बिहार के जमालपुर नगर परिषद पर आरोप लगा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की आधी से अधिक आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रही है। जलापूर्ति योजना के तहत कई वार्डों और मोहल्लों में अब भी पानी का कनेक्शन नहीं दिया गया है। योजना और लागत वार्ड पार्षद साईं शंकर के अनुसार, जमालपुर जलापूर्ति योजना की कार्य समाप्ति तिथि 30 सितंबर 2022 थी। योजना की कुल लागत लगभग 150 करोड़ रुपये थी और इसे शहर के 33 वार्डों में लागू किया जाना था। वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से ओवरहेड टैंक तक पानी पहुंचाने का कार्य पहले लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के पास था, जिसे अब नगर परिषद को सौंपा गया है। रखरखाव में कथित अनियमितताएँ रखरखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद और बुडको के माध्यम से पिछले चार वर्षों से गनाधिपति कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी निभा रही है। आरोप है कि छठी वित्त अनुदान और मुख्यमंत्री पेयजल योजना के तहत रखरखाव के लिए कुल 63.8 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता हुई। जनता की परेशानी अधिवक्ता सुखदेव पोद्दार ने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नगर परिषद शहर की आधी से अधिक जनता को शुद्ध पानी नहीं दे पा रही है। पुस्तक विक्रेता शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कुछ वार्डों में पानी मिल रहा है, तो कुछ में बिल्कुल नहीं, और कई जगह सड़क के एक तरफ पानी आता है, जबकि दूसरी तरफ नहीं। सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश प्रसाद शर्मा ने कहा कि व्यावसायिक केंद्र धर्मशाला रोड में आज तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। उन्होंने सरकार से सदर बाजार के हर घर में पानी का कनेक्शन देने का अनुरोध किया। पूर्व नगर परिषद उम्मीदवार उषा जलान ने सवाल उठाया कि टैक्स देने के बावजूद धर्मशाला रोड और सदर बाजार में पानी क्यों नहीं मिल रहा है, जबकि कई जगह सरकारी जलापूर्ति होने के बावजूद लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं। बिहार के जमालपुर नगर परिषद पर आरोप लगा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की आधी से अधिक आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रही है। जलापूर्ति योजना के तहत कई वार्डों और मोहल्लों में अब भी पानी का कनेक्शन नहीं दिया गया है। योजना और लागत वार्ड पार्षद साईं शंकर के अनुसार, जमालपुर जलापूर्ति योजना की कार्य समाप्ति तिथि 30 सितंबर 2022 थी। योजना की कुल लागत लगभग 150 करोड़ रुपये थी और इसे शहर के 33 वार्डों में लागू किया जाना था। वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से ओवरहेड टैंक तक पानी पहुंचाने का कार्य पहले लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के पास था, जिसे अब नगर परिषद को सौंपा गया है। रखरखाव में कथित अनियमितताएँ रखरखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद और बुडको के माध्यम से पिछले चार वर्षों से गनाधिपति कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी निभा रही है। आरोप है कि छठी वित्त अनुदान और मुख्यमंत्री पेयजल योजना के तहत रखरखाव के लिए कुल 63.8 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता हुई। जनता की परेशानी अधिवक्ता सुखदेव पोद्दार ने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नगर परिषद शहर की आधी से अधिक जनता को शुद्ध पानी नहीं दे पा रही है। पुस्तक विक्रेता शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कुछ वार्डों में पानी मिल रहा है, तो कुछ में बिल्कुल नहीं, और कई जगह सड़क के एक तरफ पानी आता है, जबकि दूसरी तरफ नहीं। सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश प्रसाद शर्मा ने कहा कि व्यावसायिक केंद्र धर्मशाला रोड में आज तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। उन्होंने सरकार से सदर बाजार के हर घर में पानी का कनेक्शन देने का अनुरोध किया। पूर्व नगर परिषद उम्मीदवार उषा जलान ने सवाल उठाया कि टैक्स देने के बावजूद धर्मशाला रोड और सदर बाजार में पानी क्यों नहीं मिल रहा है, जबकि कई जगह सरकारी जलापूर्ति होने के बावजूद लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं।


