झारखंड में 750 करोड़ रुपए से अधिक के कथित शराब घोटाले को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि एजेंसी निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार को बचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आर्थिक अपराध में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होना खुद में संदेह पैदा करता है। चार्जशीट में देरी से आरोपियों को मिला फायदा बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2022 में उत्पाद नीति में बदलाव कर एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआत में 38 करोड़ रुपए का मामला अब बढ़कर 750 करोड़ रुपए से अधिक का हो चुका है। ACB ने मई 2025 में कई अहम अधिकारियों और संबंधित लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के कारण अधिकांश आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह देरी जानबूझकर की गई, ताकि आरोपियों को कानूनी राहत मिल सके। आरोपी को मिला ट्रांजिट बेल, फिर हुआ फरार मामले में ACB की कार्यप्रणाली पर सवाल तब और गहरे हो गए जब छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया गिरफ्तारी के बाद फरार हो गया। जनवरी 2026 में गोवा से गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट बेल मिली और वह पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। बाबूलाल मरांडी ने इसे एजेंसी की बड़ी विफलता बताते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में आरोपियों का फरार होना जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि 17 में से 14 आरोपियों को जमानत मिल जाना इस बात का प्रमाण है कि जांच कमजोर तरीके से की जा रही है। राज्यपाल से सीबीआई जांच का किया आग्रह नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस मामले में संवैधानिक दायित्व निभाते हुए हस्तक्षेप करें। उन्होंने ACB को तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश देने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की अनुशंसा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म हो सकता है। झारखंड में 750 करोड़ रुपए से अधिक के कथित शराब घोटाले को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि एजेंसी निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार को बचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आर्थिक अपराध में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होना खुद में संदेह पैदा करता है। चार्जशीट में देरी से आरोपियों को मिला फायदा बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2022 में उत्पाद नीति में बदलाव कर एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआत में 38 करोड़ रुपए का मामला अब बढ़कर 750 करोड़ रुपए से अधिक का हो चुका है। ACB ने मई 2025 में कई अहम अधिकारियों और संबंधित लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के कारण अधिकांश आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह देरी जानबूझकर की गई, ताकि आरोपियों को कानूनी राहत मिल सके। आरोपी को मिला ट्रांजिट बेल, फिर हुआ फरार मामले में ACB की कार्यप्रणाली पर सवाल तब और गहरे हो गए जब छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया गिरफ्तारी के बाद फरार हो गया। जनवरी 2026 में गोवा से गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट बेल मिली और वह पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। बाबूलाल मरांडी ने इसे एजेंसी की बड़ी विफलता बताते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में आरोपियों का फरार होना जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि 17 में से 14 आरोपियों को जमानत मिल जाना इस बात का प्रमाण है कि जांच कमजोर तरीके से की जा रही है। राज्यपाल से सीबीआई जांच का किया आग्रह नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस मामले में संवैधानिक दायित्व निभाते हुए हस्तक्षेप करें। उन्होंने ACB को तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश देने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की अनुशंसा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म हो सकता है।


