परेशानी के अपने दस्तावेजों का निबंधन कराने में मदद मिल रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि लोग अधिक संख्या में आगे आए और वैध तरीके से जमीन का निबंधन कराने लगे। निबंधन विभाग के सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि बांका जिले ने सरकार को राजस्व देने के मामले में भी राज्य में अव्वल जिले की सूची में शामिल रहा है। बांका निबंधन कार्यालय को सरकार की ओर से 55.45 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसके मुकाबले बांका ने 59.33 करोड़ प्राप्त किया। इस प्रकार से बांका निबंधन कार्यालय ने 107 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल किया तो वहीं अमरपुर 30.93 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था। इसके मुकाबले अमरपुर ने 33.56 करोड़ का राजस्व सरकार को दिया। इस प्रकार से अमरपुर ने भी 108 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल किया है। बांका निबंधन कार्यालय ने 13245 डीड तो अमरपुर ने 11882 डीड का निबंधन किया है। एमवीआर (मिनिमम वेल्यू रजिस्टर) रेट लागू होने से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आती है। लोग कम कीमत दिखाकर टैक्स चोरी नहीं कर पाते। न्यूनतम दर तय होने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क सही तरीके से वसूला जाता है, जिससे सरकार का राजस्व बढ़ता है। एमवीआर रेट जमीन की एक बेस कीमत तय करता है, जिससे बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव और मनमानी कीमतों पर रोक लगती है। कम कीमत दिखाकर फर्जी रजिस्ट्री या काले धन के इस्तेमाल की संभावना घटती है। सरकारी रेट तय होने से दोनों पक्षों को एक सुरक्षित और वैध लेन-देन का आधार मिलता है। एक अप्रैल से लागू होने वाली निबंधन की नई दरें इस बार निर्धारित समय पर लागू नहीं हो सकी हैं। जिले में अब तक पुरानी दरों पर ही जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक नई दरों को लागू करने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसके कारण प्रक्रिया में बदलाव नहीं हुआ है। निबंधन विभाग के सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि जैसे ही सरकार की ओर से निर्देश प्राप्त होगा, नई दरों को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया जाएगा। फिलहाल सभी रजिस्ट्रियां पुराने सर्किल रेट के आधार पर ही की जा रही हैं। Share with facebook Share with facebook एमवीआर रेट से ये फायदे होंगे निबंधन से बांका जिला ने सरकार को दिया 92.89 करोड़ भास्कर न्यूज | बांका जमीन निबंधन में बांका राज्यभर में चौथा स्थान प्राप्त किया है। वर्ष भर के दौरान बांका में जमीन रजिस्ट्री के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके परिणा स्वरूप जिला राज्य स्तर पर शीर्ष जिलों में शामिल हो गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक साल में बांका जिले में कुल 25130 जमीन रजिस्ट्रियां हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। जिले को जो लक्ष्य दिया गया था, उसके मुकाबले 107 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की गई है। इस प्रदर्शन ने न केवल राजस्व संग्रह में वृद्धि की है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को भी दर्शाया है। निबंधन विभाग के सब-रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि इस सफलता के पीछे पारदर्शी प्रक्रिया, ऑनलाइन व्यवस्था और आम लोगों को दी जा रही बेहतर सुविधाएं मुख्य कारण हैं। जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के लिए विभाग ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। इससे लोगों को कम समय में और बिना किसी परेशानी के अपने दस्तावेजों का निबंधन कराने में मदद मिल रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि लोग अधिक संख्या में आगे आए और वैध तरीके से जमीन का निबंधन कराने लगे। निबंधन विभाग के सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि बांका जिले ने सरकार को राजस्व देने के मामले में भी राज्य में अव्वल जिले की सूची में शामिल रहा है। बांका निबंधन कार्यालय को सरकार की ओर से 55.45 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसके मुकाबले बांका ने 59.33 करोड़ प्राप्त किया। इस प्रकार से बांका निबंधन कार्यालय ने 107 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल किया तो वहीं अमरपुर 30.93 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था। इसके मुकाबले अमरपुर ने 33.56 करोड़ का राजस्व सरकार को दिया। इस प्रकार से अमरपुर ने भी 108 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल किया है। बांका निबंधन कार्यालय ने 13245 डीड तो अमरपुर ने 11882 डीड का निबंधन किया है। एमवीआर (मिनिमम वेल्यू रजिस्टर) रेट लागू होने से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आती है। लोग कम कीमत दिखाकर टैक्स चोरी नहीं कर पाते। न्यूनतम दर तय होने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क सही तरीके से वसूला जाता है, जिससे सरकार का राजस्व बढ़ता है। एमवीआर रेट जमीन की एक बेस कीमत तय करता है, जिससे बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव और मनमानी कीमतों पर रोक लगती है। कम कीमत दिखाकर फर्जी रजिस्ट्री या काले धन के इस्तेमाल की संभावना घटती है। सरकारी रेट तय होने से दोनों पक्षों को एक सुरक्षित और वैध लेन-देन का आधार मिलता है। एक अप्रैल से लागू होने वाली निबंधन की नई दरें इस बार निर्धारित समय पर लागू नहीं हो सकी हैं। जिले में अब तक पुरानी दरों पर ही जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक नई दरों को लागू करने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसके कारण प्रक्रिया में बदलाव नहीं हुआ है। निबंधन विभाग के सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि जैसे ही सरकार की ओर से निर्देश प्राप्त होगा, नई दरों को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया जाएगा। फिलहाल सभी रजिस्ट्रियां पुराने सर्किल रेट के आधार पर ही की जा रही हैं। Share with facebook Share with facebook एमवीआर रेट से ये फायदे होंगे निबंधन से बांका जिला ने सरकार को दिया 92.89 करोड़


