पहले वेटिंग टिकट नहीं होता क्लियर, फिर उसी ट्रेन में चार्ट वैकेंसी में दिखने लगती है खाली सीटें

पहले वेटिंग टिकट नहीं होता क्लियर, फिर उसी ट्रेन में चार्ट वैकेंसी में दिखने लगती है खाली सीटें

बीना. रेलवे में टिकट विंडों के अलावा टिकट बुक करने का दूसरा माध्मम आइआरसीटीसी है, जिसमें कई ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, जिससे लोग असमंजस में रहते हैं, लेकिन उनका कोई निराकरण नहीं निकल पाता है।

आइआरसीटीसी में कई मामले ऐसे सामने आए है जिसमें वेटिंग टिकट क्लीयर नहीं हुई है और उसके बाद उसी ट्रेन में चार्ट प्रिपेयर होने के बाद चार्ट वैकेंसी में खाली सीटें दिखने लगती है। जिससे वह यात्री सबसे ज्यादा परेशानी ऐसे लोगों को होती है जिन्हें जरूरी यात्रा करनी होती है। इस संबंध में रिजर्वेशन करने वाले अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम ऑनलाइन रहता है, जिसमें कई कंडीशन होती है। इस वजह से पहले टिकट क्लीयर नहीं होता है, वहीं चार्ट वैकेंसी में सीटें दिखती हैं। इस स्थिति में यात्रियों को परेशान होना पड़ता है और क्लियर ​टिकट न मिलने पर कई बार यात्रा टालनी पड़ती है। इसके बाद भी अधिकारी इस समस्या का समाधार नहीं कर पा रह हैं। लोग रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं। लोगों का आरोप है वेटिंग दिखाकर तत्काल और प्रीमियम में ज्यादा दामों पर टिकट बेचे जाते हैंं।

केस नंबर-1

बीना से खजुराहो की यात्रा के लिए विकास चतुर्वेदी नाम के यात्री ने डॉ. आंबेडकर नगर-प्रयागराज एक्सप्रेस के एसी-3 कोच में टिकट बुक किया था। जिसमें उन्होंने टिकट 47 वेटिंग पर बुक किया था। इसके बाद ट्रेन आने के पहले चार्ट प्रिपेयर हुआ तो उनकी वेटिंग 14 पर अटक गई। लेकिन इसके बाद टिकट क्लीयर न होने पर भी उन्हें यात्रा करनी थी। जब वह उसी ट्रेन में जनरल टिकट से यात्रा करने के पहले उन्होंने चार्ट वैकेंसी में देखा तो उसी टे्रन से एसी-3 कोच में उन्हेें बी-2 कोच में 23, 25 नंबर सीट खाली दिखाई दी। जिसपर उनका टिकट क्लीयर होना था।

केस नंबर-2

रीवा-भोपाल रीवांचल एक्सप्रेस में बीना से रीवा की यात्रा करने के लिए राकेश रावत ने स्लीपर कोच में रिजर्वेशन कराया। जब उन्होंने टिकट बुक कराया था तब वेटिंग टिकट 31 थी। लेकिन टिकट क्लीयर नहीं हुआ। इसके बाद जब उन्होंने ने भी चार्ट वैकेंसी में जांच की तो कई स्लीपर कोच में सीटें खाली दिखाई। जबकि यह सीट पहले अलॉट की जा सकती थी।

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