कटिहार में 16 अप्रैल तक शुरू होगी पीएनजी सप्लाई, 715 घरों में रेगुलेटर व मीटर लगाया

कटिहार में 16 अप्रैल तक शुरू होगी पीएनजी सप्लाई, 715 घरों में रेगुलेटर व मीटर लगाया

कटिहार में पीएनजी सप्लाई की राह में सबसे बड़ी बाधा नागपुर स्थित पेसो से मिलने वाली अनापत्ति प्रमाण पत्र है। आईओसीएल के अनुसार, करीब 8 महीने पहले ही सेफ्टी ऑडिट के लिए आवेदन किया जा चुका है। नियमतः पीएनजी सप्लाई से पहले पेसो यह सुनिश्चित करता है कि बिछाई गई पाइपलाइन में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हुआ है या नहीं और यह तय मापदंडों के अनुसार है या नहीं। 200 मीटर के इस महत्वपूर्ण टैप-ऑफ पॉइंट की एनओसी मिलते ही डीएसआर (डिटेल साइट रिपोर्ट) का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी का मानना है कि यदि एनओसी उम्मीद से पहले मिल गई, तो 15 अप्रैल से ही ट्रायल रन शुरू कर दिया जाएगा। ^18 किलोमीटर का एनओसी मिल चुका है, बस 200 मीटर के टैप-ऑफ के लिए नागपुर से अनुमति का इंतजार है। यह एनओसी मिलते ही हम सेफ्टी मानकों की जांच कर ट्रायल शुरू करेंगे। हमारा लक्ष्य 16 अप्रैल तक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराना है। -शेखर आनंद, प्रबंधक, आईओसीएल भास्कर न्यूज | कटिहार अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण गैस संकट की आशंका के बीच कटिहारवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देश के बाद संवेदक ने काम की रफ्तार बढ़ा दी है और अब 16 अप्रैल तक गैस सप्लाई शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में पूर्णिया के जीडी गोयनका स्कूल के समीप से कटिहार के सिरसा स्थित भेरियारहिका स्टॉक पॉइंट तक हाई प्रेशर स्टील पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। परियोजना के अनुसार, जलालगढ़ से पाइपलाइन बिछाने की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी, जिसके बाद 19 किलोमीटर का मुख्य हिस्सा तैयार है। तकनीकी रूप से यह प्रोजेक्ट पेसो (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन) की एनओसी के पेंच में फंसा हुआ था। 18 किलोमीटर लाइन के लिए नागपुर से एनओसी मिल चुकी है, जबकि 200 मीटर के अंतिम टैप-ऑफ पॉइंट के लिए क्लियरेंस का इंतजार है। यह एनओसी मिलते ही पाइपलाइन में गैस छोड़ दी जाएगी। शुरुआती चरण में कटिहार शहर के तेजा टोला और ऑफिसर्स कॉलोनी के उन 715 घरों में चूल्हे जलेंगे, जहां रेगुलेटर और मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं। एजेंसी ने शहर में कुल 80 हजार कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए अब तक करीब 50 किलोमीटर की सर्विस लाइन बिछाई जा चुकी है। चूंकि एलपीजी पूरी तरह आउटसोर्सिंग (आयात) पर निर्भर है, जबकि पीएनजी का उत्पादन हमारे देश में भी होता है, ऐसे में भविष्य में ईंधन की किल्लत को दूर करने में यह मील का पत्थर साबित होगा। ^तेजा टोला और ऑफिसर कॉलोनी में पीएनजी गैस पाइपलाइन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। 16 अप्रैल तक आपूर्ति चालू कर दी जाएगी। इनिशियल स्टेज में 715 घरों में यह कनेक्शन दिया गया है। फिर फेज वाइज आपूर्ति की जाएगी। कुणाल कुमार, अपर जिला आपूर्ति पदाधिकारी, कटिहार। किफायती और पारदर्शी: एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले पीएनजी काफी सस्ती पड़ती है। इसमें बिजली के मीटर की तरह ही बिल आता है, यानी जितनी गैस उपयोग करेंगे, सिर्फ उतना ही पैसा देना होगा। बेहतर सुरक्षा: पीएनजी हवा से हल्की होती है। यदि कभी लीकेज होता भी है, तो यह नीचे फैलने के बजाय तुरंत हवा में ऊपर उड़ जाती है, जिससे आग लगने का खतरा न्यूनतम रहता है। नो टेंशन सप्लाई: पाइपलाइन से सीधे रसोई तक गैस पहुंचने के कारण सिलेंडर बुक करने, उसे लाने-ले जाने या गैस खत्म होने पर डिलीवरी का इंतजार करने का झंझट खत्म हो जाएगा। रसोई में जगह की बचत: घर में भारी-भरकम लोहे के सिलेंडर रखने की जरूरत नहीं होगी। इससे रसोई घर में अतिरिक्त जगह मिलेगी और सफाई भी बनी रहेगी। प्रदूषण मुक्त ईंधन: यह एलपीजी और अन्य पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक स्वच्छ है। इससे धुआं नहीं होता, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहतर है। कटिहार में पीएनजी सप्लाई की राह में सबसे बड़ी बाधा नागपुर स्थित पेसो से मिलने वाली अनापत्ति प्रमाण पत्र है। आईओसीएल के अनुसार, करीब 8 महीने पहले ही सेफ्टी ऑडिट के लिए आवेदन किया जा चुका है। नियमतः पीएनजी सप्लाई से पहले पेसो यह सुनिश्चित करता है कि बिछाई गई पाइपलाइन में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हुआ है या नहीं और यह तय मापदंडों के अनुसार है या नहीं। 