दिल हो, किडनी हो या लंग जैसे शरीर के अहम अंग हों, अब इनसे जुड़ी समस्या की कागजी रिपोर्ट नहीं मिलेगी। एम्स भोपाल देश में पहला संस्थान होगा, जो इनके 3डी मॉडल तैयार करेगा। जिससे डॉक्टर इन अंगों को हाथ में लेकर बीमारी की स्थिति और उससे पड़ने वाले प्रभाव को सामने से देख सकेंगे। इसके आधार पर ही इलाज की रणनीति तय करेंगे। इसके लिए एम्स भोपाल ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत समझौता किया है। अब 3डी एनाटॉमी एवं पैथोलॉजी मॉडल गैलरी स्थापित की जाएगी। देखने और छूने में होगा असली की तरह
एम्स से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक सीटी स्कैन होने पर अंगों से जुड़ी समस्या को फिल्म (प्रिंटआउट) के जरिए समझते हैं। यदि इसमें स्थिति साफ न हो तो जांच रिपोर्ट की वीडियो को सीडी के माध्यम से लैपटॉप पर देखते हैं। अब इससे एक कदम आगे की तकनीक को अपनाते हुए मरीज के अंग का हूबहू एक 3डी मॉडल तैयार किया जाएगा, जो देखने और छूने में बिल्कुल असली अंग की तरह होगा। यह मॉडल जांच रिपोर्ट के आधार पर 3डी प्रिंटर तैयार करेगा। इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल किया जा रहा है, जो सीटी स्कैन मशीन और 3डी प्रिंटर को साथ जोड़ेगा। जिसके जरिए सीटी स्कैन की रिपोर्ट सीधे 3डी प्रिंटर में पहुंचेगी और प्रिंटर उस आधार पर एक मॉडल (आर्टिफिशियल अंग) तैयार कर देगा। क्या है 3डी मेडिकल मॉडलिंग? मरीज बेहतर तरीके से समझ सकेंगे बीमारी
मरीज अपने अंगों के 3डी मॉडल देख सकेंगे। इससे न सिर्फ डॉक्टर सर्जरी से पहले बेहतर तैयारी कर पाएंगे, बल्कि मरीज भी अपनी बीमारी और इलाज को आसानी से समझ सकेंगे। आमतौर पर मरीजों के लिए मेडिकल रिपोर्ट समझना कठिन होता है, लेकिन 3डी मॉडल के जरिए वे अपने अंगों की वास्तविक स्थिति को आसानी से देख और समझ सकेंगे। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच बेहतर संवाद भी संभव होगा। मरीज को क्या फायदा? जटिल सर्जरी से पहले सर्जन कर सकेंगे प्रैक्टिस
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, कई बार ऐसे केस सामने आते हैं जिनकी स्थिति बेहद दुर्लभ होती है। ऐसे मरीजों में सर्जरी की योजना बनाना बेहद मुश्किल होता है। कई बार सर्जरी के दौरान नई चुनौतियां आती हैं, जिन्हें सर्जन बेहद कम समय में समझकर फैसला लेता है। इसमें गलती होने की संभावना बनी रहती है। 3डी प्रिंटर से निकलने वाले अंग इस समस्या को दूर करने में मदद करेंगे। डॉक्टर पहले संबंधित अंग पर सर्जरी कर प्रैक्टिस कर सकेंगे, जिससे मरीज में प्रोसीजर करते समय गलती होने की संभावना न के बराबर रहेगी। दुनिया में कहां हो रहा इस्तेमाल? 3डी मॉडल से बनेगी गैलरी
प्रस्तावित गैलरी में मरीजों के सीटी और एमआरआई डेटा के आधार पर तैयार किए गए 3डी प्रिंटेड मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इन मॉडलों के जरिए डॉक्टर सर्जरी से पहले संबंधित अंग पर अभ्यास कर सकेंगे। इससे जटिल ऑपरेशन को समझना और सफलतापूर्वक करना आसान होगा। मेडिकल छात्रों के लिए भी उपयोगी
यह गैलरी सिर्फ मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी। जटिल एनाटॉमी और पैथोलॉजी को समझने में 3डी मॉडल एक स्थायी शैक्षणिक संसाधन के रूप में काम करेंगे। एम्स भोपाल का सीएसआर समझौता
यह एमओयू एम्स भोपाल का पहला सीएसआर समर्थित समझौता है, जो नवाचार आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। समारोह में एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर, डीन प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं आईओसीएल की ओर से स्टेट हेड अजय कुमार श्रीवास्तव और महाप्रबंधक पी.के. सकलेचा भी उपस्थित रहे। सीएसआर फंड से मिलेंगे नए प्रिंटर और कंज्यूमेबल्स
इस एमओयू के तहत इस तकनीक के लिए पैसा आईओसीएल सीएसआर फंड से देगा। इस फंड का इस्तेमाल एम्स में नए 3डी मॉडल प्रिंटर इंस्टॉल करने के साथ मॉडल बनाने के लिए जरूरी कंज्यूमेबल्स खरीदने के लिए किया जाएगा।


