Assam Assembly Elections के लिए BJP, Congress ने जारी किये घोषणापत्र, क्या भाजपा के विकास मॉडल पर भारी पड़ेगी कांग्रेस की नकद की गारंटी?

Assam Assembly Elections के लिए BJP, Congress ने जारी किये घोषणापत्र, क्या भाजपा के विकास मॉडल पर भारी पड़ेगी कांग्रेस की नकद की गारंटी?
असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस ने अपने अपने घोषणापत्र जारी कर मतदाताओं को लुभाने की पूरी कोशिश की है। एक ओर भाजपा ने विकास, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सहायता और अधिकारों के विस्तार को अपने अभियान का केंद्र बनाया है। ऐसे में दोनों दलों के घोषणापत्र की तुलना चुनावी दिशा को समझने में महत्वपूर्ण हो जाती है।
हम आपको बता दें कि गुवाहाटी में आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाजपा का संकल्प पत्र जारी करते हुए पांच लाख करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा निवेश का बड़ा वादा किया। इस घोषणापत्र में कुल 31 वादे शामिल हैं, जिनमें मूल निवासियों की जमीन, विरासत और सम्मान की रक्षा को प्रमुखता दी गई है। भाजपा ने बांग्लादेशी मियांओं द्वारा अतिक्रमित जमीन को वापस लेने, समान नागरिक संहिता लागू करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात कही है।

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सीतारमण ने कहा कि भाजपा का यह घोषणापत्र पिछले एक दशक में हुए विकास पर आधारित है, जिसे कांग्रेस अपने लंबे शासनकाल में हासिल नहीं कर सकी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासन में असम में शांति स्थापित हुई है और विकास को गति मिली है। उन्होंने कहा कि अब कई युवा असमी विदेशों की नौकरियां छोड़कर राज्य में लौट रहे हैं, जो बढ़ते अवसरों का संकेत है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियों के कारण असम लंबे समय तक अफस्पा के दायरे में रहा।
इसके विपरीत कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पांच प्रमुख गारंटी पेश की हैं, जो सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ी हुई हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नौबोइचा में आयोजित जनसभा में घोषणापत्र जारी करते हुए महिलाओं के लिए बिना शर्त मासिक आर्थिक सहायता का बड़ा वादा किया। कांग्रेस का कहना है कि हर महिला को सीधे बैंक खाते में मासिक धनराशि दी जाएगी, साथ ही उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए पचास हजार रुपये की सहायता भी मिलेगी।
कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा दी जा रही सहायता शर्तों से बंधी होती है, जबकि उनकी योजना पूरी तरह बिना शर्त होगी। इसके अलावा कांग्रेस ने प्रत्येक परिवार को पच्चीस लाख रुपये तक का नगद रहित स्वास्थ्य बीमा देने का वादा किया है।
भूमि अधिकार के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने बड़ा ऐलान किया है। पार्टी ने एक लाख नहीं बल्कि दस लाख भूमिपुत्रों को स्थायी जमीन का पट्टा देने का वादा किया है, जिससे लोगों को हर साल कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही राज्य के सभी वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने एक हजार दो सौ पचास रुपये देने की योजना भी घोषणापत्र में शामिल है।
कांग्रेस ने न्याय के मुद्दे को भी प्रमुखता दी है। पार्टी ने दिवंगत जुबीन गर्ग मामले में सौ दिनों के भीतर न्याय दिलाने का वादा किया है और पूरे मामले की साजिश का खुलासा करने की बात कही है। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने पर सांप्रदायिक तनाव फैलाने वालों के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाएगा, जिसमें दोषियों को पांच साल तक की सजा दी जाएगी।
दोनों घोषणापत्रों की तुलना करें तो भाजपा का फोकस बड़े स्तर पर विकास, निवेश और कानून व्यवस्था पर है, जबकि कांग्रेस सीधे आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और अधिकार आधारित योजनाओं पर जोर दे रही है। भाजपा जहां दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा और स्थिरता की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस तत्काल राहत और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दे रही है।
हम आपको बता दें कि असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान नौ अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को की जाएगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता विकास बनाम गारंटी के इस मुकाबले में किसे प्राथमिकता देते हैं। देखा जाये तो यह चुनाव न केवल असम की राजनीति की दिशा तय करेगा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देगा।

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