छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत: FSSAI ने बदले नियम, 1.5 करोड़ तक सिर्फ पंजीयन, वेंडरों को लाइसेंस से छूट

छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत: FSSAI ने बदले नियम, 1.5 करोड़ तक सिर्फ पंजीयन, वेंडरों को लाइसेंस से छूट

बरेली। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही खाद्य कारोबार से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए लाइसेंस और पंजीयन व्यवस्था को आसान कर दिया है। लागू हुए इन नियमों से छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार अब केवल उन्हीं खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, जिनका वार्षिक टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें बड़े होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई प्रतिष्ठान, डेयरी संचालक और अन्य बड़े खाद्य व्यवसायी शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस श्रेणी में आने वाले सभी कारोबारियों को अनिवार्य रूप से खाद्य लाइसेंस लेना होगा।

छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, पंजीयन से काम चलेगा

नए नियमों के तहत 1.5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले खाद्य कारोबारियों को अब लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे छोटे दुकानदारों, ढाबा संचालकों और स्थानीय व्यापारियों को केवल खाद्य सुरक्षा विभाग में पंजीयन कराना होगा। इससे लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया से राहत मिलेगी और कारोबार करना आसान होगा। नई व्यवस्था में स्ट्रीट वेंडरों को भी बड़ी राहत दी गई है। अब उन्हें खाद्य विभाग से अलग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। वे केवल नगर निकाय की टाउन वेंडिंग कमेटी के माध्यम से पंजीयन कराकर अपना व्यवसाय चला सकेंगे। इससे रेहड़ी-पटरी वालों को अनावश्यक दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।

पहले कम सीमा पर भी जरूरी था लाइसेंस

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल ने बताया कि पहले 12 लाख रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर होने पर खाद्य लाइसेंस लेना अनिवार्य था। इससे कम टर्नओवर वाले व्यापारियों को पंजीयन कराना होता था। अब इस सीमा को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में छोटे खाद्य कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से छोटे और मध्यम स्तर के खाद्य कारोबारियों को राहत मिलेगी और नए उद्यमियों को भी आगे आने का मौका मिलेगा। लाइसेंस प्रक्रिया में कमी आने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी, जिससे कारोबार का विस्तार भी आसान होगा।

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