देश में 1 अप्रैल से नए श्रम संहिता (लेबर कोड) लागू होने के विरोध में मधुबनी जिले के जयनगर में विरोध प्रदर्शन किया गया। ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन (ECREU) जयनगर से जुड़े दर्जनों रेल कर्मचारियों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह विरोध प्रदर्शन दरभंगा शाखा के उपाध्यक्ष बैद्यनाथ भारती के नेतृत्व और संरक्षक भूषण सिंह के संरक्षण में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया। ”मजदूर विरोधी चार नए श्रम संहिता लागू किए” सभा को संबोधित करते हुए दरभंगा शाखा के संरक्षक भूषण सिंह ने कहा कि आजादी से पहले मजदूरों के हित में 44 पुराने श्रम संहिता लागू किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने इन पुराने कोडों को रद्द कर ‘मजदूर विरोधी’ चार नए श्रम संहिता लागू किए हैं, जिससे देश की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम करने का प्रावधान भूषण सिंह ने नए श्रम संहिता के प्रावधानों की आलोचना करते हुए कहा कि इनमें 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम करने का प्रावधान है। साथ ही, अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन और हड़ताल करने पर भी रोक लगाई गई है, और यूनियन बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि ये कोड बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को मजदूर विरोधी नीतियों पर चलने की पूरी छूट देते हैं। उन्होंने इन ‘मजदूर विरोधी’ नए श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़क से सदन तक एक मजबूत और बड़ा आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से दरभंगा शाखा के संरक्षक भूषण सिंह, उपाध्यक्ष बैद्यनाथ भारती, स्थानीय नेता कृष्ण कुमार कामत, राकेश कुमार गौतम राम, विनय कुमार, पवन कुमार, मुकुल कुमार, विकास कुमार गांधी सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल थे। देश में 1 अप्रैल से नए श्रम संहिता (लेबर कोड) लागू होने के विरोध में मधुबनी जिले के जयनगर में विरोध प्रदर्शन किया गया। ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन (ECREU) जयनगर से जुड़े दर्जनों रेल कर्मचारियों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह विरोध प्रदर्शन दरभंगा शाखा के उपाध्यक्ष बैद्यनाथ भारती के नेतृत्व और संरक्षक भूषण सिंह के संरक्षण में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया। ”मजदूर विरोधी चार नए श्रम संहिता लागू किए” सभा को संबोधित करते हुए दरभंगा शाखा के संरक्षक भूषण सिंह ने कहा कि आजादी से पहले मजदूरों के हित में 44 पुराने श्रम संहिता लागू किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने इन पुराने कोडों को रद्द कर ‘मजदूर विरोधी’ चार नए श्रम संहिता लागू किए हैं, जिससे देश की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम करने का प्रावधान भूषण सिंह ने नए श्रम संहिता के प्रावधानों की आलोचना करते हुए कहा कि इनमें 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम करने का प्रावधान है। साथ ही, अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन और हड़ताल करने पर भी रोक लगाई गई है, और यूनियन बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि ये कोड बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को मजदूर विरोधी नीतियों पर चलने की पूरी छूट देते हैं। उन्होंने इन ‘मजदूर विरोधी’ नए श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़क से सदन तक एक मजबूत और बड़ा आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से दरभंगा शाखा के संरक्षक भूषण सिंह, उपाध्यक्ष बैद्यनाथ भारती, स्थानीय नेता कृष्ण कुमार कामत, राकेश कुमार गौतम राम, विनय कुमार, पवन कुमार, मुकुल कुमार, विकास कुमार गांधी सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल थे।


