US on Hormuz Strait: ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का आज 32वां दिन है। इस संघर्ष ने दुनिया भर के देशों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए सार्वजनिक तौर पर ईरान को धमकाते रहे हों, लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अब अमेरिका की रणनीति इसमें बदलाव की ओर बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हैं, भले ही होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुल पाए। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट को जबरदस्ती खुलवाने की कोशिश युद्ध को लंबा खींच सकती है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाए बिना भी ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने का विकल्प देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका की योजना ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमता को कमजोर करने की है। इसके बाद ईरान पर कूटनीतिक दबाव डालकर उसे व्यापार बहाल करने के लिए मजबूर किया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन इसी रणनीति के तहत यूरोप और खाड़ी देशों को आगे करके ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयानों से भी इसके संकते मिलते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अल जजीरा के साथ एक इंटरव्यू में कहा है कि उनके देश को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए उद्देश्य को पाने में काफी आगे है। इसमें ईरान की एयरफोर्स और नेवी को कमजोर करना और उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चरों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाना शामिल है।
रुबियो ने कहा, ‘हम यह लक्ष्य हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करने के लिए ईरान की कोई भी कोशिश स्वीकार्य नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता।
ईरान बोला, हमारी कार्रवाई हमलावरों के खिलाफ
मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति के लिए ईरान ने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए सऊदी अरब से अमेरिकी सेना को बाहर निकालने की अपील की।
अराघची ने कहा, ‘सऊदी अरब का ईरान सम्मान करता है और उसे अपना भाई देश मानता है। हमारी कार्रवाई उन हमलावरों के खिलाफ है, जो न तो अरबों का सम्मान करते हैं और न ही ईरानियों का। अब समय आ गया है कि अमेरिकी सशस्त्र बलों को बाहर निकाला जाए।’


