मां की अकाल मौत, बहनों ने संभाला, सोनू लाई 97.60%:पिता के देहांत के बाद मां ने चुड़ियों में नग लगाकर पढ़ाया, अब जिनल लाई 95.40 प्रतिशत

मां की अकाल मौत, बहनों ने संभाला, सोनू लाई 97.60%:पिता के देहांत के बाद मां ने चुड़ियों में नग लगाकर पढ़ाया, अब जिनल लाई 95.40 प्रतिशत

पाली की ऐसी दो होनहार बेटियों की कहानी से रूबरू करवाने चाहते है। जिन्होंने 12वीं कॉमर्स में अच्छे अंक लाकर अपने परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया। सोनू की अकाल मौत के बाद उसके पिता और बड़ी बहनों ने उसे संभाला वही जिनल के पिता की अकाल मौत के बाद उसकी मां ने घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। चुड़ियों में नग लगाकर बच्चों को पढ़ाया। सोनू चितारा और जिनल का कहना है कि वे अपने परिवार के सपोर्ट के दम पर ही इतने अच्छे अंक लाने में सफल रही।
मां की मौत के बाद बहनों ने संभाला
पाली शहर के रामदेव रोड दुर्गा कॉलोनी में रहने वाली सोनू चितारा वंदे मारतम स्कूल की स्टूडेंट है। 12वीं कॉर्मस में 97.60 अंक लाई अब उसका सपना है कि वह किसी बड़ी कम्पनी में CEO बने और अपने पिता को आराम दे सके। सोनू ने बताया कि सके पिता जगदीश चितारा मस्तान बाबा के निकट बैग सिलाई का काम करते है। वे 5 भाई-बहन है। साल 2022 में उसकी मां की बीमारी से मौत हो गई। ऐसे में वह भी एक बार डिप्रेशन में आ गई। पापा काम पर चले जाते है। ऐसे में विकट समय में बड़ी बहन मनिषा, महिमा ने उसे संभाला और बोला कि तुम पढ़ाई पर फोक्स करो। हम घर का काम कर लेगी। उन्होंने कभी उसे घर के काम-काज में हाथ बंटाने के लिए नहीं कहा। जबकि दोनो ही पढ़ाई में उससे भी होशियार है। उनके सहयोग समर्पण के कारण वह आज 97.60 प्रतिशत अंक ला सकी है।
पिता की मौत के बाद मां ने संभाला- बोली अच्छी पढ़ाई करोगे तो काबिल बनोंगे
पाली शहर के ही रामदेव रोड क्षेत्र में रहने वाली जिनल 12वीं कॉमर्स में 94.50 अंक लाई। वह वंदे मातरम स्कूल की स्टूडेंट है और अब CA बनना उसका लक्ष्य है।
जिनल बताती है कि वे पहले मुम्बई रहते थे। लेकिन साल 2021 में पापा ईश्वरसिंह की बीमारी से मौत हो गई। वर्तमान में वे पाली में अपने ननिहाल में रह रहे है। जहां मां फूलाकंवर ने अपने तीनों बच्चो पलक, जिनल और दुर्गपाल को चूड़ी में नग लगाकर पाल रही है। उनकी पढ़ाई में नाना का भी काफी योगदान है।
उन्होंने बताया कि पापा की अकाल मौत के बाद उनकी जिदंगी बदल गई। ऐसे विकट वक्त में मां ने कहा कि वह कम पढ़ी लिखी है। अगर नौकरी में होती तो आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता। इसलिए खूब पढ़ो और काबिल बनो ताकि जीवन में किसी तरह कि विकट परिस्थतियां आए तो उसका सामना डटकर कर सको।

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