फिल्मी दुनिया से निकलकर तमिलनाडु की राजनीति में ‘अम्मा’ के नाम से मशहूर हुईं J Jayalalithaa का जीवन उतार-चढ़ाव, विवाद और ऐतिहासिक जीतों से भरा रहा। उनके करिश्माई नेतृत्व ने तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दी और उन्हें राज्य की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार कर दिया।
J Jayalalithaa: क्या है उनके राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी खासियत?
जे. जयललिता ने 5 जून 1982 को AIADMK (All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam) में कदम रखा। तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन की प्रेरणा से पार्टी में शामिल हुईं जयललिता को जल्द ही उच्च स्तरीय समिति में जगह मिली और प्रचार सचिव का जिम्मा सौंपा गया। इसके बाद 1984 में वह राज्यसभा सदस्य चुनी गईं और 1989 तक संसद में रहीं।
एमजीआर के निधन के बाद 1987 में पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व J Jayalalithaa ने खुद संभाला। 1989 में विधानसभा चुनाव लड़ा और विपक्ष की नेता बनीं। इसी वर्ष उन्होंने दोनों गुटों को एकजुट किया और पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘दो पत्ती’ को वापस दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री पद की ऐतिहासिक यात्रा
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद AIADMK और कांग्रेस का गठबंधन भारी बहुमत से सत्ता में आया। 25 जून 1991 को जयललिता पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। 1992 में महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं, जिनमें पुलिस में 30 प्रतिशत आरक्षण और महिला पुलिस थानों की स्थापना प्रमुख रही।
दत्तक पुत्र की शादी और विवाद
1995 में J Jayalalithaa के दत्तक पुत्र वी.एन. सुधाकरन की शादी ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं। चेन्नई में आयोजित इस भव्य समारोह में दो लाख से अधिक मेहमान शामिल हुए। 75,000 वर्ग फुट में बने किले जैसे पंडाल और शानो-शौकत ने इसे “सभी शादियों की जननी” बना दिया। इस भव्यता पर जनता में नाराजगी और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे।
चुनावी जीत और कानूनी चुनौतियां
1996 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद जयललिता पर कई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए। 2001 में चुनाव आयोग ने उनका नामांकन अस्वीकार किया, फिर भी वह मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस्तीफा देना पड़ा। 2002 में उपचुनाव जीतकर दोबारा मुख्यमंत्री बनीं। 2011 और 2016 में भी ‘अम्मा’ के नाम से लोकप्रिय योजनाओं के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला।
सात बार जीत, छह बार मुख्यमंत्री
जयललिता ने अपने राजनीतिक जीवन में नौ चुनाव लड़े, जिनमें से सात बार जीत हासिल की। उनका छह बार मुख्यमंत्री बनना तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में एक अलग मिसाल है। उनके कार्यकाल—1991-96, 2001 (संक्षिप्त), 2002-06, 2011-14, 2015-16 और 2016 से आगे—सभी में उन्होंने राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
‘अम्मा’ ब्रांड और जनकल्याणकारी योजनाएं
मुख्यमंत्री रहते हुए जयललिता ने ‘अम्मा’ ब्रांड के तहत कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, जिनका असर राज्य की जनता पर गहरा पड़ा। उनका राजनीतिक सफर तमिलनाडु की राजनीति में प्रेरणा और मिसाल के तौर पर देखा जाता है।