200 मीटर के इस महत्वपूर्ण टैप-ऑफ पॉइंट की एनओसी मिलते ही डीएसआर (डिटेल साइट रिपोर्ट) का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी का मानना है कि यदि एनओसी उम्मीद से पहले मिल गई, तो 15 अप्रैल से ही ट्रायल रन शुरू कर दिया जाएगा। ^18 किलोमीटर का एनओसी मिल चुका है, बस 200 मीटर के टैप-ऑफ के लिए नागपुर से अनुमति का इंतजार है। यह एनओसी मिलते ही हम सेफ्टी मानकों की जांच कर ट्रायल शुरू करेंगे। हमारा लक्ष्य 16 अप्रैल तक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराना है। -शेखर आनंद, प्रबंधक, आईओसीएल भास्कर न्यूज | कटिहार अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण गैस संकट की आशंका के बीच कटिहारवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देश के बाद संवेदक ने काम की रफ्तार बढ़ा दी है और अब 16 अप्रैल तक गैस सप्लाई शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में पूर्णिया के जीडी गोयनका स्कूल के समीप से कटिहार के सिरसा स्थित भेरियारहिका स्टॉक पॉइंट तक हाई प्रेशर स्टील पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। परियोजना के अनुसार, जलालगढ़ से पाइपलाइन बिछाने की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी, जिसके बाद 19 किलोमीटर का मुख्य हिस्सा तैयार है। तकनीकी रूप से यह प्रोजेक्ट पेसो (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन) की एनओसी के पेंच में फंसा हुआ था। 18 किलोमीटर लाइन के लिए नागपुर से एनओसी मिल चुकी है, जबकि 200 मीटर के अंतिम टैप-ऑफ पॉइंट के लिए क्लियरेंस का इंतजार है। यह एनओसी मिलते ही पाइपलाइन में गैस छोड़ दी जाएगी। शुरुआती चरण में कटिहार शहर के तेजा टोला और ऑफिसर्स कॉलोनी के उन 715 घरों में चूल्हे जलेंगे, जहां रेगुलेटर और मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं। एजेंसी ने शहर में कुल 80 हजार कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए अब तक करीब 50 किलोमीटर की सर्विस लाइन बिछाई जा चुकी है। चूंकि एलपीजी पूरी तरह आउटसोर्सिंग (आयात) पर निर्भर है, जबकि पीएनजी का उत्पादन हमारे देश में भी होता है, ऐसे में भविष्य में ईंधन की किल्लत को दूर करने में यह मील का पत्थर साबित होगा। ^तेजा टोला और ऑफिसर कॉलोनी में पीएनजी गैस पाइपलाइन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। 16 अप्रैल तक आपूर्ति चालू कर दी जाएगी। इनिशियल स्टेज में 715 घरों में यह कनेक्शन दिया गया है। फिर फेज वाइज आपूर्ति की जाएगी। कुणाल कुमार, अपर जिला आपूर्ति पदाधिकारी, कटिहार। किफायती और पारदर्शी: एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले पीएनजी काफी सस्ती पड़ती है। इसमें बिजली के मीटर की तरह ही बिल आता है, यानी जितनी गैस उपयोग करेंगे, सिर्फ उतना ही पैसा देना होगा। बेहतर सुरक्षा: पीएनजी हवा से हल्की होती है। यदि कभी लीकेज होता भी है, तो यह नीचे फैलने के बजाय तुरंत हवा में ऊपर उड़ जाती है, जिससे आग लगने का खतरा न्यूनतम रहता है। नो टेंशन सप्लाई: पाइपलाइन से सीधे रसोई तक गैस पहुंचने के कारण सिलेंडर बुक करने, उसे लाने-ले जाने या गैस खत्म होने पर डिलीवरी का इंतजार करने का झंझट खत्म हो जाएगा। रसोई में जगह की बचत: घर में भारी-भरकम लोहे के सिलेंडर रखने की जरूरत नहीं होगी। इससे रसोई घर में अतिरिक्त जगह मिलेगी और सफाई भी बनी रहेगी। प्रदूषण मुक्त ईंधन: यह एलपीजी और अन्य पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक स्वच्छ है। इससे धुआं नहीं होता, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहतर है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *