बुलंदशहर में वर्ष 2012 के एक हत्या मामले में अपर सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत की अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 50,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पीड़ित परिजनों के अनुसार, आरोपी एक पुराने हत्या मामले में पैरवी किए जाने से नाराज थे। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केशव देव शर्मा ने बताया कि यह घटना 11 जनवरी 2012 को हुई थी। गांव अकबरपुर निवासी मोहम्मद नाजिम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह अपने भाई सादिम, चाचा समीम, चाची सितारा और बहन शबा के साथ सफारी कार से जा रहे थे। भूड रोड स्थित सुशीला बिहार की गली के पास उनके चाचा समीम सामान खरीदने के लिए उतरे। इसी दौरान, हात्माबाद गांव निवासी आसिफ व कासिम (पुत्र मुख्तियार) और जब्बार (पुत्र गफ्फार) ने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर समीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। हमलावर हवा में फायरिंग करते हुए फरार हो गए। गंभीर हालत में समीम को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मोहम्मद नाजिम ने बताया कि उनके छोटे चाचा सलीम की जनवरी 2010 में आसिफ के पिता मुख्तियार, चाचा इरशाद और मुस्ताक ने हत्या कर दी थी। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और मृतक समीम इसी प्रकरण की पैरवी कर रहे थे। आरोप था कि 2010 की हत्या के मामले में मुख्तियार, मुस्ताक और इरशाद जेल में थे, और उन्होंने जेल में रहते हुए ही समीम की हत्या की योजना बनाई थी। इस मामले में कोर्ट ने हत्या को अंजाम देने वाले तीनों आरोपियों जब्बार, अकरम और आसिफ को अपर सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत की अदालत ने हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।


