इजराइल के लिए कर रहे थे जासूसी, ईरान ने 54 लोगों को पकड़ा, अब हो सकती है मौत की सजा

इजराइल के लिए कर रहे थे जासूसी, ईरान ने 54 लोगों को पकड़ा, अब हो सकती है मौत की सजा

युद्ध के बीच ईरान की सेना ने बड़ा एक्शन लिया है। इजराइल को ईरान के बारे खुफिया जानकारी देने वाले 54 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ के अनुसार, इन लोगों पर इजराइल को खुफिया जानकारी देने के साथ ईरान पर हमले की साजिश रचने का भी आरोप है।

इजराइल को भेजी संदिग्ध तस्वीरें

खुफिया मंत्रालय ने बताया कि तेहरान में गिरफ्तार किए गए 41 लोगों पर यह आरोप है कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल द्वारा निशाना बनाए गए ठिकानों की तस्वीरें लीं और उन्हें इजराइल शासन के मीडिया मुख्यालय को भेजा। इसके अलावा, उन पर संवेदनशील ठिकानों की जानकारी साझा करने जैसे अन्य मिलते-जुलते अपराधों का भी आरोप है।

जासूसी करने वालों के लिए मौत की सजा का प्रावधान

ईरानी मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि कुछ अन्य लोगों ने कथित तौर पर अमेरिका और इजराइल के समर्थन में काम करने वाले भाड़े के गुटों में हिस्सा लिया।बता दें कि हाल के महीनों में, ईरान ने जासूसी के आरोपों में कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान के नए और सख्त जासूसी कानून के तहत, अमेरिका या इजराइल को किसी भी तरह की जानकारी देने पर मौत की सजा हो सकती है।

तेल भंडार को अमेरिका ने बनाया निशाना

बता दें कि अमेरिका ने अपने ताजा हमले में ईरान के तेल भंडार को निशाना बनाया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के वीडियो को भी साझा किया। इसके बाद ही ईरान ने 54 लोगों को गिरफ्तार किया है।

ईरान के अधिकारियों ने पहले अमेरिका और इजराइल को जानकारी भेजने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही इस मामले में ईरानी सरकार ने कार्रवाई करते हुए दो अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिए। इन पर कथित तौर पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे।

क्या बोले ईरानी राष्ट्रपति?

उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस हफ्ते की शुरुआत में देश में पैरामिलिट्री इराकी फोर्स के काफिले का स्वागत करने के बाद इराक के लोगों का शुक्रिया अदा किया है।

पेजेश्कियन ने एक्स पर लिखा- इराकी मुस्लिम लोग इस गलत लड़ाई में ईरान के साथ बहादुरी से खड़े रहे। यह रवैया जगह की मजबूरी की वजह से नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और साझा धार्मिक मूल्यों की वजह से है। मैं इराकी लोगों, अधिकारियों और लड़ाकों से दिल से हाथ मिलाता हूं।

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