जेट फ्यूल 100% महंगा, लेकिन भारत में दाम नहीं बढ़ेंगे:सरकार ने कीमतों पर 25% का कैप लगाया; घरेलू उड़ानों का किराया कंट्रोल में रहेगा

जेट फ्यूल 100% महंगा, लेकिन भारत में दाम नहीं बढ़ेंगे:सरकार ने कीमतों पर 25% का कैप लगाया; घरेलू उड़ानों का किराया कंट्रोल में रहेगा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF यानी जेट फ्यूल 100% से ज्यादा महंगा हो गया है। इस तेजी के बावजूद सरकार ने ATF में बढ़ोतरी को सिर्फ 25% तक सीमित रखने का फैसला किया है। इस पूरे घटनाक्रम समझने के लिए पढ़ें यह QA सवाल 1: आज से हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है? जवाब: अंतरराष्ट्रीय बाजार को देखते हुए भारत में हवाई ईंधन के दाम 100% से ज्यादा बढ़ने की आशंका थी। लेकिन सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए इसे केवल 25% तक सीमित कर दिया है। दिल्ली में अब ATF 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638 रुपए थी। सवाल 2: सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा? जवाब: पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ बंद होने की वजह से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में असाधारण स्थिति पैदा हो गई है। अगर सरकार दखल नहीं देती, तो ईंधन के दाम दोगुने से ज्यादा हो जाते। घरेलू हवाई सफर को पहुंच में रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। सवाल 3: क्या इसका फायदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी मिलेगा? जवाब: नहीं। सरकार ने साफ किया है कि यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है। जो फ्लाइट्स विदेश जा रही हैं, उन्हें ATF की बढ़ी हुई कीमत ही चुकानी होगी। अंतरराष्ट्रीय रूट पर चलने वाली फ्लाइट्स जेट फ्यूल के लिए वही रेट देंगी जो दुनिया के बाकी हिस्सों में चल रहे हैं। सवाल 4: इसका आम यात्रियों के टिकट पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: चूंकि सरकार ने ईंधन की बढ़त को 25% पर रोक दिया है, इसलिए घरेलू उड़ानों के किराए में ‘अचानक और बहुत ज्यादा’ उछाल नहीं आएगा। हालांकि, 25% की बढ़ोतरी भी कम नहीं है, इसलिए एयरलाइंस टिकट की कीमतों में मामूली इजाफा कर सकती हैं। सवाल 5: ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ का बंद होना भारत के लिए क्यों चिंता की बात है? जवाब: यह समुद्री रास्ता कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह रास्ता ब्लॉक हो गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा यहीं से आयात करता है। सप्लाई रुकने से कीमतें बढ़ गई है। सवाल 6: ATF के दाम कब और कैसे तय होते हैं? जवाब: भारत में साल 2001 से ATF की कीमतें विनियमित हैं। इनका निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को सरकारी तेल कंपनियां करती हैं। सवाल 7: क्या आने वाले समय में राहत बढ़ सकती है? जवाब: यह पूरी तरह से पश्चिम एशिया के हालातों पर निर्भर करता है। सरकार ने फिलहाल ‘स्टैगर्ड’ (किस्तवार) तरीके से दाम बढ़ाए हैं ताकि एकदम से दाम न बढ़े। अगर तनाव कम होता है और सप्लाई बहाल होती है, तो भविष्य में कीमतें स्थिर हो सकती हैं। सवाल 8: अगर सरकार ने 25% का कैप लगाया है तो दाम अभी 8-9% ही क्यों बढ़े हैं? जवाब: सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाहे 100% की तेजी आए, भारत में तेल कंपनियां एक बार में 25% से ज्यादा दाम नहीं बढ़ाएंगी। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें 25% ही बढ़ाना है। 25% की पहली किस्त हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100% की तेजी कच्चे तेल के दामों में है। जब इसे भारत में प्रोसेस करके ATF बनाया जाता है, तो उसमें रिफाइनिंग कॉस्ट, लॉजिस्टिक्स और टैक्स भी शामिल होते हैं। सरकार ने फिलहाल सिर्फ बेसिक कॉस्ट के एक हिस्से को ही पास-ऑन करने की अनुमति दी है। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है ATF एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) वह खास ईंधन है जिसका इस्तेमाल हवाई जहाजों के टर्बाइन इंजनों में किया जाता है। किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है, इसीलिए ATF के दाम सीधे हवाई किराए को प्रभावित करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *