ढाका विधायक गैर-सरकारी समिति अध्यक्ष मनोनीत:भाजपा कोटे से राजद नेता को पद मिलने की चर्चा, विरोधी बोले – राज्यसभा वोटिंग में एब्सेंट रहने का पुरस्कार मिला

ढाका विधायक गैर-सरकारी समिति अध्यक्ष मनोनीत:भाजपा कोटे से राजद नेता को पद मिलने की चर्चा, विरोधी बोले – राज्यसभा वोटिंग में एब्सेंट रहने का पुरस्कार मिला

बिहार विधानसभा की अधिसूचना के अनुसार, ढाका से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक फैसल रहमान को बिहार विधानसभा की एक समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भाजपा कोटे से होने की बात सामने आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। “वोटिंग से अनुपस्थित रहने का ‘पुरस्कार’ मिला” राजद विधायक को विधानसभा की गैर-सरकारी विधेयक एवं संकल्प समिति का चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें दिए गए इस पद को राज्यसभा चुनाव में उनके द्वारा वोटिंग नहीं किए जाने से जोड़कर देखा जा रहा है। फैसल रहमान के विरोधियों का कहना है कि उन्हें राज्यसभा वोटिंग से अनुपस्थित रहने का ‘पुरस्कार’ मिला है। AIMIM के नेता राणा रंजीत सिंह अन्य नेताओँ ने उन्हें इस पद पर मनोनित किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। AIMIM के नेता ने अपने फेसबुक वॉल पर इसके बारे में पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘गद्दारी का उपहार बहुत जल्दी मिल गया, सभापति बनने पर बहुत-बहुत मुबारकबाद’ फैसल के विरोधियों ने उन्की नियुक्ति की की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उस दिन उनकी माता की तबीयत खराब थी, तो क्या यह पद राज्यसभा वोटिंग से अनुपस्थित रहने का ‘पुरस्कार’ है। समर्थकों में उत्साह दूसरी तरफ ढाका विधायक फैसल रहमान की इस नियुक्ति से उनके समर्थकों में उत्साह है। उनके समर्थकों ने इस जानकारी के सामने आने के बाद उनके आवास पर पहुंचकर पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और शुभकामनाएं दीं। राज्यसभा वोटिंग में रहे थे एब्सेंट उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सदस्यों के लिए होने वाली वोटिंग के दिन फैसल रहमान विधानसभा में अनुपस्थित रहे थे। उस समय उन्होंने अपनी माता की गंभीर तबीयत का हवाला देते हुए खुद के दिल्ली में होने की बात कही थी। फैसल के अलावा कांग्रेस के तीन नेताओं सुरेंद्र प्रसाद, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह ने भी वोटिंग से खुद को दूर रखा था। जिसके कारण एनडीए के उम्मीदवारों को जीत मिली और तेजस्वी का खेल बिगड़ गया। फैसल रहमान ने क्यों बदला पाला राजद के फैसल रहमान 2025 के विधानसभा चुनाव में पूर्वी चंपारण जिले के ढाका सीट से जीते थे। उन्हें सिर्फ 178 वोटों से जीत मिली। उनकी जीत को भाजपा प्रत्याशी पवन जायसवाल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनपर फर्जी वोटों के सहारे चुनाव जीतने का आरोप लगाया है। क्यों बदला पाला? 10वीं पास फैसल रहमान कोर्ट-कचहरी के चक्कर से परेशान हैं। भाजपा सांसद दुबे ने लोकसभा में SIR पर चर्चा करते हुए 9 दिसंबर को फैसल पर विदेश में बैठे लोगों के फर्जी वोट डलवाने के आरोप लगाए। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि फैसल को अपनी विधायकी जाने का डर है। राहत की उम्मीद में पाला बदला है। 4 विधायकों के वोटिंग नहीं करने से NDA आसानी से जीता बिहार में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 41 वोटों की जरूरत थी। महागठबंधन के चार विधायक गायब हो गए। इससे स्थिति बदल गई। महागठबंधन के 4 विधायकों ने वोट नहीं किया। इस कारण टोटल वोट 243-4=237 हो गया। इस आधार पर एक सीट जीतने के लिए 40 वोटों की जरूरत रह गई। वहीं NDA के पास 202 विधायक थे। मतलब NDA को सभी 5 सीटें आसानी से मिल गई। बिहार विधानसभा की अधिसूचना के अनुसार, ढाका से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक फैसल रहमान को बिहार विधानसभा की एक समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भाजपा कोटे से होने की बात सामने आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। “वोटिंग से अनुपस्थित रहने का ‘पुरस्कार’ मिला” राजद विधायक को विधानसभा की गैर-सरकारी विधेयक एवं संकल्प समिति का चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें दिए गए इस पद को राज्यसभा चुनाव में उनके द्वारा वोटिंग नहीं किए जाने से जोड़कर देखा जा रहा है। फैसल रहमान के विरोधियों का कहना है कि उन्हें राज्यसभा वोटिंग से अनुपस्थित रहने का ‘पुरस्कार’ मिला है। AIMIM के नेता राणा रंजीत सिंह अन्य नेताओँ ने उन्हें इस पद पर मनोनित किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। AIMIM के नेता ने अपने फेसबुक वॉल पर इसके बारे में पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘गद्दारी का उपहार बहुत जल्दी मिल गया, सभापति बनने पर बहुत-बहुत मुबारकबाद’ फैसल के विरोधियों ने उन्की नियुक्ति की की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उस दिन उनकी माता की तबीयत खराब थी, तो क्या यह पद राज्यसभा वोटिंग से अनुपस्थित रहने का ‘पुरस्कार’ है। समर्थकों में उत्साह दूसरी तरफ ढाका विधायक फैसल रहमान की इस नियुक्ति से उनके समर्थकों में उत्साह है। उनके समर्थकों ने इस जानकारी के सामने आने के बाद उनके आवास पर पहुंचकर पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और शुभकामनाएं दीं। राज्यसभा वोटिंग में रहे थे एब्सेंट उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सदस्यों के लिए होने वाली वोटिंग के दिन फैसल रहमान विधानसभा में अनुपस्थित रहे थे। उस समय उन्होंने अपनी माता की गंभीर तबीयत का हवाला देते हुए खुद के दिल्ली में होने की बात कही थी। फैसल के अलावा कांग्रेस के तीन नेताओं सुरेंद्र प्रसाद, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह ने भी वोटिंग से खुद को दूर रखा था। जिसके कारण एनडीए के उम्मीदवारों को जीत मिली और तेजस्वी का खेल बिगड़ गया। फैसल रहमान ने क्यों बदला पाला राजद के फैसल रहमान 2025 के विधानसभा चुनाव में पूर्वी चंपारण जिले के ढाका सीट से जीते थे। उन्हें सिर्फ 178 वोटों से जीत मिली। उनकी जीत को भाजपा प्रत्याशी पवन जायसवाल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनपर फर्जी वोटों के सहारे चुनाव जीतने का आरोप लगाया है। क्यों बदला पाला? 10वीं पास फैसल रहमान कोर्ट-कचहरी के चक्कर से परेशान हैं। भाजपा सांसद दुबे ने लोकसभा में SIR पर चर्चा करते हुए 9 दिसंबर को फैसल पर विदेश में बैठे लोगों के फर्जी वोट डलवाने के आरोप लगाए। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि फैसल को अपनी विधायकी जाने का डर है। राहत की उम्मीद में पाला बदला है। 4 विधायकों के वोटिंग नहीं करने से NDA आसानी से जीता बिहार में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 41 वोटों की जरूरत थी। महागठबंधन के चार विधायक गायब हो गए। इससे स्थिति बदल गई। महागठबंधन के 4 विधायकों ने वोट नहीं किया। इस कारण टोटल वोट 243-4=237 हो गया। इस आधार पर एक सीट जीतने के लिए 40 वोटों की जरूरत रह गई। वहीं NDA के पास 202 विधायक थे। मतलब NDA को सभी 5 सीटें आसानी से मिल गई।  

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