Toilet Paper Side Effects: आजकल लोग फिटनेस के लिए क्या कुछ नहीं करते, लेकिन क्या आपने कभी अपनी आदतों पर ध्यान दिया है? जिस टॉयलेट पेपर को आप सफाई के लिए सबसे अच्छा मानते हैं, वही आपकी सेहत का दुश्मन बन सकता है। हाल ही में मेल रॉबिंस पॉडकास्ट (Mel Robbins Podcast) में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की मशहूर डॉक्टर तृषा पसरिचा ने एक ऐसी बात कही है जिससे आप भी इस पेपर का इस्तेमाल बंद कर देंगे। डॉक्टर का कहना है कि सिर्फ टॉयलेट पेपर के भरोसे रहना आपकी स्किन और हाइजीन के लिए बहुत गलत है। आइए जानते हैं डॉक्टर ने क्या-क्या जरूरी बातें बताई हैं।
ज्यादा रगड़ना हो सकता है नुकसानदायक
डॉक्टर पसरिचा कहती हैं कि हमारे शरीर का वह हिस्सा बहुत ही कोमल और नाजुक होता है। जब हम टॉयलेट पेपर को बार-बार वहां यूज करते हैं, तो वह हिस्सा छिल सकता है। वहां छोटे-छोटे ऐसे जख्म हो सकते हैं जो आंखों से नहीं दिखते, लेकिन आगे चलकर जलन और इन्फेक्शन पैदा कर देते हैं। इसकी जगह बिडेट या जेट स्प्रे का इस्तेमाल करना सबसे बेस्ट है।
पानी क्यों है बेहतर?
डॉक्टर ने 2023 की एक पुरानी रिसर्च का जिक्र करते हुए बताया कि जो लोग सिर्फ पेपर यूज करते हैं, उनके हाथों पर ज्यादा कीटाणु पाए गए और जो पानी का इस्तेमाल करते हैं उन्हें ऐसी दिक्कत कभी नहीं होती। पानी बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए गंदगी को पूरी तरह साफ कर देता है।
अगर पेपर यूज करना पड़े तो
कई बार ऐसा होता है कि हम ऐसी जगह होते हैं जहां पानी की सुविधा नहीं होती। ऐसे में डॉक्टर ने सलाह दी है कि पेपर को वहां जोर-जोर से रगड़ें नहीं। इसके बजाय पेपर को हल्के हाथ से सिर्फ डैब करें। यह तरीका उन महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है जो हाल ही में मां बनी हैं या जिन्हें पाइल्स की शिकायत है।
महिलाओं के लिए
महिलाओं को होने वाले यूरिन इन्फेक्शन (UTI) को लेकर भी डॉक्टर ने बताया कि सफाई हमेशा आगे से पीछे की ओर होनी चाहिए। अगर आप उल्टा करती हैं, तो पीछे के बैक्टीरिया आगे आ सकते हैं जिससे बीमारियां होने का डर रहता है। यहां भी पानी का इस्तेमाल और डैब ही सबसे अच्छा रहता है।
कब जाना चाहिए डॉक्टर के पास?
डॉक्टर तृषा ने बताया कि अगर पेट साफ करते वक्त खून आता है, तो उसे सिर्फ पाइल्स समझकर इग्नोर न करें। अगर आपको कोई पुरानी बीमारी नहीं है और फिर भी ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और चेकअप करवाएं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कोलोनोस्कोपी करवानी चाहिए। यह किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


