बेगूसराय के साइंटिस्ट की हरिद्वार में मौत:कमरे में फंदे से लटकी मिली लाश, डेढ़ महीने पहले लगी थी नौकरी; गांव पहुंचा शव

बेगूसराय के साइंटिस्ट की हरिद्वार में मौत:कमरे में फंदे से लटकी मिली लाश, डेढ़ महीने पहले लगी थी नौकरी; गांव पहुंचा शव

बेगूसराय के रहने वाले युवा वैज्ञानिक की लाश उत्तराखंड के हरिद्वार में मिली। लाश कमरे में फंदे से लटकी थी। अभयु कुमार सिंह के बेटे रितेश कुमार (28) वैज्ञानिक पतंजलि में रिसर्च करते थे। आर्कियोलॉजिकल विभाग में जूनियर रिसर्चर के पद पर थे। रिसर्च सेंटर के बगल में ही किराए के कमरे में रहते थे। विवार को छुट्टी के दिन रितेश अपने कमरे में ही थे। शाम में जब काफी देर तक उनकी कोई हलचल नहीं हुई, तो उनके सहकर्मियों को चिंता हुई। जब उन्होंने खिड़की से अंदर झांका, तो शव कमरे में फंदे से लटका हुआ था। मंगलवार शाम में लाश बेगूसराय में कोरैया गांव लाई गई। सिमरिया गंगा घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। बड़े भाई नितेश ने मुखाग्नि दी। डेढ़ महीने पहले ही शुरू किया था करियर रितेश कुमार बचपन से ही मेधावी थे और विज्ञान के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते थे। लगभग डेढ़ महीने पहले ही उनका चयन पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुआ था। रितेश की लाश मिलने के बाद संस्थान के मेडिकल विभाग और स्थानीय बहादराबाद थाना की पुलिस को सूचना दी गई।
कमरे से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कमरा अंदर से बंद था। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। कमरे की तलाशी के दौरान कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे मामला और भी ज्यादा पेचीदा हो गया है। बिना किसी सुसाइड नोट के यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि रितेश ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया या फिर यह मामला कुछ और है।
सुसाइड का कारण पता कर रही पुलिस सूचना मिलते ही परिजन हरिद्वार पहुंचे और मंगलवार को रितेश का शव उनके पैतृक गांव लाया गया। ग्रामीण और परिजन इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि जिस बेटे ने अभी करियर की शुरुआत ही की थी, वह इतनी जल्दी उन्हें छोड़कर चला जाएगा। हरिद्वार पुलिस मामले की जांच कर रही है कि क्या नई नौकरी में रितेश पर किसी तरह का मानसिक या काम का दबाव था या किसी निजी कारण से परेशान था। पुलिस रितेश के कॉल रिकॉर्ड्स और सहकर्मियों के बयानों की जांच कर रही है। जिससे मौत से ठीक पहले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके, लेकिन अभी कुछ खुलासा नहीं हुआ है।
बड़ा भाई बैंक मैनेजर है ग्रामीण बताते हैं कि रितेश बचपन से ही काफी शांत स्वभाव के हैं। बड़ा भाई नीतेश कुमार यूको बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और रितेश की शुरू से ही वैज्ञानिक बनने की इच्छा थी। अपना मुकाम अभी हासिल ही किया था। पिता पंचायत समिति सदस्य रह चुके हैं और सामाजिक सरकार में यह परिवार शुरू से ही शामिल रहा है। बेगूसराय के रहने वाले युवा वैज्ञानिक की लाश उत्तराखंड के हरिद्वार में मिली। लाश कमरे में फंदे से लटकी थी। अभयु कुमार सिंह के बेटे रितेश कुमार (28) वैज्ञानिक पतंजलि में रिसर्च करते थे। आर्कियोलॉजिकल विभाग में जूनियर रिसर्चर के पद पर थे। रिसर्च सेंटर के बगल में ही किराए के कमरे में रहते थे। विवार को छुट्टी के दिन रितेश अपने कमरे में ही थे। शाम में जब काफी देर तक उनकी कोई हलचल नहीं हुई, तो उनके सहकर्मियों को चिंता हुई। जब उन्होंने खिड़की से अंदर झांका, तो शव कमरे में फंदे से लटका हुआ था। मंगलवार शाम में लाश बेगूसराय में कोरैया गांव लाई गई। सिमरिया गंगा घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। बड़े भाई नितेश ने मुखाग्नि दी। डेढ़ महीने पहले ही शुरू किया था करियर रितेश कुमार बचपन से ही मेधावी थे और विज्ञान के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते थे। लगभग डेढ़ महीने पहले ही उनका चयन पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुआ था। रितेश की लाश मिलने के बाद संस्थान के मेडिकल विभाग और स्थानीय बहादराबाद थाना की पुलिस को सूचना दी गई।
कमरे से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कमरा अंदर से बंद था। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। कमरे की तलाशी के दौरान कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे मामला और भी ज्यादा पेचीदा हो गया है। बिना किसी सुसाइड नोट के यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि रितेश ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया या फिर यह मामला कुछ और है।
सुसाइड का कारण पता कर रही पुलिस सूचना मिलते ही परिजन हरिद्वार पहुंचे और मंगलवार को रितेश का शव उनके पैतृक गांव लाया गया। ग्रामीण और परिजन इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि जिस बेटे ने अभी करियर की शुरुआत ही की थी, वह इतनी जल्दी उन्हें छोड़कर चला जाएगा। हरिद्वार पुलिस मामले की जांच कर रही है कि क्या नई नौकरी में रितेश पर किसी तरह का मानसिक या काम का दबाव था या किसी निजी कारण से परेशान था। पुलिस रितेश के कॉल रिकॉर्ड्स और सहकर्मियों के बयानों की जांच कर रही है। जिससे मौत से ठीक पहले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके, लेकिन अभी कुछ खुलासा नहीं हुआ है।
बड़ा भाई बैंक मैनेजर है ग्रामीण बताते हैं कि रितेश बचपन से ही काफी शांत स्वभाव के हैं। बड़ा भाई नीतेश कुमार यूको बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और रितेश की शुरू से ही वैज्ञानिक बनने की इच्छा थी। अपना मुकाम अभी हासिल ही किया था। पिता पंचायत समिति सदस्य रह चुके हैं और सामाजिक सरकार में यह परिवार शुरू से ही शामिल रहा है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *