खेत की मिट्टी खुद बताएगी कि पानी कम है, अगले 3 साल में इतना बदल जाएगा चीन, भारत भी उसी तकनीक पर कर रहा काम

खेत की मिट्टी खुद बताएगी कि पानी कम है, अगले 3 साल में इतना बदल जाएगा चीन, भारत भी उसी तकनीक पर कर रहा काम

अगले तीन साल में चीन एक ऐसी दुनिया बनाने की तैयारी में है, जहां आपका घर, आपकी गाड़ी, आपका खेत और आपकी फैक्ट्री सब एक ही नेटवर्क से जुड़े होंगे।

चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय समेत नौ सरकारी विभागों ने मिलकर एक बड़ी कार्य योजना तैयार की है, जो साल 2026 से 2028 तक लागू होगी। इसका मकसद है इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT को इतना बड़ा और मजबूत बनाना कि पूरी अर्थव्यवस्था इस पर टिक सके।

IoT है क्या, सीधे शब्दों में समझिए

IoT का मतलब है- इंटरनेट ऑफ थिंग्स। यह वो तकनीक है जिसमें मशीनें, चीजें और इंसान आपस में बिना किसी के बताए बात करते हैं।

जैसे कि आपका AC खुद बता दे कि सर्विसिंग चाहिए। खेत की मिट्टी खुद संदेश भेजे कि पानी कम है। फैक्ट्री की मशीन पहले से बता दे कि अगले हफ्ते खराब होने वाली है। यही है इंटरनेट ऑफ थिंग्स। चीन इसी तकनीक को अगले तीन साल में हर जगह फैलाना चाहता है।

2028 तक क्या-क्या होगा?

नई योजना में कुछ बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। IoT से जुड़े कनेक्शनों की संख्या एक हजार करोड़ के पार ले जाई जाएगी। दस ऐसे क्षेत्र बनाए जाएंगे जहां एक-एक अरब डिवाइस जुड़े होंगे।

पंद्रह और क्षेत्रों में करोड़ों डिवाइस का नेटवर्क खड़ा होगा। 50 से ज्यादा नए तकनीकी मानक बनाए और सुधारे जाएंगे। और इस पूरे उद्योग का आकार 35 लाख करोड़ युआन से ऊपर ले जाने का लक्ष्य है।

पांच बड़े काम जो करने हैं

सरकार ने इस योजना में पांच मुख्य दिशाएं तय की हैं। IoT उपकरणों को और बेहतर और सस्ता बनाना। प्लेटफॉर्म की सेवाओं को तेज और भरोसेमंद करना। नए उपयोग के तरीके खोजना। नेटवर्क की बुनियाद मजबूत करना। और पूरे उद्योग के लिए एक ऐसा माहौल बनाना जहां छोटी-बड़ी सभी कंपनियां साथ मिलकर बढ़ सकें।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?

चीन जब इस पैमाने पर तकनीक में निवेश करता है तो उसका असर सिर्फ उस पर नहीं पड़ता। पूरी दुनिया में इसका प्रभाव पड़ता है। IoT डिवाइस से लेकर उनके पुर्जे और सॉफ्टवेयर तक, चीन इस पूरी सप्लाई चेन पर काबिज होने की तैयारी में है।

खबर यह भी है कि भारत भी IoT की तरफ बढ़ रहा है लेकिन अगर चीन ने 2028 तक यह मुकाम हासिल कर लिया तो तकनीकी निर्भरता और बढ़ सकती है।

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