जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में नेशनल हेल्थकेयर हैकाथॉन 2.0 की शुरुआत:एआई से हेल्थकेयर चुनौतियों के समाधान खोजने में जुटे देशभर के छात्र

जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में नेशनल हेल्थकेयर हैकाथॉन 2.0 की शुरुआत:एआई से हेल्थकेयर चुनौतियों के समाधान खोजने में जुटे देशभर के छात्र

चिकित्सा क्षेत्र की जटिल समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजने के उद्देश्य से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में ‘एआई-पावर्ड क्लीनिकल एक्सीलेंस’ थीम पर नेशनल हेल्थकेयर हैकाथॉन 2.0 का आयोजन किया गया। इस 36 घंटे तक चलने वाले हैकाथॉन में देशभर से आए मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्र हेल्थकेयर से जुड़ी चुनौतियों के लिए नवाचारी समाधान विकसित कर रहे हैं। हैकाथॉन में देशभर की लगभग 250 टीमों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 75 टीमों को उनके नवाचारों के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया। प्रत्येक टीम में दो इंजीनियरिंग और एक मेडिकल छात्र शामिल हैं, जो मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक और सुलभ बनाने के लिए एआई आधारित मॉडल तैयार कर रहे हैं। इस आयोजन में एम्स दिल्ली, आरयूएचएस, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज, आरडी मेडिकल कॉलेज (बिहार), निम्स सहित तेलंगाना और मुंबई के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं। प्रतिभागी सेप्सिस की समय पर पहचान, सर्जरी के दौरान ईसीजी तारों से होने वाली बाधाओं को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य विकारों जैसी गंभीर समस्याओं पर तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट एंड फोर्टिस हेल्थकेयर मेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और पद्म भूषण डॉ. अशोक सेठ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीकें आधुनिक चिकित्सा को प्रिवेंटिव, प्रेडिक्टिव, पर्सनलाइज़्ड और प्रिसिजन प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी तकनीकी क्षमता का उपयोग कर देश की लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में योगदान दें। डॉ. सेठ ने कहा कि तकनीकी नवाचार तभी सार्थक होंगे जब उन्हें ‘6 सी’—केयर, कम्पेनियन, कमिटमेंट, कम्युनिकेशन, कॉम्पीटेंस और कॉन्शियस के साथ जोड़ा जाए। उनके अनुसार भविष्य का हेल्थकेयर तंत्र केवल तकनीक आधारित नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण होना चाहिए। इस अवसर पर जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अमित अग्रवाल ने कहा कि यह हैकाथॉन केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि छात्रों की नवाचार और शोध क्षमता को विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच है। तकनीक और चिकित्सा का संगम आज की आवश्यकता है और ऐसे आयोजन युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि जेईसीआरसी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (जेएमसीएचआरसी) भी इस पहल से जुड़ रहा है। 720 बेड वाले इस अस्पताल के सहयोग से छात्रों को वास्तविक चिकित्सा परिस्थितियों को समझने और उनके समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा। यहां छात्र प्रिवेंटिव मेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों से भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तैयार होंगे। वहीं यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर (पीपल एंड कल्चर) ध्रुवी अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी संस्कृति का हिस्सा बनाना है जहाँ तकनीक और मानवीय संवेदना के समन्वय से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

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